धर्मेंद्र प्रधान पहले इस्तीफा दें, तभी होगी संसद में चर्चा — अधीर रंजन चौधरी का भाजपा पर तीखा प्रहार
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने 22 जुलाई को केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए स्पष्ट किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद पर रहते हुए नीट और छात्र मुद्दों पर संसद में निष्पक्ष चर्चा संभव नहीं है। उन्होंने माँग दोहराई कि प्रधान पहले इस्तीफा दें, उसके बाद ही सार्थक संसदीय विमर्श हो सकता है। यह बयान संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध के बीच आया है।
नीट विवाद और इस्तीफे की माँग
चौधरी ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू के उस दावे को सिरे से खारिज किया जिसमें उन्होंने कहा था कि सरकार छात्र मुद्दों पर चर्चा को तैयार है लेकिन विपक्ष नहीं चाहता। चौधरी ने कहा कि विपक्ष की माँग शुरू से एकदम स्पष्ट रही है — धर्मेंद्र प्रधान को पहले अपना पद छोड़ना होगा। उन्होंने तर्क दिया कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने गंभीर मामले में सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए, और जिस मंत्री पर सवाल उठे हों, उनके पद पर रहते हुए निष्पक्ष जाँच और चर्चा की उम्मीद नहीं की जा सकती।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि देशभर में छात्र आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएँ भी इस संकट का हिस्सा रही हैं, जो इस मुद्दे की गंभीरता को और बढ़ाती हैं।
मंत्री के इस्तीफे की परंपरा और राजनीतिक संदर्भ
चौधरी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि किसी मंत्री का जिम्मेदारी तय होने पर इस्तीफा देना भारतीय संसदीय लोकतंत्र में कोई नई बात नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में BJP ने विपक्ष में रहते हुए कई मंत्रियों के इस्तीफे की माँग की थी। ऐसे में वर्तमान विपक्ष की यह माँग असामान्य नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परंपरा के अनुरूप है।
कल्याण बनर्जी के निलंबन पर प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी के कथित आपत्तिजनक शब्दों के प्रयोग और उनके निलंबन पर चौधरी ने इसे मुख्यतः TMC का आंतरिक मामला बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर दो गुटों के बीच कोलकाता में लंबे समय से मतभेद चल रहे हैं और उसी का असर अब संसद के भीतर भी दिखाई दे रहा है। हालाँकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यदि लोकसभा अध्यक्ष को संसदीय नियमों के अनुसार निलंबन आवश्यक लगा, तो यह उनका अधिकार और विवेकाधीन निर्णय है।
राहुल गांधी के प्रदर्शन और भाजपा की प्रति-कार्रवाई पर टिप्पणी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास के बाहर किए गए प्रदर्शन और उसके जवाब में बुधवार को BJP द्वारा देशभर में कांग्रेस कार्यालयों के बाहर आयोजित विरोध प्रदर्शनों पर चौधरी ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि BJP और स्वयं प्रधानमंत्री राहुल गांधी से इतना भय क्यों महसूस करते हैं।
उन्होंने कहा कि विपक्ष के किसी नेता का प्रधानमंत्री आवास के बाहर बैठकर आम जनता और छात्रों के मुद्दे उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, इसे प्रधानमंत्री का अपमान नहीं कहा जा सकता। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी के साथ पुलिस द्वारा कथित तौर पर कठोर व्यवहार किए जाने और उन्हें जबरन हटाए जाने पर भी चौधरी ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि BJP का यह प्रति-प्रदर्शन स्वयं इस बात का प्रमाण है कि राहुल गांधी के आंदोलन का राजनीतिक प्रभाव पड़ा है।
आगे की राह
कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान शिक्षा मंत्री के पद पर बने रहेंगे, तब तक संसद में नीट और छात्र मुद्दों पर सार्थक चर्चा की उनकी माँग जारी रहेगी। मानसून सत्र में यह गतिरोध आने वाले दिनों में भी बना रह सकता है, क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर अडिग हैं।