नीट पेपर लीक: खड़गे की PM मोदी को चुनौती — रात के वीडियो नहीं, संसद में आकर दें जवाब
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 24 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि नीट पेपर लीक मामले पर रात को वीडियो संदेश जारी करने के बजाय उन्हें दिन में संसद में आकर देश और छात्रों के सामने जवाब देना चाहिए। खड़गे ने स्पष्ट किया कि केवल सदन में दिया गया बयान ही राजनीतिक रूप से गंभीर माना जाएगा।
मुख्य घटनाक्रम
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नीट विवाद पर जारी वीडियो संदेश के तुरंत बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सरकार को घेरा। खड़गे ने कहा, 'अगर प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर कुछ कहना है तो उन्हें संसद में आकर अपनी बात रखनी चाहिए।' यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक को लेकर देशभर के छात्र आंदोलित हैं।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर काफी देर बाद बोल रही है और देश के युवा सड़कों पर हैं। उनके अनुसार, केवल बयानबाजी से छात्रों की परेशानियाँ दूर नहीं होंगी — ठोस समाधान ज़रूरी है।
मंत्री के इस्तीफे की माँग
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने माँग की कि प्रधानमंत्री मोदी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाएँ। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की माँगों पर ध्यान देने के बजाय जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने कहा कि विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते कांग्रेस की संसद में छात्रों की आवाज़ उठाने की अलग जिम्मेदारी है।
अन्य विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद सौगत रॉय ने पेपर लीक रोकने के लिए प्रस्तावित कानून पर सवाल उठाते हुए पूछा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान कब इस्तीफा देंगे। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सांसद मनोज कुमार झा ने सरकार पर 'अहंकार' का आरोप लगाते हुए कहा कि छात्रों की माँगों पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए, न कि महज बयान।
समाजवादी पार्टी (SP) सांसद रामगोपाल यादव ने जाँच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि पेपर लीक करने वालों के खिलाफ पहले से मौजूद कानूनों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया गया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि नीट-यूजी पेपर लीक विवाद पिछले कई हफ्तों से संसद और सड़क — दोनों मोर्चों पर राजनीतिक तनाव का केंद्र बना हुआ है। आलोचकों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी राष्ट्रीय परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हों, और सरकार की प्रतिक्रिया की गति पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
आगे क्या होगा
विपक्ष का दबाव बढ़ने के साथ अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या प्रधानमंत्री मोदी संसद के पटल पर इस मुद्दे पर सीधे जवाब देंगे। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के भविष्य और नीट सुधारों की दिशा पर आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।