केरल सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी बी. अशोक को निलंबित किया, चुनाव नतीजों से पहले विवाद गहराया
सारांश
Key Takeaways
- केरल सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी बी. अशोक को 29 अप्रैल 2026 को निलंबित किया।
- अशोक सैनिक कल्याण विभाग में प्रधान सचिव के पद पर तैनात थे।
- आरोप है कि उन्होंने मीडिया में सरकारी नीतियों की आलोचना कर सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन किया।
- यह कार्रवाई 4 मई को विधानसभा चुनाव नतीजे घोषित होने से ठीक पहले हुई।
- पहले से निलंबित IAS अधिकारी एन. प्रशांत ने इसे सच बोलने की सजा बताया।
- CAT पहले अशोक के पक्ष में दो अलग-अलग मामलों में फैसला दे चुका है।
केरल सरकार ने वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी बी. अशोक को बुधवार, 29 अप्रैल 2026 को निलंबित कर दिया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू है और 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने वाले हैं। निलंबन के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है।
निलंबन के पीछे क्या है कारण
सैनिक कल्याण विभाग में प्रधान सचिव के पद पर तैनात बी. अशोक पर आरोप है कि उन्होंने मीडिया से बातचीत में सरकारी नीतियों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली की सार्वजनिक आलोचना की, जो सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन माना गया। राज्य सरकार का कहना है कि उनकी सार्वजनिक टिप्पणियाँ सिविल सेवा आचरण नियमों के विरुद्ध थीं।
हाल के दिनों में अशोक ने मीडिया के समक्ष शासन व्यवस्था की कमियों को उजागर किया था, जिससे सरकार असहज स्थिति में आ गई थी। निलंबन के तुरंत बाद बी. अशोक ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके खिलाफ नियमों की अनदेखी कर कार्रवाई की गई है।
बी. अशोक और सरकार के बीच पुराना तनाव
बी. अशोक और केरल राज्य सरकार के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण संबंध रहे हैं। केरल राज्य बिजली बोर्ड के अध्यक्ष और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने कई बार ऐसे निर्णय लिए जो सरकार की आधिकारिक लाइन से अलग माने गए।
इससे पहले कृषि विभाग से उनका तबादला भी राजनीतिक गलियारों में दंडात्मक कार्रवाई के रूप में देखा गया था। अशोक ने उस तबादले को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) में चुनौती दी थी और उनके पक्ष में फैसला आया था। एक अन्य मामले में भी CAT ने उनकी याचिका पर फैसला देते हुए कहा था कि राज्य के कैडर पदों पर केवल IAS अधिकारियों की नियुक्ति हो सकती है।
पहले से निलंबित IAS अधिकारी की प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर पहले से निलंबित IAS अधिकारी एन. प्रशांत ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,