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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर थरूर बोले — 'जेन-जी, मुझे तुम पर गर्व है'

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर थरूर बोले — 'जेन-जी, मुझे तुम पर गर्व है'

सारांश

परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ हफ्तों चले छात्र आंदोलन ने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा दिलाया — और कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक्स पर जेन-जी को खुलकर सराहा। लेकिन उन्होंने यह भी कहा: एक इस्तीफा काफी नहीं, असली बदलाव के लिए पारदर्शी जाँच और ठोस सुधार ज़रूरी हैं।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 25 जुलाई को एक्स पर वीडियो जारी कर जेन-जी पीढ़ी को 'मुझे आप पर गर्व है' कहा।
थरूर ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लोकतंत्र का 'महत्वपूर्ण क्षण' बताया।
उन्होंने कहा — छात्रों ने निराशा को कार्रवाई में बदला और सरकार को जवाबदेह ठहराया।
थरूर ने स्पष्ट किया कि एक इस्तीफे से परीक्षा प्रणाली में विश्वास नहीं लौटेगा — पारदर्शी जाँच और जिम्मेदारों की जवाबदेही ज़रूरी है।
युवाओं से आह्वान: 'बेबाक बने रहिए, असहज सवाल पूछते रहिए, अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहिए।'

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार, 25 जुलाई को परीक्षा अनियमितताओं के विरुद्ध हफ्तों तक चले छात्र आंदोलन और उसके परिणामस्वरूप केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लोकतंत्र के लिए एक निर्णायक क्षण बताया। थरूर ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में जेन-जी पीढ़ी को संबोधित करते हुए कहा, 'मुझे आप पर बहुत गर्व है।'

थरूर का संदेश: लोकतंत्र की याद दिलाई

थरूर ने दर्शकों को 'युवा भारतीयों और युवा हृदय वालों' के रूप में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा एक 'महत्वपूर्ण क्षण' है जो 'हमें लोकतंत्र के बारे में कुछ मूलभूत बातें याद दिलाता है।' उनके अनुसार, जब नागरिक शांतिपूर्ण और दृढ़ता से अपनी आवाज़ उठाते हैं, तो सरकारें उदासीन नहीं रह सकतीं।

यह ऐसे समय में आया है जब NEET-UG और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में छात्रों का आक्रोश चरम पर था। गौरतलब है कि यह विरोध प्रदर्शन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं था — इसने पूरी परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए।

युवाओं की प्रशंसा: गुस्से को साहस में बदला

थरूर ने छात्रों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी निराशा को कार्रवाई में बदला और अपने गुस्से को साहस, रचनात्मकता एवं दृढ़ विश्वास के साथ व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'आपने चुप रहने से इनकार कर दिया और देश को याद दिलाया कि लोकतंत्र केवल शासन करने वालों का नहीं, बल्कि सरकारों को जवाबदेह ठहराने वालों का भी है।'

युवाओं को आगे की राह दिखाते हुए थरूर ने कहा — 'बेबाक बने रहिए, असहज सवाल पूछते रहिए, पाखंड का पर्दाफाश करते रहिए, लेकिन सबसे बढ़कर, अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहिए।'

एक इस्तीफा काफी नहीं: थरूर की चेतावनी

हालांकि, थरूर ने यह भी स्वीकार किया कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अकेले लाखों भारतीय युवाओं की चिंता, अनिश्चितता और कठिनाइयों को दूर नहीं कर सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए पारदर्शी जाँच, जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही और ठोस सुधारों की आवश्यकता है — ताकि भविष्य में कोई भी छात्र इस स्थिति का सामना न करे।

छात्रों से आह्वान: आवाज़ बुलंद रखें

थरूर ने अपने संदेश का समापन एक प्रेरणादायी आह्वान के साथ किया। उन्होंने कहा, 'आपकी आवाज़ मायने रखती है, आपका साहस मायने रखता है; आपने हमारे लोकतंत्र को मजबूत किया है। पीढ़ी दर पीढ़ी यह विश्वास बनाए रखिए कि आपकी आवाज़ भारत को बदल सकती है — आज आपने यह साबित कर दिया है।'

आने वाले दिनों में परीक्षा प्रणाली में सुधार की माँग और सरकार की जवाबदेही का यह सवाल राजनीतिक विमर्श के केंद्र में बना रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या परीक्षा सुधार का ठोस एजेंडा भी सामने रखेगा। NEET विवाद ने यह उजागर किया है कि भारत की केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक खामियाँ हैं जिन्हें किसी एक मंत्री की कुर्बानी से नहीं ढका जा सकता। थरूर ने खुद यह माना — अब देखना होगा कि यह स्वीकारोक्ति नीतिगत दबाव में तब्दील होती है या चुनावी बयानबाजी तक सिमट जाती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शशि थरूर ने जेन-जी को क्यों सराहा?
थरूर ने परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ हफ्तों तक चले छात्र विरोध प्रदर्शनों और उसके परिणामस्वरूप शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लोकतंत्र की जीत बताते हुए जेन-जी को सराहा। उन्होंने कहा कि युवाओं ने अपनी निराशा को साहस और कार्रवाई में बदला।
धर्मेंद्र प्रधान ने किस कारण इस्तीफा दिया?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा NEET-UG समेत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में हुए व्यापक छात्र विरोध प्रदर्शनों के बाद आया। इन प्रदर्शनों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए।
थरूर के अनुसार इस्तीफे के बाद आगे क्या होना चाहिए?
थरूर ने स्पष्ट कहा कि एक इस्तीफा परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार पारदर्शी जाँच, जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही और ऐसे सुधार ज़रूरी हैं जो भविष्य में किसी भी छात्र को इस स्थिति का सामना न करने दें।
थरूर ने युवाओं को क्या सलाह दी?
थरूर ने युवाओं से कहा कि वे बेबाक बने रहें, असहज सवाल पूछते रहें, पाखंड का पर्दाफाश करते रहें और सबसे बढ़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहें। उन्होंने यह भी कहा कि पीढ़ी दर पीढ़ी यह विश्वास बनाए रखें कि उनकी आवाज़ भारत को बदल सकती है।
थरूर ने यह संदेश कहाँ साझा किया?
थरूर ने यह संदेश अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर एक वीडियो के रूप में पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने दर्शकों को 'युवा भारतीयों और युवा हृदय वालों' के रूप में संबोधित किया।
राष्ट्र प्रेस
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