उमरेड-पवनी-करांडला अभयारण्य में काले चीतल की अद्भुत उपस्थिति
सारांश
मुख्य बातें
भंडारा, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के भंडारा जिले में स्थित उमरेड-पवनी-करांडला वन्यजीव अभयारण्य से एक अत्यंत दुर्लभ और चौंकाने वाली सूचना प्राप्त हुई है।
यहां एक काले रंग का चीतल देखा गया है, जिसे प्रकृति का अद्भुत चमत्कार माना जा रहा है। सामान्यतः चीतल हल्के भूरे या सुनहरे रंग के होते हैं और उनके शरीर पर सफेद धब्बे होते हैं। लेकिन यह चीतल पूरी तरह से काले रंग का है, जो इसे अन्य चीतलों से अलग बनाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का काला चीतल बहुत ही कम देखने को मिलता है। इसका मुख्य कारण उसके शरीर में होने वाला एक खास आनुवंशिक परिवर्तन है, जिसके चलते इसका रंग गहरा काला हो जाता है। यही कारण है कि इसे अत्यंत दुर्लभ माना जाता है और यह वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।
यह काला चीतल तब देखा गया जब पर्यटक अभयारण्य में भ्रमण कर रहे थे। उसी समय वन विभाग के कर्मियों की भी नजर इस पर पड़ी। जैसे ही लोगों ने इसे देखा, सभी हैरान रह गए और इसकी चर्चा तेजी से फैलने लगी। कई लोगों ने इसे अपने जीवन का एक अद्वितीय अनुभव बताया।
उमरेड-पवनी-करांडला वन्यजीव अभयारण्य पहले से ही बाघों के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहां बड़ी संख्या में बाघों के साथ-साथ अन्य वन्यजीव भी पाए जाते हैं। अब इस काले चीतल की उपस्थिति ने इस अभयारण्य की पहचान को और मजबूत कर दिया है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस दुर्लभ चीतल की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि इसे किसी भी प्रकार का खतरा न हो।
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस खबर के सामने आने के बाद बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचेंगे और इस अद्भुत काले चीतल की झलक पाने की कोशिश करेंगे।