उन्नाव रेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमानत वाला हाईकोर्ट आदेश रद्द किया, 3 महीने में नए फैसले के निर्देश

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उन्नाव रेप केस: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमानत वाला हाईकोर्ट आदेश रद्द किया, 3 महीने में नए फैसले के निर्देश

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने उन्नाव रेप केस में दिल्ली हाईकोर्ट का वह आदेश पलट दिया जिसने पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को जमानत दी थी। CBI की अपील पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने हाईकोर्ट को 3 महीने में नए सिरे से फैसला सुनाने का निर्देश दिया — यह फैसला न्यायिक जवाबदेही और पीड़ित सुरक्षा के लिहाज़ से अहम माना जा रहा है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 15 मई 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय का वह आदेश रद्द किया जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद पर रोक लगाकर जमानत दी गई थी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने CBI की अपील पर यह फैसला सुनाया।
दिल्ली उच्च न्यायालय को 3 महीने के भीतर अपील पर अंतिम फैसला सुनाने या सजा पर रोक की अर्जी पर नया आदेश देने का निर्देश।
सेंगर को 2019 में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद और पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 वर्ष की अलग सजा मिली है।
जनवरी 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट पहले ही हिरासत-मौत मामले में सजा पर रोक की याचिका खारिज कर चुका था।

सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार, 15 मई 2026 को उन्नाव रेप केस में एक अहम फैसला सुनाते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें पूर्व भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाकर उन्हें जमानत दी गई थी। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) की अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया और उच्च न्यायालय को तीन महीने के भीतर नए सिरे से फैसला सुनाने का निर्देश दिया।

मुख्य घटनाक्रम

दिसंबर 2025 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने सेंगर की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत प्रदान की थी। इस फैसले के बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। इसके तत्काल बाद सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया था, जिसने उसी माह हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी और सेंगर व उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया था।

शुक्रवार को सुनाए गए फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस मामले में कई ऐसे पहलू हैं जिन पर उच्च न्यायालय को गंभीरता से पुनर्विचार करना आवश्यक है। पीठ ने दिल्ली उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह या तो सेंगर की सजा के विरुद्ध दाखिल अपील पर तीन महीने के भीतर अंतिम फैसला सुनाए, अथवा सजा पर रोक की अर्जी पर नया और विस्तृत आदेश जारी करे।

कुलदीप सेंगर का आपराधिक इतिहास

कुलदीप सिंह सेंगर को वर्ष 2019 में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्नाव की एक नाबालिग पीड़िता से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया था और उम्रकैद की सजा सुनाई थी। यह मामला उस समय राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया था जब पीड़िता और उसके परिवार ने सेंगर व उनके सहयोगियों पर लगातार धमकाने और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे।

इसके अतिरिक्त, सेंगर पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत से जुड़े एक अलग मामले में भी 10 वर्ष की सजा काट रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जनवरी 2026 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने उस मामले में भी सजा पर रोक लगाने की उनकी दूसरी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि सेंगर का आपराधिक रिकॉर्ड गंभीर है और कोई नया आधार सामने नहीं आया है।

सरकार और न्यायिक प्रतिक्रिया

सीबीआई की ओर से दायर अपील में तर्क दिया गया था कि उच्च न्यायालय ने जमानत देते समय मामले की गंभीरता और पीड़िता के परिवार की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त किया।

गौरतलब है कि यह मामला न केवल न्यायिक प्रक्रिया की दृष्टि से बल्कि राजनीतिक जवाबदेही के सवाल पर भी देश में बहस का विषय रहा है। सेंगर उत्तर प्रदेश के बांगरमऊ विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे थे और दोषसिद्धि के बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया था।

आम जनता पर असर

इस फैसले को महिला सुरक्षा और न्यायिक जवाबदेही के पैरोकारों ने राहत की दृष्टि से देखा है। दिसंबर 2025 में हाईकोर्ट के जमानत आदेश के बाद महिला अधिकार संगठनों और विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया था। सर्वोच्च न्यायालय का यह हस्तक्षेप उस व्यापक चिंता को संज्ञान में लेता प्रतीत होता है।

क्या होगा आगे

अब दिल्ली उच्च न्यायालय को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार तीन महीने के भीतर या तो अपील पर अंतिम फैसला सुनाना होगा या सजा पर रोक की अर्जी पर नया आदेश जारी करना होगा। तब तक सेंगर की जमानत प्रभावी नहीं होगी और वे जेल में ही रहेंगे। यह मामला एक बार फिर देश में बलात्कार पीड़ितों के लिए न्याय की गति और उपलब्धता पर बहस को केंद्र में ले आया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस में क्या फैसला सुनाया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 15 मई 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाकर उन्हें जमानत दी गई थी। पीठ ने हाईकोर्ट को तीन महीने के भीतर नए सिरे से फैसला सुनाने का निर्देश दिया है।
कुलदीप सिंह सेंगर को किस मामले में सजा हुई थी?
कुलदीप सिंह सेंगर को 2019 में सीबीआई की विशेष अदालत ने उन्नाव की एक नाबालिग पीड़िता से दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा वे पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत से जुड़े अलग मामले में 10 वर्ष की सजा भी काट रहे हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने सेंगर को जमानत कब और क्यों दी थी?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2025 में सेंगर की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाते हुए उन्हें जमानत प्रदान की थी। इस फैसले के बाद देशभर में तीव्र विरोध हुआ था, जिसके बाद सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की।
अब दिल्ली हाईकोर्ट को क्या करना होगा?
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार दिल्ली उच्च न्यायालय को तीन महीने के भीतर या तो सेंगर की सजा के विरुद्ध दायर अपील पर अंतिम फैसला सुनाना होगा, अथवा सजा पर रोक की अर्जी पर नया विस्तृत आदेश जारी करना होगा। तब तक सेंगर जेल में ही रहेंगे।
क्या सेंगर के अन्य मामलों में भी जमानत याचिका खारिज हुई है?
हाँ, जनवरी 2026 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े मामले में सेंगर की सजा पर रोक लगाने की दूसरी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि उनका आपराधिक रिकॉर्ड गंभीर है और कोई नया आधार सामने नहीं आया।
राष्ट्र प्रेस
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