क्या पूर्व आईपीएस अधिकारी पर अपमानजनक टिप्पणी के मामले में सुवेंदु अधिकारी को हाईकोर्ट से राहत मिली?
सारांश
कोलकाता में, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी को उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। यह मामला प्रसून बंद्योपाध्याय द्वारा की गई शिकायत से जुड़ा है, जिसमें अधिकारी पर अपमानजनक टिप्पणी का आरोप है।
Key Takeaways
- सुवेंदु अधिकारी को अंतरिम सुरक्षा मिली है।
- मामले में जांच जारी रहेगी।
- पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रसून बंद्योपाध्याय की शिकायत के आधार पर कार्रवाई होगी।
- अधिकारी को वर्चुअल माध्यम से पूछताछ का सामना करना पड़ सकता है।
- यह मामला आगामी चुनावों पर प्रभाव डाल सकता है।
कोलकाता, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कलकत्ता उच्च न्यायालय की एकल-न्यायाधीश पीठ ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी को उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की।
एफआईआर में सुवेंदु अधिकारी पर पूर्व आईपीएस अधिकारी और मालदा जिले में तृणमूल कांग्रेस के वर्तमान जिला उपाध्यक्ष प्रसून बंद्योपाध्याय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है।
दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान करने के अलावा, न्यायमूर्ति सुव्रा घोष की एकल-न्यायाधीश पीठ ने पुलिस को प्रसून बंद्योपाध्याय की शिकायत के आधार पर मालदा जिले के चंचल पुलिस स्टेशन में अधिकारी के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर कोई कार्रवाई न करने का निर्देश भी दिया।
हालांकि, न्यायमूर्ति घोष ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में जांच जारी रहेगी और विपक्ष के नेता को भी जांच अधिकारियों के साथ सहयोग करना होगा।
न्यायमूर्ति घोष ने अधिकारी को मालदा जिले के चंचल पुलिस स्टेशन में खुद उपस्थित होने से छूट दे दी। एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो मामले के जांच अधिकारी अधिकारी से वर्चुअल माध्यम से पूछताछ करेंगे।
प्रसून बंद्योपाध्याय ने 2024 के लोकसभा चुनावों में मालदा (उत्तर) लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। हालांकि, उन्हें दो बार के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोकसभा सदस्य खागेन मुर्मू ने हरा दिया था।
2 जनवरी को अधिकारी ने मालदा जिले के चंचल पुलिस स्टेशन के अंतर्गत कलामबागान क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित किया। वहां उन्होंने कथित तौर पर प्रसून बंद्योपाध्याय पर आपत्तिजनक मौखिक हमला किया और उन्हें "लुटेरा, लंपट और चरित्रहीन व्यक्ति" बताया।
इसके तुरंत बाद, प्रसून बंद्योपाध्याय ने चंचल पुलिस स्टेशन में अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई।
अधिकारी ने एफआईआर को खारिज करने के लिए न्यायमूर्ति घोष की पीठ से अपील की। मामले की सुनवाई गुरुवार को हुई, और सुनवाई के अंत में न्यायमूर्ति घोष ने उन्हें इस मामले में अंतरिम सुरक्षा प्रदान की।