मध्य प्रदेश में प्राकृतिक खेती से किसानों की बदली तकदीर, CM मोहन यादव ने बलराम कृषि महोत्सव में साझा कीं सफलता की कहानियाँ
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के पांढुर्णा में 4 नवंबर 2026 को आयोजित बलराम कृषि महोत्सव में प्रगतिशील किसानों ने प्राकृतिक खेती, पशुपालन और कृषि-आधारित उद्यमों से अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की कहानियाँ साझा कीं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्यमंत्री निवास से वर्चुअल माध्यम से इस महोत्सव में भाग लिया और किसानों से सीधा संवाद किया। यह आयोजन 'किसान कल्याण वर्ष' के अंतर्गत किसानों को उन्नत कृषि तकनीक और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के उद्देश्य से किया गया।
किसानों की सफलता की कहानियाँ
विकासखंड सौंसर के ग्राम भुम्मा के कृषक मटरूलाल डोंगरे ने बताया कि वे प्राकृतिक खेती के ज़रिए हल्दी, अरहर और गेहूं का उत्पादन कर रहे हैं। उत्पादों का मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) करके वे प्रतिवर्ष ₹2 से 2.5 लाख का शुद्ध लाभ अर्जित कर रहे हैं। उनके प्राकृतिक उत्पाद अब जापान और ऑस्ट्रेलिया तक निर्यात हो रहे हैं।
ग्राम तिगांव के कृषक नरेंद्र ठाकरे ने बताया कि 16 एकड़ में संतरे की खेती से वे प्रतिवर्ष ₹15 से 20 लाख की आय अर्जित कर रहे हैं। इसके साथ ही वे पशुपालन और सब्जी उत्पादन को भी अपनी खेती में समाहित कर चुके हैं।
ग्राम पारडसिंगा की रोशनी नरवरे ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने 14 गाँवों की 350 महिलाओं को एकजुट कर देशी कपास से खादी, सीड बॉल और सीड ज्वेलरी का निर्माण शुरू करवाया है। ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए इन उत्पादों की बिक्री से महिलाएँ स्वावलंबी बन रही हैं।
सरकारी योजनाओं से मिला लाभ
पांढुर्णा के कृषक कृष्ण कुमार रबड़े ने पीएमएफएमई योजना के तहत दुग्ध प्रसंस्करण इकाई स्थापित की है। पनीर, श्रीखंड, घी और मावा का उत्पादन करके वे प्रतिवर्ष ₹8 से 10 लाख की आय अर्जित कर रहे हैं। इस इकाई से 8 से 10 लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार भी मिला है।
ग्राम पिपलानी के कृषक विजेश भादे ने आत्मा योजना के तहत बीआरसी सेंटर स्थापित किया और 2.5 एकड़ में जैविक खेती अपनाई। पशुपालन, उद्यानिकी और समन्वित खेती से वे प्रतिवर्ष ₹3 से 4 लाख की आय अर्जित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया और सरकार का संकल्प
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्य प्रदेश निरंतर विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने कहा, 'किसान, महिला, युवा एवं गरीब सहित समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए राज्य सरकार संकल्पबद्ध है।' उन्होंने यह भी कहा कि कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए सर्वे कराया जा रहा है और किसानों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
यह ऐसे समय में आया है जब पांढुर्णा जिला गेहूं, मक्का, चना, तुअर और संतरे के उत्पादन के लिए पहले से ही महत्वपूर्ण कृषि केंद्र के रूप में पहचाना जाता है। जिले में दुग्ध उत्पादन और किसानों की आय में भी निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है।
प्रभारी मंत्री और सहकारी बैंक का संबोधन
पांढुर्णा जिले के प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने अपने वर्चुअल संबोधन में कहा कि जिला कृषि-आधारित उत्पादों के निर्माण में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और इन इकाइयों से युवाओं को रोज़गार के नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने ग्रामीणों को नि:शुल्क संपत्ति रजिस्ट्री की सुविधा के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। मध्य प्रदेश राज्य सहकारी बैंक के प्रशासक महेंद्र सिंह यादव ने बलराम जयंती को 'किसान दिवस' घोषित करने के निर्णय की सराहना की।
आगे की राह
गौरतलब है कि बलराम कृषि महोत्सव जैसे आयोजनों का उद्देश्य किसानों के बीच प्राकृतिक और जैविक खेती के सफल मॉडलों को प्रचारित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैल्यू एडिशन और निर्यात को बढ़ावा देकर किसानों की आय को टिकाऊ रूप से दोगुना किया जा सकता है। आने वाले समय में इस तरह की पहल राज्य के अन्य जिलों में भी विस्तारित किए जाने की संभावना है।