क्या पुलिस पर एफआईआर को चुनौती देना अपराधियों को बचाने जैसा है? सपा नेता एसटी हसन का बयान
सारांश
Key Takeaways
- संभल पुलिस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया गया है।
- एसटी हसन ने इसे अपराधियों को बचाने जैसा बताया।
- उच्च अदालत में चुनौती देने का अधिकार है।
- कोर्ट की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना आवश्यक है।
- आरएसएस और राजनीतिक बयानबाजी पर भी चर्चा की गई।
मुरादाबाद, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। समाजवादी पार्टी के नेता एसटी हसन ने संभल के पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी के मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उच्च अदालत में चुनौती देना एक अधिकार है, लेकिन यह किसी प्रकार से अपराधियों को बचाने जैसा होगा।
स्थानीय अदालत ने संभल हिंसा के दौरान एक युवक की मौत के मामले में अनुज चौधरी सहित 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया था। हालांकि, संभल पुलिस इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रही है।
इस पर एसटी हसन ने सवाल किया, "क्या यह अपराधियों को बचाने की बात नहीं है? क्या यह कानून के अनुसार सही है?" समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनका अधिकार है कि वे उच्च अदालत में जाएं, लेकिन यदि उच्च अदालत भी वही फैसला देती है, तो क्या करेंगे? क्या (एफआईआर को) टालते रहेंगे?"
उन्होंने कहा कि अदालत ने किसी न किसी कारण से संज्ञान लिया है, तभी एफआईआर का आदेश दिया। ट्रायल में यह साबित होगा कि वे अपराधी हैं या नहीं। जब ट्रायल होगा, तब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
एसटी हसन ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान 'भारत में आरएसएस नहीं होता तो इतने हिंदू न बचे होते' पर कहा, "बाबा बागेश्वर की कोशिश योगी आदित्यनाथ की तरह बनने की है। इस होड़ में वे उल्टे-सीधे अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं।"
सपा नेता ने आगे कहा, "क्यों हिंदू भाइयों को डरा रहे हैं? मेरा यकीन है कि जब तक सेकुलर मुसलमान और सेकुलर हिंदू भाई इस देश में जिंदा हैं, कोई किसी को खत्म नहीं कर सकता, कोई किसी को बर्बाद नहीं कर सकता।"
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयान 'संघ परिवार दुनिया का सबसे खतरनाक परिवार' पर एसटी हसन ने कहा, "आरएसएस समाज में शुरू से ही जहर घोलने का काम कर रहा है। सरदार बल्लभ भाई पटेल ने आरएसएस को बिना वजह बैन नहीं कराया था। यह वो संगठन है जो अंग्रेजों के साथ भी मिला हुआ था। इनका एक भी आदमी आजादी की जंग में कुर्बान नहीं हुआ। इन्होंने तिरंगे को भी नहीं अपनाया।"
उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस जैसे संगठनों पर लगाम लगनी चाहिए। ये सारे लोग देश को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। एसटी हसन ने आरोप लगाया कि आरएसएस का नियंत्रण बाहरी लोगों के हाथ में हो सकता है।