पेट्रोल-डीजल ₹3 प्रति लीटर महंगा: कैट ने बताया जिम्मेदार फैसला, वैश्विक अस्थिरता का दिया हवाला
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय व्यापारी परिसंघ (कैट) ने 15 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की वृद्धि का समर्थन करते हुए इसे 'सोचा-समझा और जिम्मेदार निर्णय' करार दिया। संगठन के अनुसार यह कदम वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता की रक्षा के लिए अनिवार्य था।
कैट का पक्ष और तर्क
कैट के महासचिव एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि इस निर्णय को मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक कच्चे तेल बाजारों में व्याप्त व्यवधानों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चल रहे युद्धों और संघर्षों ने वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखलाओं को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे कीमतें बढ़ी हैं और ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।'
आयात निर्भरता और घरेलू असर
खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का घरेलू ईंधन अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने चेताया कि लंबे समय तक ईंधन की कीमतों को कृत्रिम रूप से नियंत्रित रखने से सार्वजनिक वित्त और तेल विपणन कंपनियों पर अत्यधिक दबाव पड़ सकता है, जो समग्र अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक होगा।
परिवहन और रसद पर संभावित असर
कैट ने माना कि ईंधन की बढ़ी हुई कीमतों का परिवहन और रसद लागत पर कुछ प्रभाव अवश्य पड़ेगा। हालाँकि संगठन ने जोर देकर कहा कि चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों में व्यापक राष्ट्रीय हित में लिए गए ऐसे निर्णयों का नागरिकों और व्यवसायों को समर्थन करना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब आलोचक ईंधन मूल्य वृद्धि के आम उपभोक्ता पर पड़ने वाले बोझ को लेकर चिंता जता रहे हैं।
सरकार के प्रयासों की सराहना
खंडेलवाल ने कहा कि सरकार ने संतुलित ईंधन कीमतें बनाए रखकर और जब भी संभव हो राहत उपाय प्रदान करके उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा, 'वर्तमान परिदृश्य में देश की ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा के लिए सीमित वृद्धि आवश्यक है।'
दीर्घकालिक दृष्टिकोण
कैट महासचिव ने अंत में कहा, 'भारत की आर्थिक मजबूती और ऊर्जा स्थिरता अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ किए गए अस्थायी समायोजन वैश्विक चुनौतियों का आत्मविश्वास से सामना करने की देश की क्षमता को मजबूत करेंगे।' गौरतलब है कि भारत में ईंधन की कीमतों में यह संशोधन ऐसे समय में हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में भारी अस्थिरता बनी हुई है।