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अभिनेता किशन दास: 'मैं काम पूरा होने के बाद ही प्रोजेक्ट की घोषणा करता हूँ'

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अभिनेता किशन दास: 'मैं काम पूरा होने के बाद ही प्रोजेक्ट की घोषणा करता हूँ'

सारांश

तमिल फिल्म इंडस्ट्री के अभिनेता किशन दास का मानना है कि प्रचार-प्रसार से दूर रहना ही सफलता की कुंजी है। वह अपने प्रोजेक्ट्स की घोषणा तब तक नहीं करते, जब तक निर्माण कार्य पूरा न हो जाए। दास का 19 साल की उम्र से ही संघर्ष का सफर दर्शाता है कि कैसे समर्पण और धैर्य फिल्म इंडस्ट्री में सफलता का आधार बन सकते हैं।

मुख्य बातें

किशन दास का मानना है कि प्रोजेक्ट्स की जानकारी काम पूरा होने के बाद ही साझा करनी चाहिए।
अभिनेता का दृष्टिकोण दर्शकों से भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने पर केंद्रित है।
स्कूल के दिनों से ही दास ने अपने सपनों के लिए कई त्याग किए।
19 साल की उम्र में कैमरा असिस्टेंट के रूप में उनका कठिन संघर्ष शुरू हुआ।
दास गुणवत्ता और सिनेमाघर अनुभव को प्राथमिकता देते हैं।

मुंबई, 28 अप्रैल। तमिल फिल्म इंडस्ट्री के अभिनेता किशन दास प्रचार-प्रसार से दूर रहने की अपनी रणनीति पर अडिग हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए कहा कि वह आने वाले प्रोजेक्ट्स की जानकारी तब तक सार्वजनिक नहीं करते, जब तक उनका निर्माण कार्य पूरी तरह समाप्त न हो जाए। दास का मानना है कि यह दृष्टिकोण दर्शकों को फिल्म से अधिक जुड़ाव प्रदान करता है।

काम पूरा होने के बाद ही सूचना देने का दर्शन

किशन दास ने अपने इंस्टाग्राम संदेश में स्पष्ट किया, ''पिछले कुछ महीनों से कई लोग मुझसे लगातार पूछ रहे हैं कि मैं आगे क्या करने वाला हूँ। लेकिन मेरा विश्वास है कि किसी भी फिल्म या प्रोजेक्ट के बारे में तब तक बात नहीं करनी चाहिए, जब तक उसका काम पूरा न हो जाए।''

अभिनेता ने आगे कहा कि प्रारंभिक प्रचार से बचने का कारण यह है कि इससे लोगों को गलत संदेश जाता है। ''अगर मैं शुरुआत से ही अपने काम का प्रचार करने लगूँ, तो इससे लोगों को यह लगेगा कि मेरे पास बहुत अधिक प्रोजेक्ट्स हैं। लेकिन मैं ऐसा दिखावा नहीं करना चाहता। मैं गुणवत्ता में विश्वास रखता हूँ, मात्रा में नहीं।''

दर्शकों से जुड़ाव को प्राथमिकता

दास के अनुसार, जब किसी फिल्म का निर्माण पूरा हो जाता है और उसके बाद दर्शकों को उसके बारे में बताया जाता है, तो लोग उस फिल्म से अधिक भावनात्मक जुड़ाव महसूस करते हैं। ''इससे फिल्म का सफर छोटा, लेकिन अधिक खास बन जाता है, क्योंकि लोगों को जानकारी मिलने के कुछ समय बाद ही वह फिल्म देखने को मिल जाती है। यह दृष्टिकोण दर्शकों को एक बेहतर सिनेमाघर अनुभव देता है।''

संघर्ष और समर्पण की कहानी

कुछ समय पहले किशन दास ने अपने संघर्ष की यात्रा साझा करते हुए एक भावुक संदेश पोस्ट किया था। अभिनेता ने कहा, ''जब भी मुझे अपने सफर पर शक होता है, मैं अपने पुराने दिनों को याद कर लेता हूँ। यहाँ तक पहुँचने के लिए मुझे जिंदगी में बहुत कुछ खोना पड़ा है।''

उन्होंने बताया कि स्कूल के दिनों में उन्होंने पढ़ाई और दोस्तों के साथ बिताने वाले कई पल त्याग दिए, क्योंकि वह हर अवसर को पकड़ना चाहते थे जो उन्हें आगे बढ़ने में मदद कर सके। ''कॉलेज के समय भी मेरी जिंदगी आसान नहीं थी। मुझे पढ़ाई के साथ-साथ अलग-अलग कार्यक्रमों में काम करना पड़ता था, क्योंकि मुझे अपने भविष्य की चिंता थी।''

19 साल की उम्र में कैमरा असिस्टेंट का काम

दास ने अपनी कठिन शुरुआत का विस्तार से वर्णन किया। ''19 साल की उम्र में नौकरी करते हुए मेरा संघर्ष और बढ़ गया। मैं कैमरे और सामान उठाकर एक जगह से दूसरी जगह भागता रहता था। इस दौरान मैं अपने दोस्तों के साथ समय भी नहीं बिता पाता था।''

उन्होंने कहा कि जब उनके दोस्त घूमने-फिरने जाते थे, वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए काम में लगे रहते थे। यह समर्पण ही उन्हें आज तमिल फिल्म इंडस्ट्री में एक पहचान दिलवा सका है।

भविष्य की योजनाएँ

किशन दास ने अपने प्रशंसकों को आश्वस्त किया कि वह लगातार मेहनत कर रहे हैं। ''सही समय आने पर मैं सभी जरूरी जानकारी साझा करता रहूँगा। मेरा उद्देश्य अपने दर्शकों को अच्छा सिनेमाघर अनुभव देना है, और इसी सोच के साथ मैं काम कर रहा हूँ।''

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ अभिनेता और निर्माता बहुधा प्रोजेक्ट्स की घोषणा करने में जल्दबाज़ी करते हैं। हालाँकि, दास का तर्क — कि पूर्ण निर्माण के बाद घोषणा दर्शकों को बेहतर अनुभव देती है — सीमित साक्ष्य पर आधारित है। वास्तविकता यह है कि लंबी प्रत्याशा अक्सर दर्शकों की रुचि को कम करती है, न कि बढ़ाती है। दास का संघर्ष की कहानी प्रेरक है, लेकिन यह स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि इंडस्ट्री में सफलता केवल कड़ी मेहनत नहीं, बल्कि सही समय, सही भूमिकाएँ और सही दृश्यमानता का संयोजन है। दास का यह रुख़ शायद उनकी व्यक्तिगत पसंद हो, लेकिन यह सार्वभौमिक सफलता का सूत्र नहीं है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किशन दास अपने प्रोजेक्ट्स की घोषणा देर से क्यों करते हैं?
किशन दास का मानना है कि प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद ही घोषणा से दर्शकों का भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है। उनके अनुसार, इससे फिल्म का सफर छोटा लेकिन अधिक खास बन जाता है, क्योंकि दर्शकों को जानकारी मिलने के कुछ समय बाद ही फिल्म देखने को मिल जाती है।
किशन दास का संघर्ष कब शुरू हुआ?
किशन दास का संघर्ष स्कूल के दिनों से ही शुरू हुआ, जब उन्होंने पढ़ाई के कई पल छोड़ दिए। 19 साल की उम्र में उन्होंने कैमरा असिस्टेंट के रूप में काम करना शुरू किया।
किशन दास तमिल फिल्म इंडस्ट्री में कैसे आए?
किशन दास ने कॉलेज के दौरान अलग-अलग कार्यक्रमों में काम किया और 19 साल की उम्र में कैमरा असिस्टेंट की नौकरी शुरू की। वह विभिन्न फिल्म प्रोडक्शन्स में काम करते हुए धीरे-धीरे इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाते गए।
किशन दास प्रचार-प्रसार से दूर क्यों रहते हैं?
किशन दास का मानना है कि शुरुआत से ही प्रचार करने से लोगों को गलत संदेश जाता है कि उनके पास बहुत अधिक प्रोजेक्ट्स हैं। वह गुणवत्ता और सिनेमाघर अनुभव को प्राथमिकता देते हैं, न कि प्रचार को।
राष्ट्र प्रेस
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