वाईएसआरसीपी नेता पुडी श्रीहरि फिर गिरफ्तार: CM नायडू पर आपत्तिजनक पोस्ट मामले में बेंगलुरु से हुई गिरफ्तारी
सारांश
Key Takeaways
- पुडी श्रीहरि को 29 अप्रैल को बेंगलुरु से कुप्पम टाउन पुलिस ने दूसरी बार गिरफ्तार किया।
- उन पर CM चंद्रबाबू नायडू की मॉर्फ्ड तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट करने का आरोप है।
- पहली गिरफ्तारी 15 अप्रैल को विजयवाड़ा में हुई थी; 16 अप्रैल को ट्रायल कोर्ट ने रिमांड माँग खारिज कर दी थी।
- आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई; सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप से इनकार किया।
- श्रीहरि ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने संबंधित सामग्री न बनाई, न पोस्ट की, न साझा की।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के महासचिव (मीडिया) पुडी श्रीहरि को 29 अप्रैल को बेंगलुरु से दोबारा गिरफ्तार किया गया। कुप्पम टाउन पुलिस ने यह कार्रवाई मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू को निशाना बनाकर कथित तौर पर की गई आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में की। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कुप्पम लाया जा रहा है।
मामले का घटनाक्रम
15 अप्रैल को श्रीहरि को पहली बार विजयवाड़ा में गिरफ्तार किया गया था। उन पर मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की मॉर्फ्ड तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट करने का आरोप है। इसके बाद उन्हें कुप्पम ले जाया गया, जहाँ उनके और वाईएसआरसीपी के एक अन्य पदाधिकारी गिरीश कुमार रेड्डी के खिलाफ अलग से मामला दर्ज किया गया था।
16 अप्रैल को ट्रायल कोर्ट में पेश किए जाने पर अदालत ने पुलिस की न्यायिक हिरासत में भेजने की माँग खारिज कर दी और श्रीहरि को रिहा कर दिया गया। इसके बाद आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार
हाईकोर्ट के आदेश के बाद गिरफ्तारी की आशंका से श्रीहरि ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया। हालाँकि, शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। यह गिरफ्तारी उसी फैसले के एक दिन बाद हुई।
श्रीहरि की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एस. निरंजन रेड्डी ने कहा कि पुलिस ने उनके खिलाफ झूठे साक्ष्य तैयार किए हैं और हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान बताई गई विसंगतियों पर विचार नहीं किया। वहीं राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि किसी अंतरिम आदेश की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई पहले से कर रहा है।
श्रीहरि का पक्ष
श्रीहरि ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने संबंधित सामग्री न तो बनाई, न पोस्ट की और न ही आगे साझा की। उन्होंने यह भी कहा कि वह 25 वर्षों तक वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं और हमेशा कानून की सीमाओं के भीतर काम किया है।
श्रीहरि पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी के कार्यकाल में मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO) भी रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेता बनने के बाद भी उन्होंने पत्रकारिता की नैतिकता और कानून का सम्मान बनाए रखा है।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में होनी है। गौरतलब है कि यह मामला राज्य में सत्तारूढ़ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) और विपक्षी वाईएसआरसीपी के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि में सामने आया है। इस मामले का अगला घटनाक्रम हाईकोर्ट की सुनवाई पर निर्भर करेगा।