मध्य प्रदेश कैबिनेट ने ₹41,000 करोड़ की परियोजनाओं को दी मंजूरी, तीन नई टेक यूनिवर्सिटी और किसान राहत शामिल
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में मध्य प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार, 1 सितंबर को राज्य के बुनियादी ढाँचे, ग्रामीण रोज़गार, स्वास्थ्य और तकनीकी शिक्षा को मज़बूत करने के लिए कुल ₹41,000 करोड़ की परियोजनाओं और योजनाओं पर मुहर लगाई। लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह ने बैठक के निर्णयों की विस्तृत जानकारी मीडिया को दी।
ग्रामीण रोज़गार मिशन को सबसे बड़ा आवंटन
कैबिनेट के सबसे बड़े फ़ैसले के तहत 'विकसित भारत — गारंटी फॉर रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)', जिसे वीबी जीरामजी स्कीम भी कहा जाता है, के क्रियान्वयन के लिए ₹29,619 करोड़ स्वीकृत किए गए। यह राशि पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से वितरित होगी, जिसमें केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में वित्त पोषण होगा। राज्य का हिस्सा लगभग ₹10,574 करोड़ रहेगा। शिकायत निवारण को पारदर्शी बनाने के लिए प्रत्येक जिले में एक लोकपाल की नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है।
डेयरी क्षेत्र और किसानों को राहत
दूध उत्पादकों के लिए ₹2,973 करोड़ का आवंटन किया गया है, जिसमें से ₹1,547 करोड़ विभिन्न डेयरी उत्पादों की प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के लिए निर्धारित हैं। किसानों को एक और बड़ी राहत देते हुए कैबिनेट ने समर्थन मूल्य पर गर्मियों की मूंग की खरीद सीमा उत्पादन के 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का निर्णय लिया। मंत्री राकेश सिंह ने कहा, 'किसानों को कोई परेशानी नहीं होगी क्योंकि खरीद लक्ष्य के दायरे में ही रहेगी।'
स्वास्थ्य और आयुष विभाग में निवेश
जन स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग की चल रही योजनाओं को जारी रखने की स्वीकृति दी गई। विभागीय संपत्तियों के रखरखाव के लिए ₹915.77 करोड़ और मशीनरी व उपकरणों के रखरखाव के लिए ₹488.41 करोड़ मंजूर किए गए। इसके साथ ही नवगठित जिलों — निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर — में जिला आयुष अधिकारी कार्यालयों के लिए लगभग 20 पद सृजित करने की भी स्वीकृति मिली। इन्हीं चार जिलों में सामाजिक न्याय कार्यालयों के लिए प्रत्येक जिले में 15 नियमित पद और 2 क्लास-IV पद भी स्वीकृत किए गए।
तकनीकी शिक्षा का विस्तार: RGPV का पुनर्गठन
कैबिनेट के सर्वाधिक चर्चित निर्णयों में राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के पुनर्गठन की घोषणा रही। वर्तमान में RGPV 585 संस्थानों में 13 पाठ्यक्रम संचालित करता है, जिनमें 3.83 लाख से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। भौगोलिक पहुँच और शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री के सुझाव पर तीन नई प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालयों की स्थापना को हरी झंडी दी गई:
भोपाल में 'सेंट्रल इंडिया यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड स्किल्स' — जिसके अंतर्गत भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग आएंगे। उज्जैन में 'मालवा यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी' — उज्जैन और इंदौर संभाग को कवर करेगी। जबलपुर में 'महाकौशल यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड स्किल्स' — जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के लिए।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश सरकार 'विकसित मध्य प्रदेश' के एजेंडे के तहत ग्रामीण आजीविका, कृषि सहायता और उच्च शिक्षा को एक साथ प्राथमिकता दे रही है। गौरतलब है कि नई टेक यूनिवर्सिटियों की स्थापना और लोकपाल तंत्र जैसे संरचनात्मक बदलाव योजनाओं की दीर्घकालिक सफलता का परीक्षण करेंगे। क्रियान्वयन की समयसीमा और विस्तृत दिशानिर्देश आने वाले हफ्तों में अपेक्षित हैं।