कान्हा नेशनल पार्क की जैव विविधता देश में अद्वितीय — मंडला दौरे पर बोले CM मोहन यादव
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 12 अक्टूबर 2026 को मंडला प्रवास के दौरान कान्हा नेशनल पार्क की समृद्ध जैव विविधता को देश में अद्वितीय बताया और कहा कि यह वन्यजीव संपदा मध्य प्रदेश की विशेष पहचान है। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यहाँ बाघ, तेंदुआ और बारहसिंगा सहित अनेक प्रजातियाँ प्राकृतिक वातावरण में फल-फूल रही हैं।
बारहसिंगा संरक्षण में ऐतिहासिक भूमिका
मुख्यमंत्री यादव ने विशेष रूप से बारहसिंगा के पुनर्वास को कान्हा की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि कभी विलुप्ति की कगार पर पहुँची यह प्रजाति आज कान्हा में नया जीवन पा चुकी है। गौरतलब है कि कान्हा को 'हार्डग्राउंड बारहसिंगा' की अंतिम शरणस्थली माना जाता है और यहाँ दशकों से चले संरक्षण प्रयासों ने इस प्रजाति को पुनर्जीवन दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, 'हमारी समृद्ध वन्यजीव विरासत और प्रकृति के संरक्षण के प्रयासों को करीब से देखकर आज मुझे अत्यंत आनंद की अनुभूति हुई।' उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे कान्हा अवश्य आएँ और प्रकृति को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करें।
चीता परियोजना की प्रगति
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य की चीता परियोजना सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है। कूनो नेशनल पार्क के बाद अब गांधी सागर अभ्यारण और दुर्गावती टाइगर रिजर्व में भी चीतों को बसाया गया है, जो इस पुनर्वास कार्यक्रम के विस्तार का संकेत है।
जंगली भैंसों का पुनर्वास
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से जंगली भैंसों के पुनर्वास की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है। यादव ने बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत छह मादा और दो नर सहित कुल आठ जंगली भैंसे यहाँ बसाए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब अंतर-राज्यीय वन्यजीव सहयोग को नई गति मिल रही है।
व्यापक वन्यजीव संरक्षण प्रयास
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाघ, तेंदुआ, घड़ियाल और मगरमच्छ जैसी प्रजातियों के संरक्षण में किए जा रहे प्रयास राज्य की प्राकृतिक धरोहर को और समृद्ध बना रहे हैं। उन्होंने इस विरासत के संरक्षण में योगदान देने वाले सभी लोगों को बधाई दी।
यादव की यह मंडला यात्रा ऐसे समय में आई है जब मध्य प्रदेश वन्यजीव पर्यटन को एक बड़े आर्थिक अवसर के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। कान्हा जैसे संरक्षित क्षेत्रों की अंतरराष्ट्रीय ख्याति इस रणनीति की रीढ़ बन सकती है।