धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग तेज़: कांग्रेस बोली — 'छात्र आंदोलन को बलपूर्वक दबा रही सरकार'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा, कार्ति चिदंबरम, रणदीप सिंह सुरजेवाला और अन्य विपक्षी नेताओं ने 22 जुलाई को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन को बलपूर्वक कुचलने में जुटी है और संसद में इस मुद्दे पर चर्चा से बच रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की माँग को लेकर विपक्ष एकजुट दिखा।
कांग्रेस सांसदों के तीखे आरोप
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लंबे भाषण देने के बजाय तत्काल इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष को मंत्री का स्पष्टीकरण नहीं, बल्कि उनका इस्तीफा चाहिए।
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि जब विपक्ष किसी महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाता है, तो सरकार की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह उस पर संवाद करे। उनके अनुसार, सरकार बातचीत के बजाय शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए अपनी ताकत का इस्तेमाल कर रही है।
कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस विवाद को दलगत राजनीति से ऊपर बताते हुए कहा कि यह देश के भविष्य और छात्रों को न्याय दिलाने की लड़ाई है। उन्होंने कहा, 'देश का युवा देख रहा है कि इस मुद्दे पर कौन उनके साथ खड़ा है और कौन उनके रास्ते में बाधा बन रहा है।'
संसद में गतिरोध और मेट्रो बंद का मुद्दा
कांग्रेस सांसद जोथिमानि ने भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग दोहराई और आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों तथा विपक्षी नेताओं के साथ बर्बरता की गई। उन्होंने कहा कि मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और संसद की कार्यवाही स्थगित की गई, लेकिन जनता की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।
कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने बताया कि विपक्षी नेताओं ने एक दिन पहले लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पूरे मामले पर विस्तृत चर्चा कराने की माँग की थी, इसके बावजूद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। टैगोर ने कहा कि राहुल गांधी घायल छात्रों से अस्पताल में मिलने गए और बाद में सभी सांसदों के साथ प्रधानमंत्री आवास पहुँचे। प्रधानमंत्री विपक्ष के नेता से मिलने को तैयार नहीं थे, जिसके बाद शांतिपूर्ण धरना दिया गया।
सपा और तृणमूल की आवाज़
समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जब विपक्ष संसद में यह मुद्दा उठाने की कोशिश करता है, तो उसी पर आरोप मढ़े जाते हैं। सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने कहा कि यदि सरकार संवाद का रास्ता नहीं अपनाती, तो तनाव की स्थिति पैदा होना स्वाभाविक है।
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद सागरिका घोष ने छात्रों पर बल प्रयोग को शर्मनाक बताते हुए सरकार से खुले मन से बातचीत करने की अपील की।
शिवसेना का सुप्रीम कोर्ट में दस्तक
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा में सांसदों की बैठने की व्यवस्था और कथित संबद्धता के आधार पर जारी बुलेटिन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी ने इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है।
सावंत के अनुसार, अदालत ने यह सवाल उठाया कि एक संयुक्त सचिव किस कानूनी आधार पर किसी पार्टी की संबद्धता या विलय से संबंधित निर्णय ले सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर जवाब माँगा है और इसके बाद अंतिम सुनवाई निर्धारित की है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र जारी है और छात्र मुद्दों पर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। विपक्ष के एकजुट रुख और सर्वोच्च न्यायालय की सक्रियता को देखते हुए सरकार पर संवाद बहाल करने का दबाव आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।