सुकांता मजूमदार का सुवेंदु अधिकारी को समर्थन: कोलकाता जुलूस में अशांति फैलाने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांता मजूमदार ने शनिवार, 26 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा में विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के उस बयान का खुलकर समर्थन किया, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि कोलकाता में वामपंथी दलों द्वारा आयोजित जुलूस के दौरान उपद्रव मचाने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। यह बयान शुक्रवार, 25 जुलाई को एस्प्लेनेड इलाके में हुई उस घटना के बाद आया है, जिसमें पत्रकारों पर हमले और एक महिला पत्रकार के साथ छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
मीडियाकर्मियों से बात करते हुए मजूमदार ने कहा कि शुक्रवार को वामपंथियों द्वारा बुलाए गए जुलूस का नेतृत्व करने वाले लोग इसे दोरीना क्रॉसिंग तक भी नहीं पहुँचा सके। उन्होंने बताया कि सियालदह से शुरू हुआ यह जुलूस रास्ते में ही बिखर गया और उससे पहले ही अशांति फैल गई।
मजूमदार ने आरोप लगाया कि जुलूस के दौरान पत्रकारों पर हमला किया गया और कई अन्य लोगों को परेशान किया गया। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को एक महिला पत्रकार ने उनसे फोन पर संपर्क किया था।
महिला पत्रकार पर कथित छेड़छाड़ के आरोप
मजूमदार के अनुसार, उस महिला पत्रकार ने बताया कि जब उनके साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की जा रही थी, तब वहाँ मौजूद कई महिलाओं ने हस्तक्षेप कर उनकी जान बचाई। मंत्री ने कहा कि अन्यथा स्थिति यौन उत्पीड़न तक पहुँच सकती थी। रिपोर्टों के अनुसार, रैली के दौरान उस महिला पत्रकार को देखकर अश्लील इशारे किए जाने के भी आरोप हैं।
मजूमदार ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'कल यह हरकत करने वाले छात्र नहीं हैं। मैं गारंटी दे सकता हूँ कि वे नीट परीक्षा में बैठने के लिए आवश्यक योग्यताओं के आस-पास भी नहीं हैं। हमारे नेता ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी को कोई रियायत नहीं दी जाएगी — गुंडागर्दी करने वालों के लिए गुंडागर्दी विरोधी कानून के तहत सजा तय की जाएगी।'
विपक्ष की प्रतिक्रिया
इस बीच, राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने शुक्रवार की घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती घायल पत्रकारों से मुलाकात की और दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की माँग की। यह उल्लेखनीय है कि विपक्षी नेता की यह माँग सत्तारूढ़ दल की माँग के समानांतर है, जो इस मुद्दे की गंभीरता को रेखांकित करती है।
आगे क्या होगा
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव पहले से ही ऊँचे स्तर पर है। गौरतलब है कि प्रेस की स्वतंत्रता और सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर यह कोई पहली घटना नहीं है। अब सभी की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस कितनी तेज़ी से आरोपियों की पहचान कर कार्रवाई करती है।