क्या एनडीए ने राहुल गांधी पर सीएसपीओसी सम्मेलन में शामिल न होने को लेकर निशाना साधा?
सारांश
Key Takeaways
- राहुल गांधी की अनुपस्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दिया।
- पीएम मोदी ने भारत के लोकतंत्र की प्रशंसा की।
- सीएसपीओसी सम्मेलन का वैश्विक महत्व है।
नई दिल्ली, 15 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों का 28वां सम्मेलन (सीएसपीओसी) 14 जनवरी से शुरू हो चुका है, और भारत वैश्विक संसदीय नेताओं का मेज़बान है।
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में लोकतंत्र और देश की विकासशील अर्थव्यवस्था के महत्व पर जोर दिया, लेकिन इस कार्यक्रम में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अनुपस्थित रहे। उनके अनुपस्थित रहने पर विभिन्न राजनेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएँ दी हैं। भाजपा के सांसदों और मंत्रियों का कहना है कि उन्हें देश के साथ खड़ा होना चाहिए था।
जेडीयू के राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने कहा, "उनका उपस्थित होना ज़रूरी था क्योंकि यह प्रतिष्ठा की बात है। इतना बड़ा सम्मेलन हो रहा है, जिसमें विश्व के बड़े नेता भारत के संस्कृति और संविधान को जानने आए हैं।"
केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने कहा, "लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान करना आवश्यक है। यह केवल भारत नहीं, बल्कि विश्व का एक संगठन है। यहां प्रतिनिधियों की उपस्थिति सभी के लिए आवश्यक है।"
भाजपा सांसद विवेक ठाकुर ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनके दल को यह समझना चाहिए कि वे देश की मुख्यधारा में कहाँ खड़े हैं।"
केंद्रीय राज्य मंत्री एस. पी. सिंह बघेल ने कहा, "आज का दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लोकतंत्र ही लोकतंत्र की जननी है।"
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा, "यह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है कि जब पीएम मोदी ने संबोधित किया, तो सभी अध्यक्ष खड़े होकर ताली बजाए।"
भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने कहा, "जब भारत को स्वतंत्रता मिली, तो संदेह था कि क्या यह एक लोकतंत्र के रूप में कायम रह पाएगा। लेकिन आज हमने लोकतंत्र को मजबूत किया है।"
भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा, "भारत न केवल एक लोकतंत्र के रूप में जाना जाता है, बल्कि यह लोकतंत्र का जनक भी है।"