नासा का LESTR: -388°F चंद्र तापमान का परीक्षण करने वाली क्रांतिकारी तकनीक
सारांश
मुख्य बातें
नासा के ग्लेन रिसर्च सेंटर, क्लीवलैंड के इंजीनियरों ने 'लूनर एनवायरनमेंट स्ट्रक्चरल टेस्ट रिग' (LESTR) नामक एक अत्याधुनिक मशीन विकसित की है, जो -388 डिग्री फारेनहाइट (40 केल्विन) तक के अत्यधिक ठंडे तापमान पर सामग्रियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्पेस हार्डवेयर का परीक्षण कर सकती है। यह तकनीक चंद्रमा, मंगल और अन्य ग्रहों पर भविष्य के मिशनों के लिए उपकरण तैयार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।
क्यों जरूरी है यह परीक्षण
चंद्रमा की सतह पर तापमान दिन और रात में अत्यधिक उतार-चढ़ाव करता है। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर, जहाँ नासा एक स्थायी चंद्र बेस स्थापित करने की योजना बना रहा है, यह समस्या और भी गंभीर है। ऐसे चरम तापमान में सामान्य रबर काँच की तरह टूट सकता है, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट विफल हो सकते हैं और विद्युत कनेक्शन जमकर नष्ट हो सकते हैं। इसलिए किसी भी मिशन-क्रिटिकल सामग्री को अंतरिक्ष में भेजने से पहले उसका इन परिस्थितियों में परीक्षण अनिवार्य है।
LESTR की तकनीकी विशेषताएँ
LESTR की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एक पूर्णतः ड्राई सिस्टम है — इसमें किसी भी तरल पदार्थ का उपयोग नहीं होता। पारंपरिक रूप से नासा तरल नाइट्रोजन, हाइड्रोजन और हीलियम जैसे तरल क्रायोजेन का उपयोग करके परीक्षण करता था, जिनके लिए विशेष टैंक, जटिल वाल्व और सुरक्षा उपकरणों की आवश्यकता होती थी। LESTR इन सब की जगह हाई-पावर क्रायोकूलर का उपयोग करके ताप को दूर करता है, जिससे समय, लागत और जोखिम — तीनों में उल्लेखनीय कमी आती है।
LESTR के तकनीकी प्रमुख एरियल डिमस्टन ने कहा, 'जिस प्रकार बिना सामग्री की सही जानकारी के कोई इमारत नहीं बनाई जा सकती, उसी प्रकार बिना सामग्रियों के सही व्यवहार को जाने बिना कोई स्पेस मिशन सफल नहीं हो सकता।' डिमस्टन के अनुसार, LESTR पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक सुरक्षित, किफायती और संचालन में आसान है।
किन सामग्रियों का हो रहा है परीक्षण
नासा की टीम LESTR के माध्यम से कई अहम सामग्रियों का परीक्षण कर रही है। इनमें अगली पीढ़ी के स्पेससूट के लिए विशेष कपड़े, रोवर के टायरों के लिए नई सामग्रियाँ और 'शेप मेमोरी अलॉय' (आकार याद रखने वाली धातु) शामिल हैं। यह विशेष धातु मुड़ने, खिंचने या अत्यधिक ठंडी होने के बाद भी अपने मूल आकार में वापस आ जाती है, जो चंद्रमा और मंगल की ऊबड़-खाबड़ सतह पर रोवर के संचालन के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती है।
आम जनता और भविष्य के मिशनों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब नासा अपने आर्टेमिस कार्यक्रम के तहत चंद्रमा पर मानव उपस्थिति स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। LESTR जैसी तकनीकें न केवल अंतरिक्ष अन्वेषण को सुरक्षित बनाएँगी, बल्कि परीक्षण की लागत घटाकर भविष्य के मिशनों को अधिक व्यावहारिक भी बनाएँगी। गौरतलब है कि यह तकनीक कई क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है — अंतरिक्ष उद्योग से लेकर पृथ्वी पर अत्यधिक ठंडे वातावरण में काम करने वाले उपकरणों के परीक्षण तक।
आगे की राह
LESTR की सफलता नासा के भविष्य के चंद्र और मंगल मिशनों के लिए सामग्री-परीक्षण की प्रक्रिया को मौलिक रूप से बदल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, तरल क्रायोजेन पर निर्भरता समाप्त होने से परीक्षण सुविधाओं को छोटे और कम संसाधन वाले केंद्रों तक भी विस्तारित किया जा सकेगा, जो अंतरिक्ष अनुसंधान को अधिक सुलभ बनाएगा।