धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पवन खेड़ा बोले — 'देश ने हटाया, PM ने नहीं; लड़ाई अभी शुरू हुई'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया दी और स्पष्ट किया कि यह संघर्ष का अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री को प्रधानमंत्री ने नहीं, बल्कि देश के युवाओं ने पद से हटाया है।
पवन खेड़ा का बयान
खेड़ा ने कहा, 'जब तक प्रधानमंत्री देश के युवाओं से माफी नहीं मांग लेते और 20 जुलाई को जो हिंसा हुई, पैलेट गन चलाई गईं, उसकी जवाबदेही तय नहीं होती, संघर्ष खत्म नहीं होगा।' उन्होंने कहा कि छात्रों और कांग्रेस की जो माँगें थीं, उनमें से अभी केवल एक — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा — पूरी हुई है।
खेड़ा ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं को अपना 'फ्रेंड' बताते हैं, लेकिन अगर वे सच में युवाओं के हितैषी होते तो छात्रों पर लाठीचार्ज न होता, आँसू गैस के गोले न दागे जाते और पैलेट गन न चलाई जाती। उन्होंने कहा कि तीन माँगें अभी भी शेष हैं — प्रधानमंत्री की माफी, 20 जुलाई की हिंसा की जवाबदेही, और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार।
कुमारी सैलजा का तंज
कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कहा कि 'जिद्दी सरकार को आखिरकार युवाओं के सामने झुकना ही पड़ा।' उन्होंने इसे 'भारत के करोड़ों युवाओं की जीत' बताया और कहा कि यह उन सभी छात्रों, अभिभावकों और परिवारों की विजय है जिन्होंने अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाई।
सैलजा ने कहा कि नीट पेपर लीक के पहले दिन से ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में पार्टी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, जवाबदेही और शिक्षा सुधार की माँग करती रही। उनके अनुसार, संसद से लेकर सड़क तक पूरे विपक्ष ने छात्रों के साथ मिलकर यह लड़ाई लड़ी।
आगे की माँगें
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि लड़ाई यहाँ नहीं रुकेगी। पार्टी की तीन प्रमुख माँगें हैं — प्रधानमंत्री देश के युवाओं से सार्वजनिक माफी माँगें; 20 जुलाई को छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन चलाने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो; और शिक्षा व्यवस्था में ऐसे सुधार सुनिश्चित किए जाएँ जिससे कोई भी छात्र का भविष्य भ्रष्टाचार और पेपर लीक की भेंट न चढ़े।
पृष्ठभूमि
यह घटनाक्रम नीट पेपर लीक विवाद के बाद उपजे देशव्यापी छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि में सामने आया है। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित तौर पर बल प्रयोग किया गया था, जिसमें पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप लगे। इस आंदोलन के दौरान कुछ छात्रों की जान जाने की भी खबरें आईं, जिन्हें खेड़ा ने अपने बयान में रेखांकित किया। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस दबाव के बीच आया, जिसे विपक्ष आंशिक जीत मान रहा है।