पीएम मोदी ने यूएई पर हमलों की निंदा की, अबू धाबी में बोले — भारत शांति बहाली के लिए हर कदम उठाने को तैयार

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पीएम मोदी ने यूएई पर हमलों की निंदा की, अबू धाबी में बोले — भारत शांति बहाली के लिए हर कदम उठाने को तैयार

सारांश

पीएम मोदी की अबू धाबी यात्रा महज़ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं — यह मध्य-पूर्व के सबसे अशांत दौर में भारत का स्पष्ट संदेश है। यूएई पर हमलों की निंदा, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार समझौता और होर्मुज की सुरक्षा पर ज़ोर — तीनों मिलकर भारत की ऊर्जा, सुरक्षा और कूटनीतिक प्राथमिकताओं को एक साथ रेखांकित करते हैं।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई को पाँच देशों की यात्रा के पहले चरण में अबू धाबी पहुँचे; हवाई अड्डे पर गार्ड ऑफ ऑनर से स्वागत।
मोदी और यूएई राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच प्रतिनिधिमंडल-स्तरीय वार्ता; रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार सहित कई एमओयू पर हस्ताक्षर।
मोदी ने यूएई पर हुए हमलों को 'किसी भी रूप में अस्वीकार्य' बताते हुए घोर निंदा की।
होर्मुज स्ट्रेट को मुक्त, खुला और सुरक्षित रखना भारत की प्राथमिकता घोषित; अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन पर ज़ोर।
मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर ऊर्जा, निवेश और आपूर्ति शृंखला में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 मई को अपनी पाँच देशों की विदेश यात्रा के पहले पड़ाव में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबू धाबी पहुँचकर यूएई पर हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की और स्पष्ट किया कि भारत क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता की बहाली के लिए हर संभव सहायता देने को तत्पर है। हवाई अड्डे पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर से नवाज़ा गया।

द्विपक्षीय वार्ता और एमओयू का आदान-प्रदान

प्रधानमंत्री मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच प्रतिनिधिमंडल-स्तरीय वार्ता हुई, जिसके बाद दोनों देशों ने कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान किया। इनमें रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जुड़ा समझौता विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के गहराते सहयोग को दर्शाता है।

मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति का आभार जताते हुए कहा कि यूएई वायुसेना के विमानों द्वारा दिया गया एस्कॉर्ट भारत के लोगों के सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने हाल की प्राकृतिक आपदा में पीड़ित परिवारों के प्रति शेख मोहम्मद द्वारा व्यक्त की गई संवेदना की भी सराहना की।

यूएई पर हमलों की कड़ी निंदा

मध्य-पूर्व में जारी तनाव पर सीधे बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'यूएई पर हुए हमलों की हम घोर निंदा करते हैं। यूएई को जिस तरह से निशाना बनाया गया है, वह किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है।' उन्होंने यूएई के नेतृत्व द्वारा इन कठिन परिस्थितियों में दिखाए गए संयम और साहस को सराहनीय बताया तथा राष्ट्रीय एकता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने के प्रयासों का अभिनंदन किया।

होर्मुज स्ट्रेट और कूटनीति पर भारत का रुख

पश्चिम एशिया में युद्ध की परिस्थितियों का वैश्विक प्रभाव स्वीकार करते हुए मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा विवादों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति को प्राथमिकता दी है। उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को मुक्त, खुला और सुरक्षित बनाए रखने को भारत की बड़ी प्राथमिकता बताया और कहा कि इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन अनिवार्य है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब होर्मुज से होकर गुज़रने वाले तेल की आपूर्ति वैश्विक ऊर्जा बाज़ार को प्रभावित कर रही है।

मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'भारत हर स्थिति में यूएई के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और भविष्य में भी खड़ा रहेगा। भारत जल्द से जल्द शांति और स्थिरता की बहाली के लिए हर संभव सहायता प्रदान करने को तैयार है।'

एक्स पर पीएम मोदी का संदेश

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, 'मैं अपने भाई, यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान का अबू धाबी हवाई अड्डे पर मेरा स्वागत करने के उनके विशेष भाव के लिए धन्यवाद करता हूँ। मैं ऊर्जा, निवेश, आपूर्ति शृंखला और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में भारत-यूएई संबंधों को और आगे बढ़ाने की दिशा में हमारी बातचीत का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूँ।'

आगे की यात्रा और रणनीतिक महत्व

गौरतलब है कि यह मोदी की यूएई की कई वर्षों में एक और उच्च-स्तरीय यात्रा है, जो भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करती है। यूएई भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में से एक है और भारतीय प्रवासियों की बड़ी आबादी वहाँ निवास करती है। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है और भारत की ऊर्जा एवं कूटनीतिक हितों की दृष्टि से यह क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील है। आने वाले दिनों में मोदी अपनी पाँच देशों की यात्रा के अगले पड़ावों पर आगे बढ़ेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल बना रहता है कि होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव बढ़ने की स्थिति में भारत की 'हर संभव सहायता' की व्यावहारिक सीमा क्या होगी। भारत की पारंपरिक 'रणनीतिक स्वायत्तता' की नीति और किसी एक पक्ष के साथ खुलकर खड़े होने के बीच का यह संतुलन आने वाले दिनों में और कड़ी परीक्षा से गुज़रेगा।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी की यूएई यात्रा का उद्देश्य क्या था?
पीएम मोदी अपनी पाँच देशों की विदेश यात्रा के पहले पड़ाव के रूप में 15 मई को अबू धाबी पहुँचे। इस यात्रा में द्विपक्षीय वार्ता, रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार सहित कई एमओयू पर हस्ताक्षर और मध्य-पूर्व की मौजूदा स्थिति पर चर्चा शामिल थी।
भारत और यूएई के बीच कौन-से एमओयू हस्ताक्षरित हुए?
दोनों देशों ने कई समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया, जिनमें रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जुड़ा समझौता प्रमुख रहा। ऊर्जा, निवेश और आपूर्ति शृंखला के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
मोदी ने यूएई पर हमलों पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूएई पर हुए हमले 'किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हैं' और भारत इनकी घोर निंदा करता है। उन्होंने यूएई के नेतृत्व द्वारा दिखाए गए संयम और साहस की सराहना भी की।
होर्मुज स्ट्रेट पर भारत का क्या रुख है?
पीएम मोदी ने होर्मुज स्ट्रेट को मुक्त, खुला और सुरक्षित रखने को भारत की बड़ी प्राथमिकता बताया और कहा कि इस मामले में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन अनिवार्य है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत-यूएई संबंध कितने महत्वपूर्ण हैं?
यूएई भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में से एक है और बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी वहाँ निवास करते हैं। दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी है, जिसे इस यात्रा में और मज़बूत किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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