22 जुलाई 2026
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नीट विवाद: खड़गे की राज्यसभा में माँग — शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पहले इस्तीफा दें, तभी होगी निष्पक्ष चर्चा

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नीट विवाद: खड़गे की राज्यसभा में माँग — शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पहले इस्तीफा दें, तभी होगी निष्पक्ष चर्चा

सारांश

राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 22 जुलाई को साफ कहा — शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लो, तभी नीट पर निष्पक्ष बहस होगी। विपक्ष नियम 267 के तहत तत्काल चर्चा चाहता है, लेकिन जवाबदेही की शर्त पर अड़ा है। सदन में नारेबाजी से कार्यवाही बाधित हुई।

मुख्य बातें

मल्लिकार्जुन खड़गे ने 22 जुलाई को राज्यसभा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की।
विपक्ष ने नियम 267 के तहत नीट परीक्षा विवाद पर तत्काल चर्चा का नोटिस दिया।
खड़गे ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ मारपीट की जा रही है।
उपसभापति ने स्पष्ट किया कि नियम 267 के तहत पूर्व के निर्णय अभी भी लागू हैं, और पूर्ववर्ती सभापतियों ने सामान्यतः ऐसे नोटिस अस्वीकार किए हैं।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की शर्त और सरकार की प्रक्रियागत स्थिति के बीच गतिरोध जारी है।

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 22 जुलाई को सदन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि नीट परीक्षा विवाद पर निष्पक्ष और सार्थक बहस तभी संभव है जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि शिक्षा मंत्री का राजीनामा लेकर सदन में चर्चा का मार्ग प्रशस्त किया जाए। यह बयान उस वक्त आया जब सरकार ने नीट से जुड़े विषय पर सदन में चर्चा कराने की बात कही थी।

विपक्ष की माँग और नियम 267

खड़गे ने कहा कि कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के सांसद नियम 267 के तहत नीट परीक्षा और उससे जुड़े विवादों पर तत्काल चर्चा चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष इस बहस से भाग नहीं रहा, बल्कि वह चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है — लेकिन जवाबदेही सुनिश्चित किए बिना बहस का कोई औचित्य नहीं। उनका कहना था कि जब तक शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं होता, तब तक यह चर्चा निरर्थक रहेगी।

छात्रों पर बल प्रयोग का आरोप

खड़गे ने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ मारपीट की जा रही है। उन्होंने सरकार से इस पर भी स्पष्टीकरण माँगा। इस वक्तव्य के बाद सदन में जबरदस्त नारेबाजी शुरू हो गई, जिससे कार्यवाही बाधित हुई।

उपसभापति की स्थिति और नियम 267 की पृष्ठभूमि

आसन पर उपस्थित उपसभापति ने सदन को बताया कि नियम 267 के तहत पूर्व में महत्वपूर्ण निर्णय दिए जा चुके हैं, जो अभी भी सदन की कार्यवाही पर लागू होते हैं। गौरतलब है कि इस नियम के तहत राज्यसभा में अन्य सभी कार्यवाहियाँ स्थगित कर दी जाती हैं और केवल उसी विषय पर चर्चा होती है जिस पर सभापति को नोटिस दिया गया हो। इस चर्चा के अंत में मतदान का भी प्रावधान है।

नियम 267 पर ऐतिहासिक रुख

उपसभापति ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान विभिन्न सभापतियों ने सामान्यतः इस नियम के तहत आने वाले नोटिसों को अस्वीकार किया है और इस संबंध में रूलिंग भी दी जाती रही है। हालाँकि, पूर्व में कुछ नोटिसों को स्वीकार भी किया गया था। यह स्थिति विपक्ष की माँग और संसदीय प्रक्रिया के बीच टकराव को और उजागर करती है।

आगे क्या

नीट विवाद पर संसद में गतिरोध बना हुआ है। विपक्ष की शर्त — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा — और सरकार की नियमित प्रक्रिया के तहत चर्चा कराने की मंशा के बीच सहमति न बनने तक सदन की कार्यवाही प्रभावित रहने की संभावना है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस गतिरोध को तोड़ने के लिए क्या रास्ता अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

चर्चा बाद में' की रणनीति संसदीय जवाबदेही की माँग के रूप में उचित दिखती है, लेकिन यह एक ऐसा पेंच भी है जो बहस को अनिश्चितकाल के लिए टाल सकता है। नीट विवाद में लाखों छात्रों का भविष्य दाँव पर है — और गतिरोध जितना लंबा खिंचेगा, उतना ही असली मुद्दा — परीक्षा प्रणाली की खामियाँ और पेपर लीक की जाँच — राजनीतिक शोर में दब जाएगा। नियम 267 पर ऐतिहासिक रूप से सभापतियों का रुख नकारात्मक रहा है, इसलिए विपक्ष को यह भी सोचना होगा कि क्या यह रास्ता व्यावहारिक है या केवल प्रतीकात्मक।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मल्लिकार्जुन खड़गे ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग क्यों की?
खड़गे का कहना है कि नीट परीक्षा विवाद में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय हुए बिना सदन में कोई भी चर्चा निष्पक्ष नहीं हो सकती। उनके अनुसार, जब तक मंत्री पद पर बने हैं, तब तक बहस का कोई अर्थ नहीं।
नियम 267 क्या है और इसका नीट विवाद से क्या संबंध है?
नियम 267 के तहत राज्यसभा में अन्य सभी कार्यवाहियाँ स्थगित कर केवल उस विषय पर चर्चा होती है जिस पर नोटिस दिया गया हो, और अंत में मतदान का प्रावधान भी है। कांग्रेस सहित विपक्षी दल इसी नियम के तहत नीट पर तत्काल बहस चाहते हैं।
उपसभापति ने नियम 267 पर क्या स्पष्ट किया?
उपसभापति ने बताया कि पूर्व में नियम 267 के तहत दिए गए नोटिसों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय हो चुके हैं जो अभी भी लागू हैं। साथ ही यह भी कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान विभिन्न सभापतियों ने सामान्यतः इस नियम को अस्वीकार किया है।
खड़गे ने छात्रों के बारे में क्या आरोप लगाया?
खड़गे ने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ मारपीट की जा रही है। उन्होंने इसे सरकार की जवाबदेही से बचने की कोशिश बताया।
नीट विवाद पर संसद में गतिरोध कब तक जारी रह सकता है?
विपक्ष की शर्त — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा — और सरकार की नियमित प्रक्रिया के तहत चर्चा कराने की मंशा के बीच सहमति नहीं बनी है। जब तक दोनों पक्षों में कोई बीच का रास्ता नहीं निकलता, सदन की कार्यवाही प्रभावित रहने की आशंका है।
राष्ट्र प्रेस
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