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मध्य प्रदेश: प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलिफेंट और 94 गाँवों के पुनर्वास के लिए ₹2,381 करोड़ स्वीकृत

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मध्य प्रदेश: प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलिफेंट और 94 गाँवों के पुनर्वास के लिए ₹2,381 करोड़ स्वीकृत

सारांश

मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद ने 16 जून को ₹24,200 करोड़ के प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिसमें वन्यजीव संरक्षण और 94 गाँवों के पुनर्वास के लिए ₹2,381 करोड़ शामिल हैं। यह राशि 2026-2031 की अवधि के लिए टाइगर रिजर्व, कूनो और गांधीसागर अभयारण्य में खर्च होगी।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में 16 जून 2026 को हुई मंत्रिपरिषद बैठक में ₹24,200 करोड़ के प्रस्ताव स्वीकृत।
प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलिफेंट और ग्राम पुनर्वास के लिए ₹2,381 करोड़ 15 लाख आवंटित; अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 ।
टाइगर-एलिफेंट संरक्षण की तीन श्रेणियों के लिए ₹1,131 करोड़ 15 लाख ; कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर अभयारण्य सहित टाइगर रिजर्व लाभान्वित।
94 गाँवों के पुनर्वास एवं मुआवजे के लिए ₹1,250 करोड़ ; 7 संरक्षित क्षेत्रों में क्रियान्वयन।
इंदौर मेट्रो रेल परियोजना का पुनरीक्षित बजट ₹19,472 करोड़ 29 लाख स्वीकृत।
जनजातीय विद्यार्थियों के लिए ₹687 करोड़ और रेशम उत्पादन योजनाओं के लिए ₹639 करोड़ 25 लाख मंजूर।

मध्य प्रदेश सरकार ने मंगलवार, 16 जून 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद बैठक में वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण पुनर्वास की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ₹2,381 करोड़ 15 लाख की स्वीकृति दी। यह राशि 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक यानी पाँच वर्षों के लिए आवंटित की गई है। इस बैठक में कुल ₹24,200 करोड़ के प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई।

प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलिफेंट के लिए क्या मंजूर हुआ

मंत्रिपरिषद ने वन विभाग के अंतर्गत प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलिफेंट की तीन श्रेणियों — नॉन-रिकरिंग, रिकरिंग और प्रोजेक्ट एलिफेंट — के लिए ₹1,131 करोड़ 15 लाख की स्वीकृति दी है। इन योजनाओं के तहत वन्यप्राणी संरक्षण के वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित प्रबंध योजना लागू की जाएगी।

इसमें प्रदेश के टाइगर रिजर्व, कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर अभयारण्य में हैबीटेट सुधार, अग्नि एवं वन सुरक्षा, जल स्रोतों का विकास, वन मार्गों का रखरखाव, आवश्यक संरचनाओं का निर्माण, हाथियों का प्रबंधन एवं सुरक्षा, रेस्क्यू सामग्री क्रय, कैंप निर्माण तथा हाथियों के लिए भोजन व्यवस्था जैसे कार्य किए जाएंगे।

94 गाँवों के पुनर्वास के लिए ₹1,250 करोड़

संरक्षित वन क्षेत्रों में वन्यजीवों के संवेदनशील आवास स्थलों को प्रभावित कर रहे 94 गाँवों को वन क्षेत्र के बाहर पुनर्वासित करने के लिए ₹1,250 करोड़ की स्वीकृति दी गई है। इस योजना के तहत ग्रामीणों की अचल संपत्ति का विधि अनुसार अधिग्रहण कर निर्धारित मुआवजा दिया जाएगा।

यह योजना संजय टाइगर रिजर्व, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, पन्ना टाइगर रिजर्व, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, रातापानी टाइगर रिजर्व, ओरछा अभयारण्य और कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आने वाले गाँवों में क्रियान्वित की जाएगी।

अन्य प्रमुख निर्णय

इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण सहित कुल ₹19,472 करोड़ 29 लाख का पुनरीक्षित बजट स्वीकृत किया गया। जनजातीय विद्यार्थियों की शैक्षणिक एवं आवासीय सुविधाओं के लिए ₹687 करोड़ और रेशम उत्पादन की विभिन्न योजनाओं के लिए ₹639 करोड़ 25 लाख की मंजूरी दी गई।

राज्य में विश्वस्तरीय सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए 'मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026' के प्रस्ताव पर मंत्रिपरिषद ने पाँच सदस्यीय मंत्रिमंडल उप-समिति गठित की है, जो सभी पहलुओं का अध्ययन कर रिपोर्ट सौंपेगी। रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स मॉडल पर संचालित करने का पायलट प्रोजेक्ट भी स्वीकृत हुआ।

आम जनता और वन्यजीवों पर असर

94 गाँवों के विस्थापन से प्रभावित ग्रामीणों को कानूनी प्रक्रिया के तहत मुआवजा मिलेगा, जबकि संरक्षित क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष कम होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश देश में सर्वाधिक बाघों वाला राज्य है, और यह निवेश उस स्थिति को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

आने वाले पाँच वर्षों में इन योजनाओं के क्रियान्वयन से प्रदेश के वन्यजीव पर्यटन और स्थानीय रोज़गार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

381 करोड़ का यह आवंटन संख्या में प्रभावशाली है, लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — मध्य प्रदेश में टाइगर रिजर्व से ग्रामीणों का पुनर्वास दशकों से लंबित है और अदालतों में भी इस पर सवाल उठते रहे हैं। 94 गाँवों को विस्थापित करना सामाजिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से संवेदनशील काम है; मुआवजे की पर्याप्तता और पुनर्वास स्थलों की गुणवत्ता पर निगरानी ज़रूरी है। वन्यजीव संरक्षण और आदिवासी अधिकारों के बीच यह तनाव नया नहीं है, और बिना पारदर्शी सामुदायिक सहमति के यह योजना भविष्य में विवादों को जन्म दे सकती है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलिफेंट के लिए कितनी राशि स्वीकृत हुई है?
मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद ने 16 जून 2026 को प्रोजेक्ट टाइगर एंड एलिफेंट की तीन श्रेणियों के लिए ₹1,131 करोड़ 15 लाख और 94 गाँवों के पुनर्वास के लिए ₹1,250 करोड़ सहित कुल ₹2,381 करोड़ 15 लाख स्वीकृत किए हैं। यह राशि 16वें केंद्रीय वित्त आयोग की अवधि 2026-2031 के लिए आवंटित है।
किन टाइगर रिजर्व और अभयारण्यों में यह योजना लागू होगी?
यह योजना संजय टाइगर रिजर्व, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, पन्ना टाइगर रिजर्व, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, रातापानी टाइगर रिजर्व, ओरछा अभयारण्य और कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आने वाले 94 गाँवों में क्रियान्वित होगी। गांधीसागर अभयारण्य में भी हाथी प्रबंधन कार्य शामिल हैं।
94 गाँवों के विस्थापित ग्रामीणों को क्या मिलेगा?
योजना के अनुसार ग्रामीणों की अचल संपत्ति का विधि अनुसार अधिग्रहण कर निर्धारित मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए ₹1,250 करोड़ आवंटित किए गए हैं और उद्देश्य यह है कि वन्यजीवों के संवेदनशील आवास स्थलों को प्रभावित करने वाले गाँवों को संरक्षित वन क्षेत्र के बाहर पुनर्वासित किया जाए।
मंत्रिपरिषद बैठक में और कौन-से बड़े फैसले लिए गए?
बैठक में इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के लिए ₹19,472 करोड़ 29 लाख का पुनरीक्षित बजट, जनजातीय विद्यार्थियों के लिए ₹687 करोड़ और रेशम उत्पादन योजनाओं के लिए ₹639 करोड़ 25 लाख भी स्वीकृत किए गए। 'मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026' के अध्ययन के लिए पाँच सदस्यीय मंत्रिमंडल उप-समिति भी गठित की गई।
प्रोजेक्ट एलिफेंट के तहत हाथियों के लिए क्या कार्य होंगे?
प्रोजेक्ट एलिफेंट के अंतर्गत हाथियों का प्रबंधन एवं सुरक्षा, रेस्क्यू सामग्री क्रय, कैंप निर्माण, दवाइयाँ खरीद और हाथियों के लिए भोजन व्यवस्था जैसे कार्य किए जाएंगे। मुख्यतः कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधीसागर अभयारण्य में ये गतिविधियाँ संचालित होंगी।
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