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मुंबई के दहिसर में फर्जी पुलिसकर्मी बनकर व्यापारी से ₹30,500 की ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार

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मुंबई के दहिसर में फर्जी पुलिसकर्मी बनकर व्यापारी से ₹30,500 की ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार

सारांश

मुंबई के दहिसर में दो बदमाशों ने फर्जी 'ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन' कार्ड दिखाकर एक युवा पनीर व्यापारी को जबरन गाड़ी में बंधक बनाया, मारपीट की और ₹30,500 वसूल लिए। पीड़ित की हिम्मत और दोस्त की सलाह पर दर्ज शिकायत के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

मुख्य बातें

23 अप्रैल 2026 को मुंबई के न्यू लिंक रोड ईस्ट-वेस्ट ब्रिज पर घटना हुई।
दोनों आरोपियों ने फर्जी ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन कार्ड दिखाकर खुद को पुलिस अधिकारी बताया।
पीड़ित 26 वर्षीय पनीर व्यापारी से कुल ₹30,500 — नकद ₹8,000 और ऑनलाइन ₹22,500 — वसूले गए।
आरोपी हर्षद नंदकुमार पडावे (33) और शाल राजेंद्र सूर्यवंशी (30) को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने अपहरण, मारपीट, धोखाधड़ी, वसूली और सरकारी अधिकारी बनकर ठगी के आरोप दर्ज किए।

मुंबई के दहिसर इलाके में 23 अप्रैल 2026 को दो बदमाशों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक 26 वर्षीय पनीर व्यापारी को जबरन गाड़ी में बंधक बनाया, मारपीट की और कुल ₹30,500 की वसूली की। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और अपहरण, मारपीट, धोखाधड़ी तथा सरकारी अधिकारी बनकर ठगी करने के आरोप में मामला दर्ज किया है।

मुख्य घटनाक्रम

23 अप्रैल 2026 को पीड़ित युवक अपने दोस्त की गाड़ी से ऑफिस जा रहा था। न्यू लिंक रोड ईस्ट-वेस्ट ब्रिज पर दो युवकों ने उसे रुकने का इशारा किया। रुकते ही दोनों ने खुद को ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन का अधिकारी बताते हुए एक फर्जी कार्ड दिखाया, जिससे पीड़ित को उन पर भरोसा हो गया।

इसके बाद दोनों आरोपी जबरन कार में घुस गए और तलाशी के बहाने कार में रखे एक सिगरेट रोलिंग पेपर को अवैध बताकर ₹1 लाख जुर्माने की माँग की। पूरे रास्ते पीड़ित के साथ मारपीट करते हुए पहले ₹8,000 नकद लिए और फिर ऑनलाइन माध्यम से ₹22,500 और वसूल लिए।

आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी

पुलिस ने दोनों आरोपियों की पहचान हर्षद नंदकुमार पडावे (33) और शाल राजेंद्र सूर्यवंशी (30) के रूप में की है। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है और पूछताछ जारी है। पुलिस यह जाँच कर रही है कि इन दोनों ने इससे पहले भी इसी तरह की वारदात को अंजाम दिया है या नहीं।

पीड़ित ने कैसे की शिकायत

घटना के बाद पीड़ित युवक शुरुआत में डर के कारण किसी को भी बताने से हिचक रहा था। बाद में उसने अपने एक दोस्त को घटना की जानकारी दी, जिसने उसे पुलिस में शिकायत दर्ज करने की सलाह दी। पीड़ित की शिकायत पर दहिसर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपियों के विरुद्ध अपहरण, मारपीट, धोखाधड़ी, वसूली और सरकारी अधिकारी बनकर ठगी करने के आरोप में मामला दर्ज किया।

आम जनता पर असर और सावधानी

यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि फर्जी पहचान पत्र दिखाकर ठगी करने के मामले महानगरों में बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि असली पुलिस अधिकारी आमतौर पर सरकारी वर्दी में होते हैं और बिना वर्दी के किसी को भी मनमाने ढंग से रोकने का अधिकार नहीं रखते। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत 100 या स्थानीय पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।

क्या होगा आगे

पुलिस दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और जाँच में यह भी देखा जा रहा है कि फर्जी ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन कार्ड किसने बनाया। अगर जाँच में और पीड़ित सामने आते हैं, तो आरोपों की संख्या बढ़ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि फर्जी कार्ड बनाने के पूरे नेटवर्क पर ध्यान देना होगा। महानगरों में इस तरह की घटनाएँ नागरिक जागरूकता अभियानों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई दहिसर फर्जी पुलिस ठगी मामला क्या है?
23 अप्रैल 2026 को दहिसर के न्यू लिंक रोड पर दो बदमाशों ने फर्जी ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन कार्ड दिखाकर एक 26 वर्षीय पनीर व्यापारी को गाड़ी में बंधक बनाया और मारपीट कर ₹30,500 वसूल लिए। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं?
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हर्षद नंदकुमार पडावे (33 वर्ष) और शाल राजेंद्र सूर्यवंशी (30 वर्ष) के रूप में हुई है। दहिसर पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है।
पीड़ित व्यापारी से कितने रुपये ठगे गए?
आरोपियों ने पहले ₹8,000 नकद लिए और फिर ऑनलाइन माध्यम से ₹22,500 वसूल किए, यानी कुल ₹30,500 की ठगी हुई। आरोपियों ने शुरू में ₹1 लाख जुर्माने की माँग की थी।
पुलिस ने आरोपियों पर कौन-कौन से आरोप लगाए हैं?
पुलिस ने अपहरण, मारपीट, धोखाधड़ी, वसूली और सरकारी पुलिस अधिकारी बनकर ठगी करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। जाँच में यह भी देखा जा रहा है कि फर्जी कार्ड किसने बनाया।
ऐसी घटनाओं से बचने के लिए नागरिक क्या करें?
यदि कोई बिना वर्दी के खुद को पुलिस अधिकारी बताए, तो तुरंत हेल्पलाइन नंबर 100 पर कॉल करें या नज़दीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। असली पुलिस अधिकारी सरकारी वर्दी में होते हैं और मनमाने जुर्माने की माँग नहीं करते।
राष्ट्र प्रेस
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