तमिलनाडु: 234 विधायकों को गाड़ी-भत्ते पर उदयनिधि स्टालिन का विरोध, कर्ज में डूबे राज्य में खर्च पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने 21 अगस्त 2026 को राज्य के सभी 234 विधायकों को सरकारी वाहन और ₹1 लाख प्रतिमाह का भत्ता देने के सरकारी फैसले का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि कर्ज के बोझ से जूझ रहे राज्य में यह सुविधा केवल आर्थिक रूप से कमज़ोर विधायकों तक सीमित रखी जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री की घोषणा
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 19 अगस्त को तमिलनाडु विधानसभा में नियम 110 के तहत स्वतः संज्ञान लेते हुए घोषणा की थी कि प्रदेश के सभी 234 विधायकों को नई सरकारी गाड़ियाँ उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके साथ ही ईंधन, रखरखाव और ड्राइवर के लिए ₹75,000 तथा कार्यालय सहायक रखने के लिए ₹25,000 का मासिक भत्ता भी दिया जाएगा। इस प्रकार प्रत्येक विधायक को वाहन के अतिरिक्त ₹1 लाख प्रतिमाह की अतिरिक्त सुविधा मिलेगी।
उदयनिधि का पक्ष
विधानसभा में अपनी पार्टी का पक्ष रखते हुए उदयनिधि ने कहा, "सरकार ने घोषणा की है कि सभी 234 विधायकों के लिए नई गाड़ियाँ खरीदी जाएंगी। ऐसे समय में जब तमिलनाडु सरकार पहले से ही कर्ज के बोझ का सामना कर रही है, जैसा कि मुख्यमंत्री ने खुद बार-बार कहा है — हमने अपनी पार्टी के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के मार्गदर्शन में यह फैसला किया है कि गाड़ियाँ केवल उन्हीं विधायकों को दी जानी चाहिए जो आर्थिक रूप से कमज़ोर हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "मैं सरकार से अनुरोध करता हूँ कि वह इस पर विचार करे और गाड़ियाँ केवल उन्हीं विधायकों को दे जिन्हें वास्तव में उनकी ज़रूरत है, खासकर तब जब सरकार अनावश्यक खर्च कम करने की कोशिश कर रही है।"
विपक्ष की आपत्ति का सार
उदयनिधि का मुख्य तर्क यह है कि 'सभी के लिए समान' लाभ का यह स्वरूप वित्तीय अनुशासन की दृष्टि से उचित नहीं है, क्योंकि अलग-अलग विधायकों की आर्थिक स्थिति में पर्याप्त अंतर है। उन्होंने सुझाया कि सरकार को पहले यह पहचान करनी चाहिए कि किन विधायकों को वास्तव में सहायता की आवश्यकता है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार स्वयं सार्वजनिक व्यय में संयम की बात करती रही है।
वित्तीय दबाव की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि तमिलनाडु पहले से ही भारी ऋण-भार के बीच अपने वित्तीय प्रबंधन को लेकर दबाव में है। मुख्यमंत्री विजय स्वयं कई अवसरों पर राज्य की वित्तीय स्थिति की चुनौतियों का उल्लेख कर चुके हैं। ऐसे में 234 विधायकों को एक साथ नई गाड़ियाँ और मासिक भत्ता देने के इस प्रस्ताव ने राज्य की प्राथमिकताओं पर बहस को जन्म दिया है।
आगे क्या
विपक्ष ने सरकार से प्रस्ताव पर पुनर्विचार और अधिक लक्षित दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया है। अभी तक सरकार की ओर से उदयनिधि की आपत्तियों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना होगा कि क्या सत्तापक्ष इस फैसले में कोई संशोधन करता है या इसे मूल स्वरूप में लागू करता है।