12 अक्टूबर 2026
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कान्हा नेशनल पार्क की जैव विविधता देश में अद्वितीय — मंडला दौरे पर बोले CM मोहन यादव

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कान्हा नेशनल पार्क की जैव विविधता देश में अद्वितीय — मंडला दौरे पर बोले CM मोहन यादव

सारांश

मंडला दौरे पर पहुँचे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कान्हा नेशनल पार्क को देश की जैव विविधता का गौरव बताया — बारहसिंगा को नया जीवन, चीता परियोजना का विस्तार और असम के सहयोग से आठ जंगली भैंसों का पुनर्वास: यह राज्य की वन्यजीव कूटनीति का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

CM मोहन यादव ने 12 अक्टूबर 2026 को मंडला दौरे में कान्हा नेशनल पार्क की जैव विविधता को देश में अद्वितीय बताया।
कभी विलुप्ति की कगार पर पहुँचे बारहसिंगा को कान्हा में संरक्षण और पुनर्वास के ज़रिये नया जीवन मिला है।
कूनो नेशनल पार्क के बाद गांधी सागर अभ्यारण और दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों को बसाया गया है।
असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से 8 जंगली भैंसे (6 मादा, 2 नर) मध्य प्रदेश में पुनर्वासित किए गए।
बाघ, तेंदुआ, घड़ियाल और मगरमच्छ के संरक्षण प्रयास भी जारी हैं।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 12 अक्टूबर 2026 को मंडला प्रवास के दौरान कान्हा नेशनल पार्क की समृद्ध जैव विविधता को देश में अद्वितीय बताया और कहा कि यह वन्यजीव संपदा मध्य प्रदेश की विशेष पहचान है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यहाँ बाघ, तेंदुआ और बारहसिंगा सहित अनेक प्रजातियाँ प्राकृतिक वातावरण में फल-फूल रही हैं।

बारहसिंगा संरक्षण में ऐतिहासिक भूमिका

मुख्यमंत्री यादव ने विशेष रूप से बारहसिंगा के पुनर्वास को कान्हा की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि कभी विलुप्ति की कगार पर पहुँची यह प्रजाति आज कान्हा में नया जीवन पा चुकी है। गौरतलब है कि कान्हा को 'हार्डग्राउंड बारहसिंगा' की अंतिम शरणस्थली माना जाता है और यहाँ दशकों से चले संरक्षण प्रयासों ने इस प्रजाति को पुनर्जीवन दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, 'हमारी समृद्ध वन्यजीव विरासत और प्रकृति के संरक्षण के प्रयासों को करीब से देखकर आज मुझे अत्यंत आनंद की अनुभूति हुई।' उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे कान्हा अवश्य आएँ और प्रकृति को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करें।

चीता परियोजना की प्रगति

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य की चीता परियोजना सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है। कूनो नेशनल पार्क के बाद अब गांधी सागर अभ्यारण और दुर्गावती टाइगर रिजर्व में भी चीतों को बसाया गया है, जो इस पुनर्वास कार्यक्रम के विस्तार का संकेत है।

जंगली भैंसों का पुनर्वास

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से जंगली भैंसों के पुनर्वास की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है। यादव ने बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत छह मादा और दो नर सहित कुल आठ जंगली भैंसे यहाँ बसाए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अंतर-राज्यीय वन्यजीव सहयोग को नई गति मिल रही है।

व्यापक वन्यजीव संरक्षण प्रयास

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाघ, तेंदुआ, घड़ियाल और मगरमच्छ जैसी प्रजातियों के संरक्षण में किए जा रहे प्रयास राज्य की प्राकृतिक धरोहर को और समृद्ध बना रहे हैं। उन्होंने इस विरासत के संरक्षण में योगदान देने वाले सभी लोगों को बधाई दी।

यादव की यह मंडला यात्रा ऐसे समय में आई है जब मध्य प्रदेश वन्यजीव पर्यटन को एक बड़े आर्थिक अवसर के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। कान्हा जैसे संरक्षित क्षेत्रों की अंतरराष्ट्रीय ख्याति इस रणनीति की रीढ़ बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि चीता परियोजना के नए स्थलों — गांधी सागर और दुर्गावती — में पुनर्वास कितना टिकाऊ है, क्योंकि कूनो में शुरुआती मौतों ने इस परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। जंगली भैंसों की छोटी संख्या (आठ) आनुवंशिक विविधता की दृष्टि से एक दीर्घकालिक चुनौती खड़ी करती है। राजनीतिक रूप से, यह यात्रा वन्यजीव पर्यटन को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश है — लेकिन स्थानीय समुदायों और वन अधिकारों के सवाल इस तस्वीर से अक्सर गायब रहते हैं।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कान्हा नेशनल पार्क किस कारण विशेष रूप से प्रसिद्ध है?
कान्हा नेशनल पार्क बाघ, तेंदुआ और 'हार्डग्राउंड बारहसिंगा' जैसी दुर्लभ प्रजातियों के लिए विश्वविख्यात है। यह उस बारहसिंगा की अंतिम और सबसे सफल शरणस्थली मानी जाती है जो कभी विलुप्ति की कगार पर थी।
मध्य प्रदेश में चीता परियोजना का विस्तार कहाँ तक हुआ है?
कूनो नेशनल पार्क के बाद अब गांधी सागर अभ्यारण और दुर्गावती टाइगर रिजर्व में भी चीतों को बसाया गया है। मुख्यमंत्री यादव के अनुसार, यह परियोजना PM मोदी के नेतृत्व में सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है।
मध्य प्रदेश में जंगली भैंसों का पुनर्वास कैसे हुआ?
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से कुल आठ जंगली भैंसे — छह मादा और दो नर — मध्य प्रदेश में पुनर्वासित किए गए हैं। यह अंतर-राज्यीय वन्यजीव सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
CM मोहन यादव ने नागरिकों से क्या अपील की?
मुख्यमंत्री यादव ने सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे कान्हा नेशनल पार्क अवश्य आएँ और प्रकृति को करीब से जानने व अनुभव करने का अवसर प्राप्त करें। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण में योगदान देने वाले सभी लोगों को बधाई भी दी।
कान्हा में कौन-कौन सी प्रजातियों का संरक्षण हो रहा है?
कान्हा और उससे जुड़े संरक्षित क्षेत्रों में बाघ, तेंदुआ, बारहसिंगा, घड़ियाल और मगरमच्छ सहित अनेक प्रजातियों के संरक्षण के प्रयास किए जा रहे हैं। जंगली भैंसों के हालिया पुनर्वास से यह सूची और विस्तृत हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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