कान्हा टाइगर रिजर्व में 100 साल बाद लौटे जंगली भैंसे, सीएम मोहन यादव ने कहा — पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अद्भुत अवसर

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कान्हा टाइगर रिजर्व में 100 साल बाद लौटे जंगली भैंसे, सीएम मोहन यादव ने कहा — पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अद्भुत अवसर

सारांश

100 वर्षों से अधिक के अंतराल के बाद मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में एशियाई जंगली भैंसों की वापसी हुई है। असम से 4 उप-वयस्क भैंसों को सुपखार और टोपला क्षेत्र में छोड़ा गया है और कुल 50 की संस्थापक आबादी का लक्ष्य है — यह भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक नया अध्याय है।

Key Takeaways

  • कान्हा टाइगर रिजर्व के सुपखार और टोपला क्षेत्रों में 28 अप्रैल 2026 को 4 एशियाई जंगली भैंसों को छोड़ा गया।
  • 100 वर्षों से अधिक के बाद मध्य प्रदेश में जंगली भैंसों की वापसी; अंतिम बार 1979 में सुपखार में देखे गए थे।
  • इस सीजन में 8 भैंसों का स्थानांतरण; दीर्घकालिक लक्ष्य 50 भैंसों की 'संस्थापक आबादी' तैयार करना।
  • यह अभियान मध्य प्रदेश और असम सरकारों के बीच रणनीतिक साझेदारी के तहत चलाया जा रहा है।
  • सीएम मोहन यादव ने केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव और असम सीएम हिमंता बिस्व सरमा का आभार जताया।

कान्हा टाइगर रिजर्व, बालाघाट (मध्य प्रदेश), 28 अप्रैल 2026 — वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व के सुपखार और टोपला क्षेत्रों में एशियाई जंगली भैंसों को पुनः बसाया गया है। 100 वर्षों से अधिक समय के बाद मध्य प्रदेश की धरती पर इन दुर्लभ जीवों की वापसी को वन्यजीव विशेषज्ञ एक असाधारण संरक्षण उपलब्धि मान रहे हैं।

स्थानांतरण अभियान का विवरण

इस सीजन में असम से 4 उप-वयस्क जंगली भैंसों — जिनमें एक नर भी शामिल है — को कान्हा के सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा गया। पूरी प्रक्रिया काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और कान्हा टाइगर रिजर्व के वरिष्ठ अधिकारियों तथा अनुभवी पशु चिकित्सकों की देखरेख में वैज्ञानिक पद्धति से संपन्न की गई। इस सीजन में कुल 8 भैंसों को स्थानांतरित किए जाने का लक्ष्य है, जबकि दीर्घकालिक योजना के तहत कुल 50 भैंसों की 'संस्थापक आबादी' तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव की प्रतिक्रिया

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर वीडियो साझा करते हुए लिखा, ''वन्यजीवों के संरक्षण में मध्यप्रदेश अग्रणी, आज कान्हा टाइगर रिजर्व, बालाघाट में असम से लाए गए 4 जंगली भैंसों को छोड़कर उनके पुनर्स्थापन अभियान का शुभारंभ किया। 100 वर्षों से अधिक समय के बाद मध्य प्रदेश की धरती पर जंगली भैंसों का आगमन हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक अद्भुत अवसर है।'' उन्होंने यह भी बताया कि कुल 50 जंगली भैंसों के पुनर्वास की योजना है और यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में चलाई जा रही है।

यादव ने इस स्थानांतरण को संभव बनाने के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव तथा असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच पहले भी मध्य प्रदेश में जंगली भैंसों और गैंडों को लाने की संभावना पर चर्चा हो चुकी थी।

मध्य प्रदेश-असम रणनीतिक साझेदारी

मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार, यह स्थानांतरण मध्य प्रदेश और असम सरकारों के बीच एक रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत का प्रतीक है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के जंगलों का पारिस्थितिक संतुलन बहाल करना है। गौरतलब है कि यह पहल राज्य की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय पर्यटन क्षेत्र को भी प्रोत्साहन देने की दिशा में एक सुनियोजित कदम है।

सुपखार अभयारण्य — आदर्श पुनर्वास स्थल

बालाघाट में स्थित कान्हा टाइगर रिजर्व के विशाल क्षेत्र में मौजूद सुपखार अभयारण्य एक साफ-सुथरा पहाड़ी घास का मैदान है, जो दुर्लभ शाकाहारी जीवों के लिए अत्यंत उपयुक्त माना जाता है। अपने विशाल, लहरदार घास के मैदानों और साल भर बहने वाली जलधाराओं के लिए प्रसिद्ध यह स्थान जंगली भैंसों को फिर से बसाने के लिए आदर्श वातावरण प्रदान करता है। इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व इसलिए भी विशेष है, क्योंकि 1979 में इस इलाके में आखिरी बार जंगली भैंस देखी गई थी।

विशेषज्ञों की राय और आगे की राह

वन्यजीव विशेषज्ञों ने पाया है कि स्थानांतरित किए गए सभी जानवर स्वस्थ हैं और पूरी तरह सक्रिय हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कान्हा के सुरक्षित क्षेत्र में वे दीर्घकालिक और स्वस्थ जीवन के लिए तैयार हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में विलुप्त हो रही प्रजातियों के पुनर्वास पर राष्ट्रीय स्तर पर जोर बढ़ रहा है। असम के साथ इस नई साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए मध्य प्रदेश देश के प्राकृतिक पर्यावरण के संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा।

Point of View

लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है — 50 भैंसों की संस्थापक आबादी तभी टिकाऊ होगी जब दीर्घकालिक निगरानी, पर्याप्त बजट और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित हो। यह ऐसे समय में आया है जब चीता पुनर्वास परियोजना की शुरुआती कठिनाइयाँ यह याद दिलाती हैं कि घोषणा और सफल पुनर्वास के बीच लंबा रास्ता होता है। राजनीतिक श्रेय से परे, विशेषज्ञों को यह सुनिश्चित करना होगा कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए स्थानीय ग्रामीणों के साथ पारदर्शी संवाद हो। यदि यह मॉडल सफल रहा, तो यह गैंडों सहित अन्य विलुप्तप्राय प्रजातियों के पुनर्वास के लिए एक राष्ट्रीय खाका बन सकता है।
NationPress
28/04/2026

Frequently Asked Questions

कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसों को क्यों बसाया गया?
कान्हा टाइगर रिजर्व में एशियाई जंगली भैंसों को पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने और विलुप्त हो रही प्रजातियों के संरक्षण के उद्देश्य से बसाया गया है। 1979 के बाद से मध्य प्रदेश में यह प्रजाति अनुपस्थित थी और यह स्थानांतरण मध्य प्रदेश-असम सरकारों की रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है।
कुल कितने जंगली भैंसों को कान्हा में लाने की योजना है?
दीर्घकालिक लक्ष्य के तहत कुल 50 जंगली भैंसों की 'संस्थापक आबादी' तैयार करने की योजना है। इस सीजन में असम से 8 भैंसों का स्थानांतरण किया जाएगा, जिनमें से 4 को 28 अप्रैल 2026 को छोड़ा जा चुका है।
सुपखार अभयारण्य को जंगली भैंसों के लिए क्यों चुना गया?
सुपखार अभयारण्य एक पहाड़ी घास का मैदान है जो साल भर बहने वाली जलधाराओं और लहरदार घास के मैदानों के कारण शाकाहारी वन्यजीवों के लिए आदर्श है। इसका ऐतिहासिक महत्व यह भी है कि 1979 में इसी स्थान पर आखिरी बार जंगली भैंस देखी गई थी।
इस अभियान में असम की क्या भूमिका है?
असम सरकार ने काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से जंगली भैंसों को उपलब्ध कराया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के बीच इस साझेदारी पर पहले भी चर्चा हो चुकी थी और भविष्य में गैंडों को लाने की संभावना पर भी बात हुई है।
यह स्थानांतरण वैज्ञानिक दृष्टि से कैसे किया गया?
पूरी प्रक्रिया काजीरंगा और कान्हा के वरिष्ठ वन अधिकारियों तथा अनुभवी पशु चिकित्सकों की देखरेख में वैज्ञानिक पद्धति से संपन्न की गई। विशेषज्ञों ने पुष्टि की है कि स्थानांतरित सभी भैंसे स्वस्थ और सक्रिय हैं।
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