सीएम मोहन यादव ने शाजापुर में बलराम कृषि महोत्सव में किसानों से किया संवाद, आय बढ़ाने की योजनाओं का खाका पेश
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को बोधगया, बिहार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए शाजापुर जिले में आयोजित 'बलराम कृषि महोत्सव' में किसानों से सीधा संवाद किया और राज्य सरकार की कृषक-केंद्रित योजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार 'कृषक कल्याण वर्ष' के तहत खेती को आर्थिक दृष्टि से अधिक लाभकारी बनाने के लिए बहुआयामी प्रयास कर रही है।
शाजापुर की कृषि पहचान और विकास
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि शाजापुर जिला प्याज, आलू और सोयाबीन जैसी प्रमुख फसलों के साथ-साथ कृषि-आधारित उद्योगों और सौर ऊर्जा क्षेत्र में भी तेज़ी से अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि, नवाचार और विकास के मामले में यह जिला निरंतर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि प्रस्तावित सड़क और एक्सप्रेस-वे परियोजनाएँ शाजापुर के समग्र विकास को नई गति देंगी और किसानों एवं स्थानीय व्यापारियों के लिए मंडियों तक पहुँच सुगम होगी।
सरकार की मुख्य कृषि योजनाएँ
'कृषक कल्याण वर्ष' के अंतर्गत राज्य सरकार सिंचाई, बिजली, सोलर पंप, भंडारण, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि-आधारित उद्योगों को बढ़ावा दे रही है। मोहन यादव ने बताया कि किसानों को नई सड़क परियोजनाओं के लिए उनकी ज़मीन का 4 गुना मुआवजा दिया जा रहा है, दिन में बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है और सोलर पंपों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसके साथ ही कृषि उपज के उचित मूल्य और उचित भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में भी काम जारी होने की जानकारी उन्होंने दी।
आय के अतिरिक्त स्रोत अपनाने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने किसानों से पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, फूलों की खेती, मत्स्य पालन और खाद्य प्रसंस्करण जैसी गतिविधियों को भी अपनाने का आह्वान किया, ताकि आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित हो सकें। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में कृषि आय में विविधीकरण को ज़रूरी माना जा रहा है।
सांची दुग्ध संघ और गौशाला सहायता
दुग्ध उत्पादन को मज़बूत आधार देने के लिए सांची दुग्ध संघ को और सशक्त बनाया जा रहा है। गौशालाओं के संचालन हेतु प्रति गौमाता प्रतिदिन आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। पशुपालन को और प्रोत्साहन देने के लिए प्रतियोगिताएँ और पुरस्कार योजनाएँ भी शुरू की जाएंगी।
आलू और प्याज की प्रोसेसिंग, भंडारण तथा फूड पार्क की स्थापना से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की कोशिश की जा रही है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश कृषि उत्पादन में शीर्ष राज्यों में शामिल है, लेकिन किसानों की शुद्ध आय राष्ट्रीय औसत से पीछे रहती है — यही कारण है कि ये बहुआयामी उपाय नीतिगत प्राथमिकता बने हुए हैं। सरकार की यह पहल आगामी महीनों में किसानों की ज़मीनी स्थिति पर कितना असर डालती है, यह देखना बाकी है।