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भारत का 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य, प्रह्लाद जोशी बोले — 50% गैर-जीवाश्म बिजली लक्ष्य समय से 5 साल पहले हासिल

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भारत का 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य, प्रह्लाद जोशी बोले — 50% गैर-जीवाश्म बिजली लक्ष्य समय से 5 साल पहले हासिल

सारांश

भारत ने गैर-जीवाश्म स्रोतों से 50% बिजली उत्पादन का लक्ष्य तय समय से पाँच साल पहले हासिल कर लिया है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 'रेजिलिएंट फ्यूचर्स समिट 2026' में बताया कि 2030 तक 500 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य है और पीक डिमांड में दो-तिहाई बिजली अब नवीकरणीय स्रोतों से आ रही है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 29 अप्रैल 2026 को रेजिलिएंट फ्यूचर्स समिट 2026 में भारत की ऊर्जा प्रगति की जानकारी दी।
गैर-जीवाश्म स्रोतों से 50% बिजली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित समय से 5 साल पहले हासिल किया गया।
भारत का 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य निर्धारित है।
पीक डिमांड के दौरान करीब दो-तिहाई बिजली नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरी की गई।
सरकार 2027 तक के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए 'यूटिलिटी-लेड मॉडल' अपना रही है।
घरेलू कोयले से प्रतिस्थापन योग्य आयात में कमी, लेकिन विशेष पावर प्लांट्स और मेटल इंडस्ट्री के लिए आयात जारी।

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 29 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'रेजिलिएंट फ्यूचर्स समिट 2026' के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने बताया कि 2030 तक 500 गीगावाट ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य निर्धारित है, और गैर-जीवाश्म स्रोतों से 50 प्रतिशत बिजली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित समय से पाँच साल पहले ही हासिल किया जा चुका है।

मुख्य उपलब्धियाँ और वर्तमान स्थिति

जोशी ने बताया कि भारत में अब पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और पंप स्टोरेज जैसे स्रोतों को मिलाकर कुल बिजली उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत हिस्सेदारी नवीकरणीय ऊर्जा की है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में पीक डिमांड के समय करीब दो-तिहाई बिजली की जरूरत नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरी की गई — जो न केवल उत्पादन क्षमता, बल्कि प्रभावी ट्रांसमिशन नेटवर्क की भी पुष्टि करता है। मंत्री ने इसे भारत की 'सक्सेस स्टोरी' करार दिया।

कोयला आयात में कमी — क्या बदल रहा है

पूर्व कोयला मंत्री के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए जोशी ने स्पष्ट किया कि भारत में ऐसे कोयले का आयात घटा है जिसे घरेलू संसाधनों से प्रतिस्थापित किया जा सकता है। हालाँकि, उन्होंने यह भी माना कि विशेष पावर प्लांट्स और मेटल इंडस्ट्री के लिए अभी भी कोयले का आयात अनिवार्य है। उनके अनुसार, जहाँ भारतीय कोयले का उपयोग संभव है, वहाँ आयात की आवश्यकता नहीं पड़ रही।

2027 के लक्ष्य और यूटिलिटी-लेड मॉडल

मंत्री ने बताया कि सरकार 2027 तक निर्धारित ऊर्जा क्षमता लक्ष्यों को पूरा करने के लिए तेज़ गति से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि अब तक काफी क्षमता स्थापित की जा चुकी है, लेकिन आगे भी बड़े पैमाने पर विस्तार बाकी है। इसे पूरा करने के लिए 'यूटिलिटी-लेड मॉडल' को अपनाया जा रहा है, जिसमें बड़े सरकारी और निजी संस्थानों की भूमिका केंद्रीय होगी।

सौर और ग्रीन एनर्जी में भारत की वैश्विक स्थिति

जोशी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने सौर ऊर्जा और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में शानदार प्रगति की है। गौरतलब है कि भारत आज नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में विश्व के शीर्ष देशों में शुमार है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए ऊर्जा परिवर्तन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम जारी रहने की बात उन्होंने कही।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी 500 गीगावाट का महत्वाकांक्षी 2030 लक्ष्य है — जो अभी भी काफी दूर है। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रिड एकीकरण, भंडारण क्षमता और ट्रांसमिशन अवसंरचना में निवेश की गति उत्पादन क्षमता जोड़ने की गति से पीछे रहती आई है। 'यूटिलिटी-लेड मॉडल' की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारी कितनी समन्वित है। बिना पारदर्शी प्रगति-ट्रैकिंग के, ये घोषणाएँ महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की उस परंपरा में जुड़ने का जोखिम उठाती हैं जो जमीनी बदलाव में पूरी तरह तब्दील नहीं हो पातीं।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य क्या है?
भारत सरकार ने 2030 तक पवन, सौर, बैटरी स्टोरेज और पंप स्टोरेज सहित विभिन्न नवीकरणीय स्रोतों से कुल 500 गीगावाट ऊर्जा क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 29 अप्रैल 2026 को 'रेजिलिएंट फ्यूचर्स समिट' में यह जानकारी दी।
भारत ने 50% गैर-जीवाश्म बिजली लक्ष्य कब हासिल किया?
भारत ने गैर-जीवाश्म स्रोतों से 50 प्रतिशत बिजली उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित समय से पाँच साल पहले ही हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि सरकार की नवीकरणीय ऊर्जा नीति की सफलता को दर्शाती है।
पीक डिमांड के दौरान भारत की नवीकरणीय ऊर्जा की क्या भूमिका रही?
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के अनुसार, हाल ही में पीक डिमांड के समय करीब दो-तिहाई बिजली की जरूरत नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरी की गई। यह भारत की ट्रांसमिशन और उत्पादन क्षमता दोनों में सुधार का संकेत है।
भारत में कोयला आयात की स्थिति क्या है?
प्रह्लाद जोशी ने बताया कि जिस कोयले को घरेलू संसाधनों से बदला जा सकता है, उसका आयात घटा है। हालाँकि, विशेष पावर प्लांट्स और मेटल इंडस्ट्री के लिए कोयले का आयात अभी भी जारी है।
'यूटिलिटी-लेड मॉडल' क्या है और यह ऊर्जा लक्ष्यों में कैसे मदद करेगा?
'यूटिलिटी-लेड मॉडल' एक ऐसी रणनीति है जिसमें बड़े सरकारी और निजी ऊर्जा संस्थान मिलकर बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार करते हैं। सरकार इसी मॉडल के ज़रिए 2027 तक के निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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