मध्य प्रदेश: CM मोहन यादव का किसानों से वादा — ऋण राहत, मुआवजा बढ़ोतरी और MSP बोनस जारी रहेगा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 17 जून 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसानों के हित में सुधार और कल्याणकारी उपाय बिना रुके जारी रखेगी। उन्होंने कृषि ऋण चुकाने की समय-सीमा बढ़ाने और विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित भूमि पर मुआवजे में वृद्धि को सरकार की इस प्रतिबद्धता के ठोस उदाहरण के रूप में गिनाया।
बीकेएस प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात
भारतीय किसान संघ (बीकेएस) के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार देर रात भोपाल में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। बैठक में किसानों पर वित्तीय बोझ कम करने और उनकी आर्थिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उपायों पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने मूंग और उड़द की सरकारी खरीद, किसान पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने और नहरों व तालाबों के बेहतर समन्वय से सिंचाई अवसंरचना को मज़बूत करने के सुझाव रखे।
मुख्यमंत्री के अहम बयान
मुख्यमंत्री यादव ने बैठक में कहा, 'किसान कल्याण वर्ष सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि हमारी सरकार का संकल्प है। हम ऐसे फैसले लेते रहेंगे जिनसे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो और उन्हें ज्यादा सम्मान और बेहतर सुविधाएं मिलें।' उन्होंने यह भी कहा, 'हमारी कोशिश है कि सरकारी योजनाओं का फायदा किसानों तक सही ढंग से पहुंचे और खेती आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मुनाफे वाला और टिकाऊ पेशा बनी रहे।'
गेहूं खरीद में मध्य प्रदेश की उपलब्धि
बातचीत के दौरान अनाज खरीद में मध्य प्रदेश की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित किया गया। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, हाल ही में समाप्त हुए खरीद सीजन में राज्य ने 13.42 लाख किसानों से 104.36 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की। किसानों की संख्या के लिहाज से मध्य प्रदेश देशभर में पहले स्थान पर रहा, जबकि कुल खरीद मात्रा में यह पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर रहा।
MSP और बोनस भुगतान
किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर ₹40 प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस देकर ₹2,625 प्रति क्विंटल का मूल्य सुनिश्चित किया गया। सरकारी बयान के अनुसार, इस मद में ₹27,196 करोड़ से अधिक का भुगतान पहले ही किसानों के खातों में किया जा चुका है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में कृषि आय और MSP की पर्याप्तता को लेकर बहस जारी है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री यादव ने आश्वासन दिया कि सरकार किसान संगठनों के सुझावों को नीति-निर्माण में प्राथमिकता देगी और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान के लिए सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करती रहेगी। गौरतलब है कि मूंग-उड़द खरीद और सिंचाई सुधार जैसे मुद्दे अभी भी नीतिगत कार्रवाई की प्रतीक्षा में हैं।