27 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या असम और मध्य प्रदेश के बीच वन्यजीवों का आदान-प्रदान संभव है?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या असम और मध्य प्रदेश के बीच वन्यजीवों का आदान-प्रदान संभव है?

सारांश

मध्य प्रदेश और असम के बीच वन्यजीवों के अदला-बदली की योजना में बाघ, जंगली भैंस, और गैंडे शामिल हैं। यह पहल जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए की जा रही है। जानिए इस समझौते के पीछे की कहानी और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रयासों के बारे में।

मुख्य बातें

50 जंगली भैंसें असम से मध्य प्रदेश में लाईं जाएंगी।
एक जोड़ी गैंडे और तीन कोबरा भी भेजे जाएंगे।
कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसों का पुनर्स्थापना होगा।
मध्य प्रदेश को असम को बाघों और मगरमच्छों का आदान-प्रदान करना होगा।
इस पहल से जैव विविधता में सुधार होगा।

भोपाल, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश में वन्यजीवों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुवाहाटी में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से भेंट की। इस बैठक में दोनों राज्यों के बीच जंगली जानवरों के आपसी आदान-प्रदान पर सैद्धांतिक सहमति बनी।

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों राज्यों में जैव विविधता को मजबूत करना है, विशेषकर उन प्रजातियों को पुनर्स्थापित करना जो कुछ क्षेत्रों से पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं।

समझौते के अनुसार, असम अगले तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से 50 जंगली भैंसें मध्य प्रदेश को भेजेगा। इसके अतिरिक्त, एक जोड़ी एक सींग वाले गैंडे और तीन किंग कोबरा भी भेजे जाएंगे। इन जानवरों को पहले भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में रखा जाएगा, ताकि वे नए वातावरण में समायोजित हो सकें और लोग उन्हें देख सकें।

वहीं, जंगली भैंसों को उनके ऐतिहासिक आवास कान्हा टाइगर रिजर्व में पुनर्स्थापित किया जाएगा। इसके बदले में, मध्य प्रदेश असम को एक जोड़ी बाघ और छह मगरमच्छ देगा, जिससे असम में भी वन्यजीवों की विविधता बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए कहा, "मध्य प्रदेश में वन्य जीव और जैव विविधता को समृद्ध करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। मध्य प्रदेश से विलुप्त जंगली भैंस प्रजाति की पुनर्स्थापना होगी। असम से आगामी 3 वर्षों में 50 जंगली भैंस, एक जोड़ी गैंडा और तीन कोबरा लाए जाएंगे। कान्हा टाइगर रिजर्व में भैंसों का पुनर्स्थापना होगा। असम को मध्यप्रदेश से एक जोड़ी टाइगर और 6 मगरमच्छ प्रदान किए जाएंगे। गुवाहाटी प्रवास के दौरान असम के साथ वन्य जीवों के आदान-प्रदान को लेकर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ सैद्धांतिक सहमति बनी।"

डॉ. यादव ने इस पहल पर ज़ोर दिया कि यह क़दम कूनो नेशनल पार्क में चीतों को सफलतापूर्वक पुनर्स्थापित करने के बाद उठाया गया है, जो मध्य प्रदेश के संरक्षण प्रयासों को नई दिशा देगा।

मध्य प्रदेश पहले से ही ‘टाइगर स्टेट’ और ‘लेपर्ड स्टेट’ के रूप में जाना जाता है और अब उन प्रजातियों को भी वापस लाने का प्रयास किया जा रहा है, जो कभी यहां के जंगलों में पाई जाती थीं।

जंगली भैंस एक संकटग्रस्त प्रजाति है, जो लगभग सौ साल पहले मध्य प्रदेश से पूरी तरह समाप्त हो गई थी। वर्तमान में भारत में इनकी सबसे अधिक संख्या असम में, विशेषकर काजीरंगा और मानस राष्ट्रीय उद्यान में है। पूरी दुनिया में इनकी संख्या चार हजार से भी कम मानी जाती है।

देहरादून के वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की एक विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट में कान्हा टाइगर रिजर्व को जंगली जल भैंसों के पुनर्वास के लिए सबसे उपयुक्त बताया गया है। यहां पर्याप्त घास के मैदान, पानी के स्रोत, कम मानवीय दखल और अनुकूल प्राकृतिक वातावरण मौजूद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह कहना उचित होगा कि मध्य प्रदेश और असम के बीच इस प्रकार का समझौता न केवल दोनों राज्यों के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक सकारात्मक कदम है। यह वन्यजीवों के संरक्षण में एक नई दिशा प्रदान करेगा और जैव विविधता को बढ़ावा देगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस समझौते से क्या लाभ होगा?
इस समझौते से दोनों राज्यों में जैव विविधता बढ़ेगी और संकटग्रस्त प्रजातियों को पुनर्स्थापित करने में मदद मिलेगी।
क्या यह समझौता दीर्घकालिक है?
हाँ, यह समझौता तीन वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
कौन-कौन से जानवर आदान-प्रदान किए जाएंगे?
असम से 50 जंगली भैंसें, एक जोड़ी गैंडे और तीन कोबरा मध्य प्रदेश में लाए जाएंगे।
क्या मध्य प्रदेश में अन्य प्रजातियों की पुनर्स्थापना की जाएगी?
जी हाँ, मध्य प्रदेश में बाघों और मगरमच्छों की भी पुनर्स्थापना की जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य क्या है?
इस पहल का उद्देश्य वन्यजीवों की प्रजातियों को पुनर्स्थापित करना और जैव विविधता को बढ़ाना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले