पेट्रोल-डीजल मूल्य वृद्धि पर रिजिजू का दावा: भारत ने सिर्फ 3.2% बढ़ाए दाम, कई देशों में 100% तक उछाल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार, 15 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए वैश्विक ईंधन संकट के बीच भारत की ईंधन मूल्य नीति का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जब पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तेज़ी से बढ़ीं, तब भारत ने पेट्रोल में केवल 3.2 प्रतिशत और डीजल में मात्र 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी तक खुद को सीमित रखा।
मुख्य घटनाक्रम
रिजिजू ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद जब दुनिया भर में ईंधन कीमतें तेज़ी से बढ़ीं, तब भारत ने अपेक्षाकृत स्थिरता बनाए रखी। जहाँ कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 20 प्रतिशत से लेकर लगभग 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई, वहीं भारत ने इस बढ़ोतरी को पेट्रोल के लिए सिर्फ 3.2 प्रतिशत और डीजल के लिए 3.4 प्रतिशत तक ही सीमित रखा।'
उन्होंने यह भी कहा कि जब ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई और वैश्विक बाज़ारों में उथल-पुथल मच गई, तब भी भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने हफ्तों तक भारी नुकसान उठाया, ताकि नागरिकों को महंगाई और आर्थिक दबाव से बचाया जा सके।
वैश्विक तुलना: आंकड़ों की ज़ुबानी
रिजिजू ने अपनी पोस्ट के साथ कई प्रमुख देशों में ईंधन मूल्य वृद्धि के आंकड़े भी साझा किए। आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में पेट्रोल 44.5 प्रतिशत और डीजल 48.1 प्रतिशत महंगा हुआ। पाकिस्तान में पेट्रोल के दाम 54.9 प्रतिशत और डीजल के दाम 44.9 प्रतिशत बढ़े।
चीन में पेट्रोल 21.7 प्रतिशत और डीजल 23.7 प्रतिशत बढ़ा, जबकि ब्रिटेन में पेट्रोल में 19.2 प्रतिशत और डीजल में 34.2 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ। जर्मनी में पेट्रोल 13.7 प्रतिशत और डीजल 19.8 प्रतिशत महंगा हुआ, वहीं जापान में पेट्रोल 9.7 प्रतिशत और डीजल 11.2 प्रतिशत बढ़ा।
सबसे चरम वृद्धि म्यांमार में दर्ज की गई, जहाँ पेट्रोल के दाम 89.7 प्रतिशत और डीजल के दाम 112.7 प्रतिशत तक उछले।
सरकार का रुख: जन-कल्याण प्राथमिकता
रिजिजू ने इसे 'जिम्मेदार शासन' की संज्ञा दी और कहा कि यही वह नेतृत्व है जो लोगों को सर्वोपरि रखता है। उन्होंने लिखा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आर्थिक स्थिरता और जन-कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखने का काम लगातार जारी रखे हुए है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब घरेलू स्तर पर ईंधन मूल्य वृद्धि को लेकर विपक्षी दलों की आलोचना जारी है।
आगे क्या
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने के बीच सरकार की ईंधन मूल्य नीति आने वाले महीनों में भी राजनीतिक और आर्थिक बहस का केंद्र बनी रहेगी। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की वित्तीय सेहत और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर पर नज़र बनाए रखना ज़रूरी होगा।