सुवेंदु अधिकारी ने सुरक्षा चिंताओं को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की

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सुवेंदु अधिकारी ने सुरक्षा चिंताओं को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की

सारांश

सुवेंदु अधिकारी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने राज्य पुलिस पर सुरक्षा की कमी का आरोप लगाया है। क्या इस मामले में न्याय मिलेगा?

Key Takeaways

  • सुवेंदु अधिकारी ने सुरक्षा की कमी पर सवाल उठाया।
  • राज्य पुलिस पर सतर्कता की कमी का आरोप।
  • कोलकाता में बीएलओ के विरोध प्रदर्शन से उत्पन्न तनाव।
  • कलकत्ता हाईकोर्ट में पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन लंबित है।
  • अधिकारी की सुरक्षा चिंताओं पर नई याचिका दायर की गई।

कोलकाता, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने बुधवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताओं को उठाया। उन्होंने राज्य पुलिस अधिकारियों पर सुरक्षा और सतर्कता की कमी का आरोप लगाया।

उनके अधिवक्ता ने चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की डिवीजन बेंच के समक्ष मामला प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि राज्य पुलिस मौजूदा धमकियों और हालिया घटनाओं के बावजूद विपक्ष के नेता की सुरक्षा सुनिश्चित करने में असफल रही है।

इसके बाद, वकील ने सुवेंदु अधिकारी की सुरक्षा पर उचित निर्देश देने के लिए डिवीजन बेंच के समक्ष एक औपचारिक याचिका दायर की।

अधिकारी का यह कदम कोलकाता में मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के बाहर बीएलओ के एक समूह द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के एक दिन बाद उठाया गया।

विरोध के दौरान, पुलिस की मौजूदगी में अधिकारी पर जूते फेंके गए, और उनके वकील के अनुसार, पुलिस इस स्थिति को नियंत्रित करने या घटना को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने में विफल रही। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि सीईओ के कार्यालय के सामने विपक्ष के नेता के खिलाफ हुए विरोध और धक्का-मुक्की के बावजूद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई नहीं की।

डिवीजन बेंच ने याचिका दायर करने की अनुमति दे दी और इस मामले पर विचार करने के लिए सहमत हो गई, जिस पर इस सप्ताह के अंत में सुनवाई होने की संभावना है।

मंगलवार को, सेंट्रल कोलकाता में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर उस समय तनाव बढ़ गया, जब अधिकारी के डेप्युटेशन जमा करने के दौरे के दौरान प्रदर्शन कर रहे बूथ-स्तर अधिकारी वहां एकत्र हो गए।

इस घटना के बाद, अधिकारी ने प्रदर्शन कर रहे बीएलओ की कड़ी आलोचना की और शामिल लोगों के व्यवहार पर अपनी नाराजगी व्यक्त की।

यह उल्लेखनीय है कि विपक्ष के नेता की सुरक्षा से संबंधित एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (पीआईएल) पहले से ही कलकत्ता हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस की बेंच के समक्ष विचाराधीन है।

पीआईएल में यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई है कि राजनीतिक कार्यकर्ता और समर्थक पब्लिक प्रोग्राम या आधिकारिक कार्यों के दौरान विपक्ष के नेता के करीब न आएं, ताकि उनकी सुरक्षा में कोई बाधा न आए।

पेंडिंग पीआईएल के अलावा, अधिकारी की नई याचिका में हालिया हुए प्रदर्शन की घटना और सुरक्षा इंतजाम में कथित कमी के प्रति विशेष चिंता व्यक्त की गई है।

इससे पहले, अधिकारी ने वेस्ट मिदनापुर जिले के चंद्रकोना में अपने काफिले पर बदमाशों के हमले के बाद भी कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

उस मामले में, अधिकारी ने अदालत को बताया कि हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज कर लिया था। इसके बाद, जस्टिस शुभ्रा घोष ने एक अंतरिम आदेश पारित कर अधिकारियों को उस केस के सिलसिले में विपक्ष के नेता के खिलाफ कोई भी जबरदस्ती कार्रवाई करने से रोक दिया था।

Point of View

यह स्पष्ट है कि सुवेंदु अधिकारी की सुरक्षा चिंता केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राजनीतिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है। राज्य पुलिस की कार्रवाई और विपक्ष का अधिकार, दोनों ही सवाल उठाते हैं।
NationPress
27/02/2026

Frequently Asked Questions

सुवेंदु अधिकारी ने किस कारण से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया?
उन्होंने अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और राज्य पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए।
क्या बीएलओ का प्रदर्शन सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है?
हाँ, प्रदर्शन के दौरान सुवेंदु अधिकारी पर जूते फेंके गए, जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
कलकत्ता हाईकोर्ट में मामला कब सुनवाई के लिए आएगा?
इस सप्ताह के अंत में मामले की सुनवाई होने की संभावना है।
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