पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा: पिनाराई विजयन ने केंद्र सरकार को बताया 'क्रूर विश्वासघात', वापसी की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पेट्रोल-डीजल ₹3 महंगा: पिनाराई विजयन ने केंद्र सरकार को बताया 'क्रूर विश्वासघात', वापसी की मांग

सारांश

पूर्व केरल मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने पेट्रोल-डीजल में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी को 'क्रूर विश्वासघात' बताया। उनका आरोप है कि जब कच्चा तेल सस्ता था तब राहत नहीं मिली, और अब घाटे का बहाना बनाकर जनता पर बोझ लादा जा रहा है।

मुख्य बातें

पूर्व केरल मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने 15 मई 2026 को पेट्रोल-डीजल मूल्य वृद्धि पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की।
केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ाए हैं।
विजयन ने इस फैसले को आम जनता के साथ 'क्रूर विश्वासघात' करार दिया और तत्काल वापसी की माँग की।
उनके अनुसार, कच्चे तेल की कम कीमतों का फायदा उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँचाया गया, लेकिन बढ़ोतरी का बोझ जनता पर डाला जा रहा है।
एलपीजी की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति में कमी का मुद्दा भी उठाया गया।
विजयन ने चेतावनी दी कि यह बढ़ोतरी परिवहन, रोज़मर्रा की वस्तुओं और ज़रूरी सामान की कीमतों को भी प्रभावित करेगी।

पूर्व केरल मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने 15 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने इस फैसले को आम जनता के साथ 'क्रूर विश्वासघात' करार देते हुए इसे तत्काल वापस लेने की माँग की।

मुख्य आरोप: जनता पर अतिरिक्त बोझ

विजयन ने कहा कि महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत के बीच आम परिवार पहले से ही भारी आर्थिक दबाव में हैं। उनके अनुसार, ऐसे संकटपूर्ण समय में ईंधन की कीमतें बढ़ाकर केंद्र सरकार ने लोगों की मुश्किलें और गहरी कर दी हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि 3 रुपए प्रति लीटर की यह बढ़ोतरी केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगी — इसका सीधा असर परिवहन लागत, रोज़मर्रा की वस्तुओं और ज़रूरी सामान की कीमतों पर पड़ेगा। इससे मज़दूरों, किसानों और मध्यम वर्गीय परिवारों की परेशानियाँ और बढ़ेंगी।

कच्चे तेल पर सरकार की नीति पर सवाल

विजयन ने आरोप लगाया कि जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें कम हुई थीं, तब केंद्र सरकार ने उसका लाभ आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुँचाया। उनके अनुसार, अब तेल कंपनियों के घाटे का हवाला देकर जनता पर महंगाई का नया बोझ लादा जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू ईंधन मूल्य नीति को लेकर सवाल पहले से उठते रहे हैं। गौरतलब है कि ईंधन मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता की माँग लंबे समय से विपक्षी दलों की साझा माँग रही है।

एलपीजी और रसोई गैस का मुद्दा भी उठाया

पूर्व मुख्यमंत्री ने रसोई गैस की लगातार बढ़ती कीमतों और एलपीजी की आपूर्ति में कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियाँ आम जनता के हितों की बजाय कॉरपोरेट हितों की रक्षा करती प्रतीत होती हैं, और करोड़ों परिवारों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी पहले से ही कठिन बना दी गई है।

आम जनता पर असर

विजयन ने चेतावनी दी कि ईंधन की इस बढ़ोतरी से देशभर में घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कठिन आर्थिक परिस्थितियों में सरकार की ज़िम्मेदारी जनता को राहत देना होती है, न कि उनकी मुश्किलें बढ़ाना।

केंद्र से तत्काल वापसी की माँग

विजयन ने केंद्र सरकार से इस फैसले को तुरंत वापस लेने की माँग दोहराई। उन्होंने कहा कि महंगाई से जूझ रहे लोगों को राहत देने की बजाय कीमतें बढ़ाते रहना जनविरोधी नीति का प्रमाण है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दबाव और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक वैध नीतिगत सवाल भी छुपा है — कच्चे तेल की कम कीमतों का लाभ उपभोक्ताओं तक न पहुँचाने और बढ़ोतरी का बोझ तुरंत जनता पर डालने की यह असमानता लंबे समय से चली आ रही है। यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने ईंधन मूल्य नीति में पारदर्शिता की माँग की हो — फिर भी केंद्र सरकार ने अब तक कोई स्वतंत्र मूल्य-समीक्षा तंत्र स्थापित नहीं किया। असली सवाल यह है कि तेल कंपनियों के घाटे और उपभोक्ता राहत के बीच संतुलन कौन तय करता है, और किसके हित में।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। यह बढ़ोतरी देशभर में लागू है और इसका असर परिवहन व रोज़मर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ने की आशंका है।
पिनाराई विजयन ने ईंधन मूल्य वृद्धि पर क्या कहा?
पूर्व केरल मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने इस बढ़ोतरी को आम जनता के साथ 'क्रूर विश्वासघात' बताया और केंद्र सरकार से इसे तुरंत वापस लेने की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कच्चा तेल सस्ता था, तब राहत नहीं दी गई और अब घाटे का बहाना बनाकर जनता पर बोझ डाला जा रहा है।
ईंधन मूल्य वृद्धि का आम जनता पर क्या असर होगा?
विजयन के अनुसार, इस बढ़ोतरी का असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन लागत बढ़ने से रोज़मर्रा की वस्तुओं और ज़रूरी सामान के दाम भी बढ़ेंगे, जिससे मज़दूर, किसान और मध्यम वर्गीय परिवार सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे।
क्या एलपीजी की कीमतों पर भी सवाल उठाए गए?
हाँ, विजयन ने रसोई गैस की लगातार बढ़ती कीमतों और एलपीजी की आपूर्ति में कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों ने पहले से ही करोड़ों परिवारों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी कठिन बना दी है।
केंद्र सरकार की ईंधन मूल्य नीति पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
विजयन ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियाँ आम जनता के हितों की बजाय कॉरपोरेट हितों की रक्षा करती हैं। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल के सस्ते होने पर उपभोक्ताओं को लाभ नहीं मिला, लेकिन तेल कंपनियों के घाटे का बोझ जनता पर डाला जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 1 घंटा पहले
  3. 1 घंटा पहले
  4. 1 घंटा पहले
  5. 2 घंटे पहले
  6. 3 घंटे पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 1 महीना पहले