मध्य प्रदेश मंत्रिपरिषद का बड़ा फैसला: ₹26,800 करोड़ की विकास योजनाओं को हरी झंडी, छात्रवृत्ति 6 गुना बढ़ी
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 28 अप्रैल 2026 को मंत्रिपरिषद ने ₹26,800 करोड़ से अधिक की विकास योजनाओं को स्वीकृति दी।
- लोक निर्माण विभाग को 2026-2031 की अवधि के लिए ₹26,311 करोड़ की स्वीकृति, जिसमें सड़क नवीनीकरण, कार्यालय स्थापना और भू-अर्जन मुआवजा शामिल।
- दिल्ली के उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों की मासिक छात्रवृत्ति ₹1,550 से बढ़ाकर ₹10,000 की गई; प्रतिवर्ष 100 नए विद्यार्थी लाभान्वित होंगे।
- शाजापुर की लखुंदर सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को ₹155 करोड़ 82 लाख की स्वीकृति; 24 ग्रामों में 9,200 हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ मिलेगा।
- गांधी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल और श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा के विस्तार के लिए पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृतियाँ प्रदान की गईं।
- प्रदेश की 38,901 विद्युतविहीन आंगनबाड़ियों के विद्युतीकरण के लिए ₹80 करोड़ 41 लाख की स्वीकृति, 2026-27 से 2030-31 तक क्रियान्वयन।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्य प्रदेश मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को भोपाल स्थित मंत्रालय में सम्पन्न हुई। इस बैठक में प्रदेश के सर्वांगीण विकास और जन-कल्याण के लिए ₹26,800 करोड़ से अधिक की महत्वपूर्ण योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई। बुनियादी ढाँचे, ग्रामीण सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और आंगनबाड़ी विद्युतीकरण — इन पाँच प्रमुख क्षेत्रों में यह निर्णय प्रदेश की विकास नीति का व्यापक खाका प्रस्तुत करते हैं।
लोक निर्माण विभाग को ₹26,311 करोड़ की स्वीकृति
प्रदेश के बुनियादी ढाँचे को सुदृढ़ करने की दिशा में मंत्रि-परिषद ने लोक निर्माण विभाग (PWD) की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की विभिन्न निर्माण एवं नवीनीकरण परियोजनाओं के लिए ₹26,311 करोड़ की स्वीकृति दी। यह राशि 16वें वित्त आयोग की निर्धारित अवधि के अंतर्गत जारी की जाएगी।
स्वीकृत राशि का विवरण इस प्रकार है: मुख्यालय, मण्डल और संभागीय कार्यालय स्थापना, अनुरक्षण एवं मरम्मत के लिए ₹6,180 करोड़ 57 लाख; केंद्रीय सड़क अधोसंरचना निधि योजनाओं के लिए ₹6,925 करोड़; एफ-टाइप से उच्च श्रेणी के शासकीय आवासों एवं गैर-आवासीय भवनों के अनुरक्षण के लिए ₹1,680 करोड़; भू-अर्जन मुआवजे के लिए ₹6,500 करोड़; मुख्य जिला मार्गों एवं अन्य जिला मार्गों के नवीनीकरण के लिए ₹5,000 करोड़; तथा भारतीय सड़क कांग्रेस को अनुदान एवं डिक्रीधन भुगतान के लिए ₹25 करोड़ 50 लाख।
पिछड़ा वर्ग छात्रवृत्ति में ऐतिहासिक वृद्धि
सामाजिक न्याय और उच्च शिक्षा को प्रोत्साहन देने की दिशा में मंत्रि-परिषद ने पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की छात्रगृह योजना-2005 में संशोधन को मंजूरी दी। इसके तहत दिल्ली के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे मध्य प्रदेश के पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों की मासिक छात्रवृत्ति ₹1,550 से बढ़ाकर ₹10,000 प्रतिमाह कर दी गई है — यानी लगभग 6 गुना की वृद्धि।
अब हर वर्ष कुल 100 नए विद्यार्थी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे, जिसमें 50 सीटें स्नातक और 50 सीटें स्नातकोत्तर स्तर के लिए निर्धारित की गई हैं। पहले से लाभान्वित विद्यार्थियों को उनके कोर्स की अवधि पूरी होने तक सहायता मिलती रहेगी। योजना का लाभ लेने के लिए विद्यार्थी का पिछड़ा वर्ग पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए पात्र होना और अभिभावकों की वार्षिक आय सरकार द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर होना अनिवार्य है।
शाजापुर में लखुंदर सूक्ष्म सिंचाई परियोजना को मंजूरी
ग्रामीण कृषि को सशक्त बनाने के लिए मंत्रि-परिषद ने शाजापुर जिले की लखुंदर उच्च दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के लिए ₹155 करोड़ 82 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की। इस परियोजना से शाजापुर तहसील के 17 ग्राम और उज्जैन जिले की तराना तहसील के 7 ग्राम — कुल 24 ग्रामों में 9,200 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।
परियोजना के अंतर्गत लखुंदर नदी पर मक्सी के समीप पूर्व में निर्मित जलाशय से 24.37 मीट्रिक घन मीटर जल का उद्वहन कर सिंचाई सुविधा प्रदान की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश के कई जिलों में किसान सिंचाई जल की अनियमित उपलब्धता से जूझ रहे हैं।
भोपाल और रीवा के मेडिकल कॉलेजों के लिए पुनरीक्षित स्वीकृति
चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए दो बड़े निर्णय लिए गए। गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, भोपाल में रेडियोथेरेपी विभाग की ओपीडी, लीनियक मशीन बंकर, बोनमैरो ट्रांसप्लांट यूनिट और कैथलैब के निर्माण के लिए ₹14 करोड़ 8 लाख की कार्योत्तर स्वीकृति के साथ ₹79 करोड़ 16 लाख की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी गई।
वहीं, श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल विस्तार के लिए निर्माण लागत को ₹164 करोड़ 49 लाख से बढ़ाकर ₹174 करोड़ 80 लाख की पुनरीक्षित स्वीकृति प्रदान की गई। गौरतलब है कि रीवा विंध्य क्षेत्र का प्रमुख चिकित्सा केंद्र है और यहाँ उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं की दीर्घकालिक माँग रही है।
38,901 आंगनबाड़ियों में विद्युतीकरण का लक्ष्य
महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत प्रदेश की 38,901 विद्युतविहीन आंगनबाड़ी भवनों में बाह्य विद्युतीकरण के लिए ₹80 करोड़ 41 लाख की स्वीकृति दी गई। यह योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक क्रियान्वित होगी।
प्रदेश में कुल 97,882 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें से 38,901 भवन अभी भी बिजली से वंचित हैं। विद्युतीकरण के बाद इन केंद्रों में ट्यूबलाइट, पंखा, कूलर, स्मार्ट टीवी और वॉटर प्यूरीफायर जैसी सुविधाएँ सुचारू रूप से उपयोग में आ सकेंगी, जिससे बच्चों की शालापूर्व शिक्षा और पोषण सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार अपेक्षित है। आगामी महीनों में इन योजनाओं के क्रियान्वयन की गति ही तय करेगी कि ये स्वीकृतियाँ ज़मीन पर कितना बदलाव ला पाती हैं।