मध्य प्रदेश में 1,236 कृष्णमृगों का बोमा पद्धति से रेस्क्यू, CM मोहन यादव ने शाजापुर में लिया जायज़ा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को शाजापुर जिले के रंथभंवर गाँव पहुँचकर कृष्णमृग (काले हिरण) रेस्क्यू अभियान के दूसरे चरण का स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक 1,236 कृष्णमृगों को सुरक्षित पकड़ा जा चुका है, जिन्हें श्योपुर के जंगलों, गांधी सागर और रानी दुर्गावती रिजर्व फॉरेस्ट में पुनर्स्थापित किया जा रहा है।
अभियान का स्वरूप और बोमा पद्धति
यह अभियान बोमा पद्धति पर आधारित है, जिसमें कैमोफ्लाज्ड मचान और हेलीकॉप्टर की सहायता से जानवरों को बिना चोट पहुँचाए घेरकर पकड़ा जाता है। मुख्यमंत्री यादव के अनुसार, यह पूरे दक्षिण एशिया में पहली बार है कि हेलीकॉप्टर की मदद से बोमा पद्धति के आधार पर इतने बड़े पैमाने पर वन्यजीव रेस्क्यू अभियान चलाया गया है।
इस काम के लिए अफ्रीका से एक विशेष विशेषज्ञ टीम बुलाई गई है, जो जानवरों को सुरक्षित रूप से पकड़कर पिंजरों में रखने और स्थानांतरण की प्रक्रिया का नेतृत्व कर रही है। 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है, और पशु चिकित्सकों की देखरेख में पूरे स्थानांतरण को अंजाम दिया जा रहा है।
किसान संरक्षण और वन्यजीव संतुलन
यह अभियान किसान कल्याण वर्ष के तहत चलाए जा रहे कार्यक्रमों की कड़ी में है। मुख्यमंत्री यादव ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा, 'हमारे किसानों की फसलों को जंगली जानवरों — खासकर काले हिरण और नीलगाय — से बचाने के लिए सरकार द्वारा अफ्रीका से एक विशेष टीम बुलाई गई है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य वन्यजीवों की सुरक्षा और किसानों की फसल संरक्षण — दोनों को एक साथ सुनिश्चित करना है।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में कृष्णमृगों और नीलगायों की बढ़ती संख्या के कारण रबी और खरीफ दोनों फसलों को नुकसान की शिकायतें किसानों द्वारा लंबे समय से की जा रही थीं। यह अभियान उसी पृष्ठभूमि में आरंभ हुआ है।
मुख्यमंत्री का निरीक्षण और टीम के साथ संवाद
मुख्यमंत्री यादव ने वन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों से अभियान की प्रगति और लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने बोमा स्थल पर वन विभाग-प्रशासनिक टीम के साथ समूह फोटो भी खिंचवाया, जो प्रशासन और वन अमले के बीच समन्वय का प्रतीक रहा।
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रासंगिकता
मुख्यमंत्री यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि इस परियोजना की सफलता को देखते हुए 'देश के कई अन्य राज्य और दूसरे देश भी इस पद्धति को अपनाएंगे।' यह अभियान वन्यजीव संरक्षण और कृषि क्षेत्र के बीच संतुलन साधने के एक अभिनव मॉडल के रूप में उभर सकता है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य सरकार ने अपने कार्यकाल में किसान कल्याण, युवा रोजगार और प्रकृति संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। आने वाले दिनों में अभियान के अगले चरण की निगरानी के लिए प्रशासनिक तंत्र सक्रिय रहेगा।