म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का औसत AUM वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में 14.1% बढ़कर ₹89.51 लाख करोड़ पर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की औसत एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 14.1 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 4.9 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹89.51 लाख करोड़ पर पहुँच गई। 28 अक्टूबर 2026 को जारी आईसीआरए एनालिटिक्स की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई, जो खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में निरंतर इनफ्लो की मज़बूत नींव को रेखांकित करती है।
मासिक उतार-चढ़ाव और वार्षिक वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार, बाज़ारों में गिरावट के चलते इंडस्ट्री AUM अगस्त 2026 में घटकर ₹87.08 लाख करोड़ और सितंबर 2026 में ₹82.64 लाख करोड़ रह गया। हालाँकि, मासिक गिरावट के बावजूद, सितंबर 2026 का AUM पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 9.3 प्रतिशत अधिक रहा — जो इस सेक्टर की दीर्घकालिक विकास-गति की पुष्टि करता है।
नेट इनफ्लो और निवेश का रुझान
वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में नेट इनफ्लो ₹1.44 लाख करोड़ रहा, जो पिछली तिमाही के ₹2.05 लाख करोड़ से कम था। इस कमी का प्रमुख कारण डेट-ओरिएंटेड स्कीमों से आउटफ्लो और सितंबर 2026 में हुई बड़ी निकासी रही।
इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीमें विकास का मुख्य आधार बनी रहीं; इनमें तिमाही के दौरान ₹92,293 करोड़ का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। इसके विपरीत, डेट-ओरिएंटेड स्कीमों से ₹5,853 करोड़ का नेट आउटफ्लो हुआ, जो निवेशकों की इक्विटी-लिंक्ड उत्पादों में बढ़ती रुचि को दर्शाता है। हाइब्रिड स्कीमों में इनफ्लो की गति अपेक्षाकृत धीमी रही।
SIP निवेश रिकॉर्ड ऊँचाई पर
सितंबर 2026 में SIP के ज़रिए निवेश बढ़कर ₹32,490 करोड़ के अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया। इसी माह नए SIP खातों की संख्या में 63.26 लाख की वृद्धि दर्ज की गई — जो खुदरा निवेशकों के बीच म्यूचुअल फंड की गहरी पैठ को दर्शाती है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब शेयर बाज़ारों में अल्पकालिक दबाव बना हुआ था। SIP इनफ्लो की यह निरंतरता बताती है कि भारतीय निवेशक अब बाज़ार की अस्थिरता को दीर्घकालिक निवेश में बाधा नहीं मानते।
फोलियो और बाज़ार हिस्सेदारी
सितंबर 2026 में कुल म्यूचुअल फंड फोलियो की संख्या बढ़कर 28.62 करोड़ हो गई। आईसीआरए एनालिटिक्स के अनुसार, वित्त वर्ष 27 की पहली और दूसरी तिमाही के बीच शीर्ष दस एसेट मैनेजमेंट कंपनियों की बाज़ार हिस्सेदारी काफ़ी हद तक स्थिर रही, जो सेक्टर में संकेंद्रण के ढाँचे को बरकरार दर्शाती है।
इंडस्ट्री का दृष्टिकोण
आईसीआरए एनालिटिक्स की रिपोर्ट में कहा गया है, 'निवेशक आधार में लगातार विस्तार और इक्विटी में मज़बूत इनफ्लो, बाज़ार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए एक सकारात्मक और मज़बूत विकास दृष्टिकोण की पुष्टि करते हैं।' आने वाली तिमाहियों में बाज़ार की दिशा और वैश्विक आर्थिक संकेतों पर इंडस्ट्री की नज़र रहेगी।