पेट्रोल-डीजल मूल्य वृद्धि पर रिजिजू का दावा: भारत ने सिर्फ 3.2% बढ़ाए दाम, कई देशों में 100% तक उछाल

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पेट्रोल-डीजल मूल्य वृद्धि पर रिजिजू का दावा: भारत ने सिर्फ 3.2% बढ़ाए दाम, कई देशों में 100% तक उछाल

सारांश

पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद जब म्यांमार में डीजल 112.7% और अमेरिका में 48% महंगा हुआ, तब भारत ने पेट्रोल में केवल 3.2% की बढ़ोतरी की — यही दावा किरेन रिजिजू ने एक्स पर साझा आंकड़ों के ज़रिए किया। सरकार इसे जन-कल्याण और आर्थिक स्थिरता के बीच संतुलन का प्रमाण बता रही है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 15 मई को एक्स पर पोस्ट कर वैश्विक ईंधन मूल्य तुलना साझा की।
भारत में पेट्रोल 3.2% और डीजल 3.4% महंगा हुआ — अन्य देशों की तुलना में काफी कम।
म्यांमार में सबसे अधिक वृद्धि — पेट्रोल 89.7% और डीजल 112.7% ।
अमेरिका में पेट्रोल 44.5% , पाकिस्तान में 54.9% तक उछाल।
रिजिजू ने कहा कि ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल पार करने पर भी सरकारी तेल कंपनियों ने नुकसान उठाकर दाम स्थिर रखे।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार, 15 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए वैश्विक ईंधन संकट के बीच भारत की ईंधन मूल्य नीति का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जब पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तेज़ी से बढ़ीं, तब भारत ने पेट्रोल में केवल 3.2 प्रतिशत और डीजल में मात्र 3.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी तक खुद को सीमित रखा।

मुख्य घटनाक्रम

रिजिजू ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, 'पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद जब दुनिया भर में ईंधन कीमतें तेज़ी से बढ़ीं, तब भारत ने अपेक्षाकृत स्थिरता बनाए रखी। जहाँ कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 20 प्रतिशत से लेकर लगभग 100 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई, वहीं भारत ने इस बढ़ोतरी को पेट्रोल के लिए सिर्फ 3.2 प्रतिशत और डीजल के लिए 3.4 प्रतिशत तक ही सीमित रखा।'

उन्होंने यह भी कहा कि जब ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई और वैश्विक बाज़ारों में उथल-पुथल मच गई, तब भी भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने हफ्तों तक भारी नुकसान उठाया, ताकि नागरिकों को महंगाई और आर्थिक दबाव से बचाया जा सके।

वैश्विक तुलना: आंकड़ों की ज़ुबानी

रिजिजू ने अपनी पोस्ट के साथ कई प्रमुख देशों में ईंधन मूल्य वृद्धि के आंकड़े भी साझा किए। आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में पेट्रोल 44.5 प्रतिशत और डीजल 48.1 प्रतिशत महंगा हुआ। पाकिस्तान में पेट्रोल के दाम 54.9 प्रतिशत और डीजल के दाम 44.9 प्रतिशत बढ़े।

चीन में पेट्रोल 21.7 प्रतिशत और डीजल 23.7 प्रतिशत बढ़ा, जबकि ब्रिटेन में पेट्रोल में 19.2 प्रतिशत और डीजल में 34.2 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ। जर्मनी में पेट्रोल 13.7 प्रतिशत और डीजल 19.8 प्रतिशत महंगा हुआ, वहीं जापान में पेट्रोल 9.7 प्रतिशत और डीजल 11.2 प्रतिशत बढ़ा।

सबसे चरम वृद्धि म्यांमार में दर्ज की गई, जहाँ पेट्रोल के दाम 89.7 प्रतिशत और डीजल के दाम 112.7 प्रतिशत तक उछले।

सरकार का रुख: जन-कल्याण प्राथमिकता

रिजिजू ने इसे 'जिम्मेदार शासन' की संज्ञा दी और कहा कि यही वह नेतृत्व है जो लोगों को सर्वोपरि रखता है। उन्होंने लिखा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आर्थिक स्थिरता और जन-कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखने का काम लगातार जारी रखे हुए है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब घरेलू स्तर पर ईंधन मूल्य वृद्धि को लेकर विपक्षी दलों की आलोचना जारी है।

आगे क्या

वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने के बीच सरकार की ईंधन मूल्य नीति आने वाले महीनों में भी राजनीतिक और आर्थिक बहस का केंद्र बनी रहेगी। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों की वित्तीय सेहत और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर पर नज़र बनाए रखना ज़रूरी होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन तुलना का आधार और संदर्भ-काल स्पष्ट नहीं किया गया — यह जानना ज़रूरी है कि ये प्रतिशत किस आधार वर्ष या तिथि से गिने गए हैं। इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने जो 'भारी नुकसान' उठाया, उसका बोझ अंततः करदाताओं और सरकारी बजट पर पड़ता है — यह पहलू इस बयान में अनुपस्थित है। आलोचकों का कहना है कि मूल्य स्थिरता का श्रेय लेते समय सरकार को तेल कंपनियों की बैलेंस शीट और दीर्घकालिक वित्तीय स्वास्थ्य पर भी पारदर्शिता दिखानी चाहिए।
RashtraPress
15 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किरेन रिजिजू ने पेट्रोल-डीजल कीमतों पर क्या कहा?
रिजिजू ने 15 मई को एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद भारत ने पेट्रोल में केवल 3.2% और डीजल में 3.4% की वृद्धि की, जबकि कई देशों में यह 20% से 100% तक रही। उन्होंने इसे मोदी सरकार की जन-कल्याण नीति का प्रमाण बताया।
किन देशों में पेट्रोल-डीजल सबसे अधिक महंगा हुआ?
रिजिजू द्वारा साझा आंकड़ों के अनुसार म्यांमार में सबसे अधिक वृद्धि हुई — पेट्रोल 89.7% और डीजल 112.7% महंगा हुआ। पाकिस्तान में पेट्रोल 54.9% और अमेरिका में 44.5% तक बढ़ा।
ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर पार करने पर भारत ने क्या किया?
रिजिजू के अनुसार, जब ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गया, तब भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने हफ्तों तक नुकसान उठाया ताकि उपभोक्ताओं पर कीमतों का बोझ न पड़े। यह नीति सरकार की ओर से जन-राहत उपाय के रूप में पेश की गई।
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें वैश्विक स्तर पर कितनी कम रहीं?
रिजिजू द्वारा प्रस्तुत तुलना के अनुसार, जहाँ जापान में भी पेट्रोल 9.7% और जर्मनी में 13.7% बढ़ा, वहीं भारत में यह वृद्धि 3.2% तक सीमित रही। हालाँकि, इन आंकड़ों का संदर्भ-काल और आधार वर्ष सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।
क्या सरकारी तेल कंपनियों के नुकसान का असर आम जनता पर पड़ेगा?
रिजिजू ने इस पहलू पर सीधे कुछ नहीं कहा। आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों का घाटा अंततः सरकारी खज़ाने और करदाताओं पर असर डालता है, जिससे दीर्घकालिक वित्तीय दबाव बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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