कृषि परंपरा: भारतीय संस्कृति और जीवन शैली का महत्त्वपूर्ण आधार - सीएम मोहन यादव
सारांश
Key Takeaways
- भारत की कृषि परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है।
- कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का आधार है।
- मध्य प्रदेश कृषि विकास में अग्रणी राज्य बन चुका है।
- प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है।
- सरकार किसानों के लिए विभिन्न योजनाएं लागू कर रही है।
जबलपुर, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बताया कि भारत की कृषि परंपरा हजारों वर्षों की है और यह केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवन शैली का एक महत्वपूर्ण आधार है।
सीएम मोहन यादव ने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर में आयोजित कृषि मंथन कार्यक्रम के दौरान कहा कि मध्य प्रदेश कृषि, परंपरा, वैज्ञानिक अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के समन्वय से देश में कृषि विकास का सबसे प्रमुख राज्य बन चुका है। किसानों की मेहनत, कृषि वैज्ञानिकों के अनुसंधान और सरकार की योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के फलस्वरूप प्रदेश ने दलहन, तिलहन और खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति की है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसान अब एक फसल से आगे बढ़कर दो और तीन फसली कृषि प्रणाली को अपनाते हुए नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। ड्रोन तकनीक, उन्नत कृषि यंत्र, प्राकृतिक खेती मॉडल और उन्नत बीजों जैसे नवाचारों से कृषि की दिशा बदल रही है।
सीएम ने बताया कि भारत की कृषि परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है और यह केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और जीवन शैली का आधार है। ऋषि-मुनियों द्वारा विकसित कृषि ज्ञान आज भी प्रासंगिक है और इसे आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ मिलाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कृषि के प्रति सम्मान भारतीय जीवन दर्शन में सदैव रहा है। प्राचीन भीमबेटका शैलाश्रय में भी इसका उल्लेख मिलता है। भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने नदी जोड़ो परियोजना का संकल्प लिया था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मूर्त रूप दिया जा रहा है। नर्मदा जल के समुचित उपयोग और सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार से मध्य प्रदेश की कृषि उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना वर्तमान समय की आवश्यकता है। मध्य प्रदेश प्राकृतिक खेती में देश का अग्रणी राज्य है और इसका क्षेत्र निरंतर बढ़ रहा है। सरकार द्वारा कोदो-कुटकी तथा रागी जैसे मोटे अनाजों के उत्पादन और उपार्जन को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध हो रहा है और पोषणयुक्त कृषि को बढ़ावा मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि उज्जैन के महाकाल मंदिर में प्रसाद के रूप में रागी के लड्डू का वितरण किया जा रहा है। प्रदेश में भावांतर योजना के तहत सरसों की खरीदी की जा रही है। गेहूं का समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा रही है और किसानों को गेहूं का दाम 2700 रुपये प्रति क्विंटल तक दिलाने का संकल्प लिया गया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पशुपालन को कृषि का महत्वपूर्ण अंग बताते हुए कहा कि राज्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार ने दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। साथ ही, बच्चों के पोषण को ध्यान में रखते हुए शासकीय स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक के बच्चों के लिए नि:शुल्क दूध वितरण की योजना भी लागू की जा रही है।
उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन सहित कुल 23 करोड़ 21 लाख रुपये की लागत से निर्मित विभिन्न इकाइयों का लोकार्पण किया। साथ ही “जवाहर चारा डिजिटल स्कैनर” और कृषि अनुसंधान ट्रैकिंग एप का विमोचन किया। 13 करोड़ रुपये की लागत से बने नवीन प्रशासनिक भवन को भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी प्रशासनिक भवन के नाम से जाना जाएगा।