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ड्रिप इरीगेशन से गन्ना उत्पादन में 25% की बढ़ोतरी, 73,078 हेक्टेयर में संयंत्र स्थापित — योगी सरकार का बड़ा कदम

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ड्रिप इरीगेशन से गन्ना उत्पादन में 25% की बढ़ोतरी, 73,078 हेक्टेयर में संयंत्र स्थापित — योगी सरकार का बड़ा कदम

सारांश

उत्तर प्रदेश में ड्रिप इरीगेशन सिर्फ सिंचाई नहीं, किसानों की आय का नया ज़रिया बन रही है। 73,078 हेक्टेयर में संयंत्र स्थापित, उत्पादन 25% बढ़ा और पानी की बचत 50% तक — योगी सरकार की यह तकनीकी पहल क्षारयुक्त और सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भी गन्ने की खेती का रास्ता खोल रही है।

मुख्य बातें

गन्ना विकास विभाग के अनुसार, ड्रिप इरीगेशन अपनाने वाले किसानों को गन्ना उत्पादन में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी मिली है।
पिछले 9 वर्षों में 73,078 हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल में ड्रिप इरीगेशन संयंत्र स्थापित किए गए।
इस तकनीक से 50 प्रतिशत तक जल की बचत और लगभग उतनी ही उर्वरक लागत में कमी दर्ज की गई है।
वर्ष 2017 में 37 चीनी मिलों की एथनॉल क्षमता 88 करोड़ लीटर थी; अब 53 मिलों की क्षमता 258 करोड़ लीटर हो गई है।
क्षारयुक्त मिट्टी और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी गन्ने की खेती संभव हुई है।

उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विकास विभाग ने ड्रिप इरीगेशन (बूंद-बूंद सिंचाई) को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देकर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस तकनीक को अपनाने वाले किसानों को गन्ना उत्पादन में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी मिली है, जबकि जल की बचत 50 प्रतिशत तक हुई है। योगी सरकार के पिछले 9 वर्षों में यह तकनीकी पहल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने की प्रमुख रणनीति बनकर उभरी है।

मुख्य घटनाक्रम

गन्ना विभाग के मुताबिक, पिछले 9 वर्षों में 73,078 हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल में ड्रिप इरीगेशन संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। यह आंकड़ा राज्य में कृषि तकनीक के प्रसार की गति को दर्शाता है। विभाग के अनुसार, जो किसान इस तकनीक का उपयोग कर रहे हैं, उनके खेतों में उत्पादकता में स्पष्ट सुधार देखा गया है।

ड्रिप इरीगेशन में पानी सीधे पौधे की जड़ तक पहुँचाया जाता है, जिससे न केवल 50 प्रतिशत तक जल की बचत होती है, बल्कि उर्वरकों को पानी में मिलाकर पौधे तक पहुँचाने की सुविधा के कारण उर्वरक व्यय में भी लगभग इतनी ही बचत होती है।

किसानों पर असर

पानी और उर्वरकों की बर्बादी में कमी आने से किसानों पर उत्पादन लागत का बोझ घटा है, जो उनकी शुद्ध आय में वृद्धि की प्रमुख वजह बन रहा है। गन्ना विभाग के अनुसार, इस तकनीक के चलते क्षारयुक्त मिट्टी वाले और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी गन्ने की खेती संभव हो पाई है, जो पहले उपयुक्त नहीं मानी जाती थी। इससे किसानों के लिए नई कृषि भूमि का उपयोग खुला है।

गौरतलब है कि पिछले कई वर्षों में ड्रिप इरीगेशन के फायदे देखकर इसे अपनाने वाले किसानों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो इस तकनीक की व्यावहारिक स्वीकार्यता को दर्शाता है।

एथनॉल उत्पादन में बड़ी छलांग

गन्ना विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 तक उत्तर प्रदेश में मात्र 37 चीनी मिलों में एथनॉल प्लांट थे, जिनकी वार्षिक क्षमता लगभग 88 करोड़ लीटर थी, लेकिन वास्तविक उत्पादन महज 42 करोड़ लीटर था। वर्तमान में यह परिदृश्य बदल चुका है।

अब 53 चीनी मिलों की एथनॉल उत्पादन क्षमता बढ़कर लगभग 258 करोड़ लीटर वार्षिक हो गई है। शुगर सेक्टर का वास्तविक एथनॉल उत्पादन भी बढ़कर 137 करोड़ लीटर तक पहुँच गया है। यह विस्तार उत्तर प्रदेश को देश के प्रमुख एथनॉल उत्पादक राज्यों में स्थापित करता है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रिप इरीगेशन जैसी सटीक सिंचाई तकनीकें भारत के जल-संकट और किसान आय दोनों समस्याओं का एक साथ समाधान प्रस्तुत करती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश के कई ज़िले भूजल स्तर में गिरावट की चुनौती से जूझ रहे हैं। आने वाले वर्षों में इस तकनीक का और अधिक विस्तार किसानों की आर्थिक स्थिति को और मज़बूत कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 73,078 हेक्टेयर उत्तर प्रदेश के कुल गन्ना क्षेत्रफल का कितना हिस्सा है और शेष किसानों तक यह तकनीक कब पहुँचेगी। 25% उत्पादन वृद्धि का दावा विभागीय आंकड़ों पर आधारित है — स्वतंत्र सत्यापन की अनुपस्थिति में इसे पूर्ण सत्य मानना जल्दबाज़ी होगी। एथनॉल उत्पादन क्षमता का तीन गुना विस्तार निश्चित रूप से उल्लेखनीय है, परंतु वास्तविक उत्पादन अभी भी क्षमता के आधे से कम है — यह अंतर नीति-निर्माताओं के लिए अनुत्तरित प्रश्न छोड़ता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ड्रिप इरीगेशन से गन्ना उत्पादन में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
गन्ना विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, ड्रिप इरीगेशन अपनाने वाले किसानों को गन्ना उत्पादन में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी मिली है। साथ ही इस तकनीक से 50 प्रतिशत तक जल की बचत भी होती है।
उत्तर प्रदेश में कितने हेक्टेयर में ड्रिप इरीगेशन संयंत्र लगाए गए हैं?
पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश के 73,078 हेक्टेयर गन्ना क्षेत्रफल में ड्रिप इरीगेशन संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। यह कार्य योगी सरकार की कृषि तकनीक प्रसार नीति के तहत किया गया है।
ड्रिप इरीगेशन से किसानों को क्या फायदे होते हैं?
ड्रिप इरीगेशन से पानी सीधे पौधे की जड़ तक पहुँचता है, जिससे 50 प्रतिशत तक जल की बचत होती है और उर्वरक लागत भी घटती है। इससे उत्पादन लागत कम होने के साथ किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि होती है और क्षारयुक्त व कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी गन्ने की खेती संभव हो पाती है।
उत्तर प्रदेश में एथनॉल उत्पादन की स्थिति क्या है?
वर्ष 2017 में 37 चीनी मिलों की एथनॉल क्षमता 88 करोड़ लीटर थी और उत्पादन 42 करोड़ लीटर था। अब 53 चीनी मिलों की क्षमता बढ़कर 258 करोड़ लीटर वार्षिक हो गई है और वास्तविक उत्पादन 137 करोड़ लीटर तक पहुँच गया है।
क्षारयुक्त मिट्टी में गन्ने की खेती कैसे संभव हुई?
ड्रिप इरीगेशन तकनीक के ज़रिए पानी और उर्वरक सीधे जड़ तक नियंत्रित मात्रा में पहुँचाए जाते हैं, जिससे क्षारयुक्त और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी गन्ने की खेती संभव हो पाई है। गन्ना विभाग के अनुसार यह उन किसानों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जिनकी भूमि पहले कृषि के लिए अनुपयुक्त मानी जाती थी।
राष्ट्र प्रेस
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