किन्नौर के रक्छम चिटकुल अभयारण्य में दुर्लभ हिमालयी भूरा भालू परिवार कैमरे में कैद
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले की रक्छम चिटकुल वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि सामने आई है — वन विभाग की फील्ड टीम ने 15 मई को एक मादा हिमालयी भूरे भालू को उसके दो शावकों के साथ कैमरे में दर्ज किया। चीन सीमा से सटे इस संवेदनशील क्षेत्र में इस दुर्लभ प्रजाति के परिवार का फोटोग्राफिक साक्ष्य मिलना जैव विविधता संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दस्तावेज़ीकरण का विवरण
इस दुर्लभ दृश्य को रिकॉर्ड करने वाली टीम में ब्लॉक फॉरेस्ट ऑफिसर संतोष कुमार ठाकुर, वन रक्षक छायानंद, अक्षय, पवन कुमार और वन मित्र अल्पना नेगी शामिल थीं। उनके साथ प्रसिद्ध पक्षी विशेषज्ञ और नेचुरलिस्ट गैरी भट्टी तथा उनकी टीम के सदस्य डॉ. बिश्वरूप सतपति और डॉ. राहुल देब मंडल भी उपस्थित रहे। यह संयुक्त प्रयास वन विभाग और स्वतंत्र विशेषज्ञों के बीच सहयोग का प्रतीक है।
हिमालयी भूरे भालू की विशेषताएँ
हिमालयी भूरा भालू भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में सूचीबद्ध है, जो इसे देश की सर्वोच्च संरक्षण श्रेणी में रखता है। यह प्रजाति जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 23 संरक्षित क्षेत्रों में पाई जाती है।
इस प्रजाति की एक विशेषता यह है कि यह सामान्यतः समुद्र तल से 2,500 मीटर से नीचे नहीं उतरती। इसके विपरीत, काला भालू 2,000 मीटर से नीचे के क्षेत्रों में रहना पसंद करता है और झुंड में रहता है तथा फसलों को नुकसान पहुँचाता है। भूरा भालू एकाकी स्वभाव का होता है और केवल प्रसव के दौरान ही साथ रहता है — यही कारण है कि मादा का दो शावकों के साथ दिखना असाधारण है।
आहार और शारीरिक विशेषताएँ
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी भूरे भालुओं में केवल 10 प्रतिशत मांसाहारी होते हैं, जबकि 90 प्रतिशत मुख्यतः जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों पर निर्भर रहते हैं। इनका भार एक से डेढ़ क्विंटल तक होता है और खड़े होने पर इनकी लंबाई लगभग 6 फुट होती है। अमेरिकी भूरे भालू की तुलना में यह आकार में अपेक्षाकृत छोटे होते हैं और स्वभाव से शांत माने जाते हैं।
संरक्षण का महत्व
गौरतलब है कि रक्छम चिटकुल वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी चीन सीमा से सटा एक अत्यंत संवेदनशील और दुर्गम क्षेत्र है, जहाँ नियमित निगरानी चुनौतीपूर्ण होती है। इस परिवेश में एक स्वस्थ मादा भालू का दो शावकों के साथ मिलना यह संकेत देता है कि अभयारण्य का पारिस्थितिकी तंत्र अनुकूल स्थिति में है। वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षणकर्ताओं में इस खोज को लेकर उत्साह देखा जा रहा है।
आगे की राह
यह फोटोग्राफिक रिकॉर्ड भविष्य के वन्यजीव सर्वेक्षणों और संरक्षण नीतियों के लिए महत्वपूर्ण आधार सामग्री बनेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में नियमित कैमरा ट्रैपिंग और निगरानी से हिमालयी भूरे भालू की वास्तविक आबादी का अधिक सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा।