CM मोहन यादव: पशुपालन और मत्स्य पालन से बढ़ेगी किसानों की आय, नीमच में बलराम कृषि महोत्सव
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि केवल पारंपरिक खेती तक सीमित रहकर नहीं, बल्कि पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे सहायक क्षेत्रों को अपनाकर ही संभव है। मुख्यमंत्री ने खंडवा जिले से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कृषि उपज मंडी, चंगेरा, नीमच में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के जिला स्तरीय कार्यक्रम में भाग लिया। यह आयोजन किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत हुआ।
मुख्यमंत्री के प्रमुख संदेश
मुख्यमंत्री यादव ने पशुपालकों को प्रोत्साहित करने और गांधीसागर जलाशय सहित जिले में मत्स्य उत्पादन से जुड़े परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को शासन की किसान-हितैषी योजनाओं का पूरा लाभ मिले, इसके लिए जमीनी स्तर पर अमल ज़रूरी है।
नीमच जिले की विशिष्ट कृषि पहचान
मुख्यमंत्री यादव ने नीमच जिले को उन्नत कृषि, आधुनिक खेती और कृषि व्यापार के क्षेत्र में प्रदेश में अग्रणी बताया। जिले में अश्वगंधा, इसबगोल, तुलसी, सतावरी, चिरायता, आंवला, बहेरा और नीम जैसी औषधीय फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। इसके अतिरिक्त चिया सीड, लहसुन, मेथी और धनिया के उत्पादन व व्यापार में भी नीमच की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो इसे प्रदेश के प्रमुख कृषि-व्यापार केंद्रों में स्थापित करती है।
प्राकृतिक और जैविक खेती पर ज़ोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि नीमच जिले में 10,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक एवं जैविक खेती हो रही है। उन्होंने कहा कि इस पद्धति से न केवल भूमि की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित कृषि उत्पाद भी तैयार होते हैं, जिनकी बाज़ार में बेहतर कीमत मिलती है। किसानों से उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, फसल विविधीकरण करने और आय-वर्धक गतिविधियों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
चीता परियोजना और पर्यटन की संभावनाएँ
मुख्यमंत्री यादव ने गांधीसागर अभयारण्य में प्रस्तावित चीता परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके आने से नीमच जिले में पर्यटन की असीम संभावनाएँ खुलेंगी। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र के विकसित होने से स्थानीय स्तर पर रोज़गार और स्वरोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे तथा नीमच को राष्ट्रीय मानचित्र पर एक नई पहचान मिलेगी।
आम किसानों पर असर
बलराम कृषि महोत्सव जैसे कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देना और उन्हें आय के नए स्रोतों से जोड़ना है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत ऐसे जिला-स्तरीय कार्यक्रमों की श्रृंखला चलाई जा रही है, जो छोटे और सीमांत किसानों तक नवाचार और योजनाओं का लाभ पहुँचाने का प्रयास करती है। आने वाले समय में इन कार्यक्रमों का विस्तार और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा सरकार की प्राथमिकता रहेगी।