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सीएम सुवेंदु अधिकारी का मीडिया को संदेश: आलोचना स्वीकार, राष्ट्रीय सुरक्षा पर संवेदनशीलता ज़रूरी

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सीएम सुवेंदु अधिकारी का मीडिया को संदेश: आलोचना स्वीकार, राष्ट्रीय सुरक्षा पर संवेदनशीलता ज़रूरी

सारांश

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मीडिया को आलोचना की खुली छूट दी — लेकिन साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा और धार्मिक भावनाओं पर संवेदनशीलता की शर्त भी जोड़ी। रिटायर्ड पत्रकारों के लिए नई पेंशन योजना की घोषणा के साथ यह बयान राज्य में मीडिया-सरकार संबंधों को नई परिभाषा देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

सीएम सुवेंदु अधिकारी ने 1 सितंबर को कोलकाता सचिवालय में मीडिया को सरकार और पार्टी की आलोचना की पूरी आज़ादी देने का आश्वासन दिया।
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि तीखी आलोचना पर भी वे या उनकी सरकार पत्रकारों के प्रति बदले की भावना नहीं रखेगी।
मुख्यमंत्री ने मीडिया से राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग में संवेदनशीलता बरतने की अपील की।
रिटायर्ड पत्रकारों के लिए नई पेंशन योजनाओं की घोषणा की गई।
अधिकारी ने उपभोक्ता अधिकार संरक्षण सप्ताह में पिछली लेफ्ट फ्रंट और TMC सरकारों पर उपभोक्ता विभाग की अनदेखी का आरोप लगाया।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मंगलवार, 1 सितंबर को कोलकाता स्थित सचिवालय में मीडियाकर्मियों को स्पष्ट संदेश दिया कि राज्य सरकार या उनकी पार्टी की कितनी भी तीखी आलोचना हो, वे पत्रकारों के प्रति कभी बदले की भावना नहीं रखेंगे। साथ ही उन्होंने मीडिया से अपील की कि राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद से जुड़े विषयों पर रिपोर्टिंग में विशेष सावधानी बरती जाए।

मुख्यमंत्री का मीडिया को खुला आश्वासन

रिटायर्ड पत्रकारों के लिए नई पेंशन योजनाओं की घोषणा के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अधिकारी ने कहा, 'आप राज्य सरकार और मेरी आलोचना करने के लिए आज़ाद हैं। आप मेरे बयानों और मेरी पार्टी की आलोचना कर सकते हैं। मैं उन आलोचनाओं को विनम्रता से स्वीकार करूँगा और इसके लिए कभी बदले की भावना नहीं रखूँगा।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में पत्रकारों पर दबाव और सरकारी प्रतिक्रिया को लेकर बहस जारी है। अधिकारी ने प्रेस की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का अनिवार्य स्तंभ बताया।

राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रवाद पर संवेदनशीलता की अपील

मुख्यमंत्री ने मीडिया से आग्रह किया कि जायज़ आलोचना और ऐसी कवरेज के बीच की सीमा का ध्यान रखा जाए, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रीय हित और देश सभी के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसा कुछ भी नहीं किया जाना चाहिए जिससे देश कमज़ोर हो या अस्थिरता पैदा हो।'

गौरतलब है कि अधिकारी ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में बंगाल की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए इस जिम्मेदारी को और व्यापक संदर्भ में रखा।

धार्मिक भावनाओं पर सावधानी का आग्रह

मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से यह भी कहा कि ऐसी टिप्पणियाँ या शब्दों के प्रयोग से बचा जाए जिनसे धार्मिक भावनाएँ आहत हो सकती हैं। उन्होंने कहा, 'अभिव्यक्ति की आज़ादी एक मौलिक सिद्धांत है, लेकिन सरकार और मीडिया दोनों की यह जिम्मेदारी है कि धार्मिक भावनाएँ बेवजह आहत न हों।'

अधिकारी ने दावा किया कि उनकी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद से किसी भी समुदाय को धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने से नहीं रोका है। उन्होंने कहा, 'कोई भी मीडिया हाउस ऐसा उदाहरण नहीं दे सकता जिसमें हमने किसी समुदाय को अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करने से रोका हो।'

उपभोक्ता संरक्षण पर सरकार की प्रतिबद्धता

'उपभोक्ता अधिकार संरक्षण सप्ताह' के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली लेफ्ट फ्रंट और तृणमूल कांग्रेस (TMC) दोनों सरकारों के कार्यकाल में उपभोक्ता मामलों के विभाग की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि संस्थागत भ्रष्टाचार के कारण खरीदार और विक्रेता, दोनों ही ठगे जा रहे थे।

अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार इस विभाग को मज़बूत करने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए इसे और अधिक प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

आगे क्या

रिटायर्ड पत्रकारों के लिए घोषित नई पेंशन योजनाओं का ब्यौरा और उनकी क्रियान्वयन समयसीमा अभी सरकार की ओर से स्पष्ट की जानी बाकी है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राज्य में मीडिया-सरकार संबंधों की दिशा पर नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'राष्ट्रीय सुरक्षा' और 'धार्मिक भावनाओं' की अपील एक ऐसी अस्पष्ट सीमा खींचती है जिसे सरकारें ऐतिहासिक रूप से मीडिया पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल करती रही हैं। आलोचना की 'आज़ादी' और उस पर लगाई गई अनकही शर्तें — दोनों एक साथ — यह सवाल उठाती हैं कि व्यवहार में यह संतुलन कैसे बनेगा। रिटायर्ड पत्रकारों के लिए पेंशन योजना एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन मीडिया की स्वतंत्रता की असली परीक्षा घोषणाओं से नहीं, बल्कि उन क्षणों में होती है जब कवरेज सत्ता के लिए असुविधाजनक हो।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएम सुवेंदु अधिकारी ने मीडिया को लेकर क्या कहा?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 1 सितंबर को कोलकाता में कहा कि सरकार या उनकी पार्टी की कितनी भी तीखी आलोचना हो, वे पत्रकारों के प्रति बदले की भावना नहीं रखेंगे। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और धार्मिक भावनाओं से जुड़े विषयों पर संवेदनशीलता बरतने की अपील की।
पश्चिम बंगाल में रिटायर्ड पत्रकारों के लिए क्या घोषणा हुई?
सीएम अधिकारी ने रिटायर्ड पत्रकारों के लिए नई पेंशन योजनाओं की घोषणा की। इन योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा और क्रियान्वयन की समयसीमा सरकार की ओर से अभी जारी की जानी बाकी है।
अधिकारी ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर मीडिया से क्या अपील की?
उन्होंने मीडियाकर्मियों से कहा कि जायज़ आलोचना और ऐसी कवरेज के बीच की सीमा का ध्यान रखें जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित सभी के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए और ऐसा कुछ नहीं होना चाहिए जिससे देश कमज़ोर हो।
उपभोक्ता अधिकार संरक्षण पर अधिकारी सरकार का क्या रुख है?
सीएम अधिकारी ने 'उपभोक्ता अधिकार संरक्षण सप्ताह' के उद्घाटन पर कहा कि पिछली लेफ्ट फ्रंट और TMC सरकारों ने उपभोक्ता मामलों के विभाग की अनदेखी की और भ्रष्टाचार के कारण खरीदार व विक्रेता दोनों ठगे जाते रहे। उनकी सरकार इस विभाग को मज़बूत और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
क्या अधिकारी सरकार ने किसी धार्मिक समुदाय पर प्रतिबंध लगाया है?
मुख्यमंत्री अधिकारी ने दावा किया कि उनकी सरकार ने सत्ता संभालने के बाद से किसी भी समुदाय को धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने से नहीं रोका है। उन्होंने कहा कि कोई भी मीडिया हाउस इसका कोई उदाहरण नहीं दे सकता।
राष्ट्र प्रेस
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