भाजपा के 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च पर विपक्ष का तीखा हमला, रैली अनुमति में भेदभाव के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
विपक्षी दलों ने 28 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में इंडी ब्लॉक की मेगा रैली से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च की कड़ी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा खुद लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। विपक्षी नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि प्रशासन सत्ताधारी दल को रैली की अनुमति तत्काल दे देता है, जबकि विपक्षी आयोजनों पर पाबंदियाँ थोपी जाती हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी का भाजपा पर सीधा प्रहार
शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव आयोग, वित्तीय संस्थानों और जाँच एजेंसियों सहित कई संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया है। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र को भारतीय जनता पार्टी से बचाने की जरूरत है क्योंकि जिस तरह से वह हर संस्था को कमजोर कर रही है — चाहे वह चुनाव आयोग हो, हमारे वित्तीय संस्थान हों या जाँच एजेंसियाँ — वह चिंताजनक है।'
चतुर्वेदी ने कहा कि भाजपा ने राजनीतिक दलों को बनाने, कमजोर करने और तोड़ने के लिए इन संस्थाओं का दुरुपयोग किया है। उन्होंने व्यंग्यपूर्वक इसे 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' जैसी स्थिति बताया।
हन्नान मोल्लाह का अनुमति-भेदभाव पर सवाल
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] नेता हन्नान मोल्लाह ने कहा कि हर राजनीतिक दल को मार्च, रैली और विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का अधिकार है, लेकिन प्रशासन का रवैया एकसमान नहीं है। उन्होंने कहा, 'अगर यह सत्ताधारी पार्टी का कार्यक्रम होता है, तो सारी व्यवस्थाएँ की जाती हैं और सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, जब विपक्ष का कार्यक्रम होता है, तो कई तरह की पाबंदियाँ लगा दी जाती हैं।'
मोल्लाह ने विशेष रूप से रामलीला मैदान के लिए रखी गई शर्तों को 'हद दर्जे की ज्यादती' करार दिया।
संदीप दीक्षित का लाल किले को चुनने पर तंज
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने भाजपा के मार्च की शुरुआत के लिए लाल किले को चुने जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि लाल किला मुगल सत्ता का प्रतीक है, और जो दल मुगलों को अपने इतिहास में शामिल नहीं करता, वह उसी स्मारक से पदयात्रा कैसे शुरू कर सकता है। दीक्षित ने यह भी कहा कि 'लोकतंत्र बचाने' के नाम पर मार्च निकालकर भाजपा खुद हंसी का पात्र बन रही है।
एनसीपी(एसपी) ने उठाया अनुमति का मुद्दा
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) [NCP(SP)] के प्रवक्ता अनीश गवांडे ने आरोप लगाया कि भाजपा के आयोजनों को अनुमति मिल जाती है, जबकि छात्र आंदोलन और पीड़ित परिवारों के प्रदर्शनों को मंजूरी नहीं मिलती। उन्होंने कहा, 'अगर आप कोई छात्र आंदोलन करना चाहें, तो आपको अनुमति नहीं मिलती। अगर आप अंकिता भंडारी के माता-पिता हैं, तो आपको अनुमति नहीं मिलती। फिर भारतीय जनता पार्टी को ही अनुमति क्यों दी जाती है।'
गवांडे ने भाजपा पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जो लोग कथित तौर पर लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं, उन्हें रैलियाँ आयोजित करने की अनुमति देने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की राह
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब दिल्ली में विधानसभा चुनावों की सरगर्मी बढ़ रही है और इंडी ब्लॉक अपनी एकजुटता दिखाने के लिए मेगा रैली कर रहा है। गौरतलब है कि रैली अनुमति और सरकारी संसाधनों के कथित पक्षपातपूर्ण उपयोग का मुद्दा विपक्ष बार-बार उठाता रहा है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच यह टकराव और तीखा होने की संभावना है।