क्या कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका मिला?
सारांश
Key Takeaways
- कुलदीप सिंह सेंगर की सजा पर रोक लगाने वाली याचिका खारिज हुई।
- उन्हें जेल में रहना होगा।
- अपराधी के आपराधिक रिकॉर्ड को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
- सेंगर अब तक 7.5 साल जेल में बिता चुके हैं।
नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। उन्नाव रेप केस में सजा काट रहे उन्नाव के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट से एक बड़ा झटका मिला है। कोर्ट ने सोमवार को सेंगर की सजा पर रोक लगाने और जमानत से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया है। इस निर्णय के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि कुलदीप सिंह सेंगर को फिलहाल जेल में ही रहना पड़ेगा।
यह मामला उन्नाव रेप कांड से जुड़े पीड़िता के पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हिरासत के दौरान हुई मौत से जुड़ा है, जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराया गया था। सेंगर इस मामले में 10 साल की सजा काट रहे हैं और उन्होंने अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील दायर कर रखी है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को सुनवाई के दौरान अपने आदेश में यह स्पष्ट किया कि कुलदीप सिंह सेंगर के अपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें इस मामले में जमानत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि यह एक गंभीर मामला है और आरोपी के पूर्व आपराधिक इतिहास को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि यदि दोषसिद्धि के विरुद्ध दायर अपील पर शीघ्रता से फैसला किया जाता है तो यह सेंगर के हित में होगा।
कोर्ट के अनुसार, कुलदीप सिंह सेंगर अब तक 10 साल की कुल सजा में से करीब 7.5 साल हिरासत में बिता चुके हैं। इसके बावजूद उनकी अपील पर अब तक अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में अपील के निपटारे में हुई देरी के लिए आंशिक रूप से स्वयं कुलदीप सिंह सेंगर जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने समय-समय पर कई याचिकाएं दायर कीं।
आपको बताते चलें, उन्नाव रेप केस में दोषी ठहराए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से 23 दिसंबर को जमानत दी गई थी। हाईकोर्ट के इस आदेश को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इससे पहले, सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सेंगर की जमानत पर रोक लगा दी थी।
उन्नाव दुष्कर्म मामले ने देशभर में भारी आक्रोश पैदा किया था। दिसंबर 2019 में ट्रायल कोर्ट ने सेंगर को नाबालिग लड़की के अपहरण और दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए उसके कारावास की सजा सुनाई थी, साथ ही 25 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था।