28 अक्टूबर 2026
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शाजापुर में काले हिरण बचाव अभियान: CM मोहन यादव ने किया निरीक्षण, 1,236 हिरण पकड़े गए

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शाजापुर में काले हिरण बचाव अभियान: CM मोहन यादव ने किया निरीक्षण, 1,236 हिरण पकड़े गए

सारांश

मध्य प्रदेश में दक्षिण एशिया का पहला हेलीकॉप्टर-सहायता प्राप्त बोमा अभियान — जहाँ 1,236 काले हिरण पकड़कर सुरक्षित वन क्षेत्रों में भेजे जा रहे हैं। यह सिर्फ वन्यजीव बचाव नहीं, बल्कि 'किसान कल्याण वर्ष 2026' की छत्रछाया में फसल सुरक्षा की एक अभूतपूर्व पहल है।

मुख्य बातें

CM मोहन यादव ने 28 अक्टूबर 2026 को शाजापुर जिले के रणथम्भवार गांव में काले हिरण बचाव अभियान के दूसरे चरण का निरीक्षण किया।
अब तक 1,236 काले हिरण पकड़े जा चुके हैं; इन्हें श्योपुर , गांधी सागर और रानी दुर्गावती आरक्षित वन में छोड़ा जाएगा।
बोमा पद्धति और हेलीकॉप्टर की सहायता से यह दक्षिण एशिया का पहला ऐसा वन्यजीव बचाव अभियान बताया जा रहा है।
अभियान में अफ्रीकी विशेषज्ञ टीम , पशु चिकित्सक और 11 ट्रक तैनात हैं।
राज्य सरकार के 'किसान कल्याण वर्ष 2026' के तहत फसलों को वन्य पशुओं से बचाना इस अभियान का मूल उद्देश्य है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 28 अक्टूबर 2026 को शाजापुर जिले का दौरा कर काले हिरणों के बचाव एवं पुनर्वास अभियान के दूसरे चरण का निरीक्षण किया। इस अभियान का उद्देश्य वन्यजीवों को सुरक्षित आवासों तक पहुँचाना और किसानों की फसलों को नुकसान से बचाना है। अब तक 1,236 काले हिरण पकड़े जा चुके हैं।

अभियान का मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री यादव ने शाजापुर जिले के रणथम्भवार गांव का दौरा कर वन विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली की समीक्षा की। उन्होंने अभियान में तैनात दल को बधाई दी और पूरी प्रक्रिया का जायज़ा लिया। इस अभियान में अफ्रीका से बुलाई गई विशेषज्ञ टीम की सहायता ली जा रही है।

पकड़े गए हिरणों को श्योपुर, गांधी सागर और रानी दुर्गावती आरक्षित वन सहित विभिन्न वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। इस स्थानांतरण के लिए पशु चिकित्सकों और आवश्यक उपकरणों के साथ 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है।

बोमा पद्धति — दक्षिण एशिया में पहली बार

इस अभियान में बोमा पद्धति का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें जानवरों को बाड़ों में सुरक्षित रूप से एकत्र किया जाता है। यादव ने दावा किया कि दक्षिण एशिया में पहली बार इस पद्धति के साथ हेलीकॉप्टर की सहायता से वन्यजीव बचाव कार्य संचालित किया जा रहा है। गौरतलब है कि बोमा तकनीक अफ्रीकी देशों में वन्यजीव प्रबंधन के लिए व्यापक रूप से प्रयुक्त होती है।

पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, 'हमारा उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और साथ ही किसानों की फसलों की रक्षा करना है। काले हिरणों को सुरक्षित रूप से पकड़ने और यह सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान रखा जा रहा है कि किसी भी जानवर को कोई चोट न पहुँचे।'

किसान कल्याण वर्ष से जुड़ाव

राज्य सरकार ने 2026 को 'किसान कल्याण वर्ष' घोषित किया है। इसी के तहत यह स्थानांतरण अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें काले हिरण और नीलगाय जैसे वन्य जानवरों से फसलों की रक्षा को प्राथमिकता दी गई है। यह अभियान किसानों की आर्थिक सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण दोनों को एक साथ साधने का प्रयास है।

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में फसलों को वन्य पशुओं से होने वाले नुकसान के मामले बढ़ रहे हैं और किसान लगातार मुआवज़े की माँग कर रहे हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

यादव ने विश्वास जताया कि इस परियोजना की सफलता देश के अन्य राज्यों और यहाँ तक कि अन्य देशों को भी इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। वन विभाग के अनुसार, जानवरों के स्थानांतरण में पशु चिकित्सकों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जा रही है ताकि किसी भी जीव को आघात न पहुँचे।

आगे क्या होगा

अभियान के अगले चरण में शेष काले हिरणों को चिह्नित वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री ने किसान कल्याण, युवाओं के लिए रोज़गार सृजन और वन्यजीव संरक्षण को राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में रखने की बात दोहराई। यदि यह अभियान अपने लक्ष्य में सफल होता है, तो यह भारत में मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन का एक नया मॉडल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या पुनर्वासित वन क्षेत्रों में पर्याप्त आवास क्षमता और दीर्घकालिक प्रबंधन का खाका तैयार है। मध्य प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या गहरी है और महज़ स्थानांतरण स्थायी समाधान नहीं हो सकता जब तक वन बफर ज़ोन की निगरानी और विस्तार सुनिश्चित न हो। 'किसान कल्याण वर्ष' के राजनीतिक संदर्भ में यह अभियान प्रशंसनीय है, परंतु इसकी सफलता की कसौटी अगले खरीफ सीज़न में फसल नुकसान के आँकड़ों से तय होगी।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शाजापुर का काले हिरण बचाव अभियान क्या है?
यह मध्य प्रदेश सरकार द्वारा शाजापुर जिले में चलाया जा रहा वन्यजीव बचाव एवं पुनर्वास अभियान है, जिसमें काले हिरणों को किसानों के खेतों से सुरक्षित पकड़कर श्योपुर, गांधी सागर और रानी दुर्गावती आरक्षित वन जैसे उपयुक्त वन क्षेत्रों में छोड़ा जा रहा है। अब तक 1,236 काले हिरण पकड़े जा चुके हैं।
बोमा पद्धति क्या है और इसे यहाँ क्यों अपनाया गया?
बोमा पद्धति अफ्रीका में प्रचलित एक वन्यजीव प्रबंधन तकनीक है, जिसमें जानवरों को बाड़ों में सुरक्षित रूप से एकत्र किया जाता है। मध्य प्रदेश में इसे हेलीकॉप्टर की सहायता से लागू किया जा रहा है, जिसे मुख्यमंत्री यादव ने दक्षिण एशिया में पहली बार बताया है।
पकड़े गए काले हिरणों को कहाँ छोड़ा जाएगा?
पकड़े गए काले हिरणों को श्योपुर, गांधी सागर और रानी दुर्गावती आरक्षित वन सहित विभिन्न वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। इस स्थानांतरण के लिए पशु चिकित्सकों सहित 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है।
यह अभियान किसान कल्याण से कैसे जुड़ा है?
राज्य सरकार ने 2026 को 'किसान कल्याण वर्ष' घोषित किया है। इस अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य काले हिरण और नीलगाय जैसे वन्य जानवरों से किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को कम करना है, ताकि कृषि उत्पादकता बढ़ सके।
इस अभियान में किन विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है?
अभियान में अफ्रीका से बुलाई गई एक विशेषज्ञ टीम, पशु चिकित्सक और वन विभाग के अधिकारी शामिल हैं। हेलीकॉप्टर की सहायता से हिरणों को चिह्नित कर बोमा बाड़ों की ओर हाँका जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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