रुमीन फरहाना का बीएनपी सरकार पर आरोप, पार्टी से जुड़े लोगों की नियुक्ति पर उठाए सवाल
सारांश
Key Takeaways
- रुमीन फरहाना ने बीएनपी सरकार पर नियुक्तियों के लिए पार्टी से जुड़े लोगों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया।
- महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में कमी पर चिंता जताई गई।
- राष्ट्रपति को स्वतंत्र भाषण देने की अपेक्षाएं थीं, लेकिन वे कैबिनेट के अनुमोदित भाषण तक सीमित रहे।
ढाका, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश की स्वतंत्र विधायिका, रुमीन फरहाना ने वर्तमान बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार पर महत्वपूर्ण पदों पर पार्टी से जुड़े व्यक्तियों की नियुक्ति को लेकर तीखा हमला किया है।
स्थानीय समाचार स्रोतों के अनुसार, संसद सत्र के दौरान फरहाना ने यह आरोप लगाया कि बांग्लादेश बैंक के गवर्नर और कई सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के कुलपतियों जैसे महत्वपूर्ण पदों पर पार्टी से जुड़े व्यक्तियों को नियुक्त किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, “हर देश में केंद्रीय बैंक वित्तीय संस्थानों के नियामक के रूप में कार्य करता है और सरकार का बैंक भी होता है। दक्षिण एशिया के अन्य देशों में, जैसे कि प्रिंसटन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से पीएचडी करने वाले विशेषज्ञों को केंद्रीय बैंक में नियुक्त किया जाता है। इसके विपरीत, बांग्लादेश में नई सरकार बनने के बाद, जिस व्यक्ति को गवर्नर बनाया गया, वह बीएनपी की चुनाव समिति का सदस्य और एक स्वेटर फैक्ट्री का प्रबंध निदेशक था।”
फरहाना ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों में कुलपतियों और प्रो-वीसी की नियुक्तियों में भी यही पैटर्न देखने को मिल रहा है, जहां पार्टी से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।
उन्होंने कहा, “राजनीतिक रूप से सक्रिय होना गलत नहीं है, लेकिन यदि बिना पार्टी संबद्धता के नियुक्ति संभव नहीं है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।”
गौरतलब है कि रुमीन फरहाना पहले बीएनपी से जुड़ी रही हैं, लेकिन 12 फरवरी को हुए आम चुनाव में उन्होंने ब्राह्मणबरिया-2 सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था, क्योंकि पार्टी ने यह सीट अपने सहयोगी दल को दे दी थी।
उन्होंने 2024 के जुलाई विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य एक समावेशी बांग्लादेश का निर्माण करना था, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं की भूमिका घटती जा रही है।
उन्होंने सवाल उठाया, “इस आंदोलन में महिलाएं सबसे आगे थीं, लेकिन एक साल के भीतर वे कहां गायब हो गईं?”
फरहाना ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान महिलाएं अग्रिम पंक्ति में रहती हैं, लेकिन हालात सामान्य होने के बाद उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है और उनके पहनावे, बोलचाल एवं व्यक्तित्व का मजाक उड़ाया जाता है।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बीच शक्तियों के संतुलन पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि इस बार राष्ट्रपति से उम्मीद थी कि वह अपना स्वतंत्र भाषण देंगे, लेकिन उन्हें फिर से कैबिनेट द्वारा मंजूर भाषण ही पढ़ना पड़ा।
उन्होंने सवाल किया, “अगर हम राष्ट्रपति को इतनी भी स्वतंत्रता नहीं दे सकते, तो फिर शक्तियों के संतुलन की बात कैसे कर सकते हैं?”