26 जुलाई 2026
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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों की जीत: मौलाना मुश्ताक मलिक ने PM मोदी से माफी की मांग की

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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों की जीत: मौलाना मुश्ताक मलिक ने PM मोदी से माफी की मांग की

सारांश

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा महज एक मंत्री की विदाई नहीं — मौलाना मुश्ताक मलिक इसे छात्रों के 12 साल के दबे संघर्ष की पुनर्जागृति मानते हैं। लेकिन उनकी माँगें यहीं नहीं रुकतीं: PM से माफी, गृह मंत्री की जवाबदेही और छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी — जंतर-मंतर का धरना अभी खत्म नहीं हुआ।

मुख्य बातें

तहरीक मुस्लिम शब्बान के अध्यक्ष मौलाना मुश्ताक मलिक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को 'छात्रों और संविधान की जीत' करार दिया।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों के समक्ष सार्वजनिक माफी की माँग की।
कथित पुलिस कार्रवाई में एक छात्रा वेंटिलेटर पर बताई गई; कई छात्र अस्पताल में भर्ती हैं।
मौलाना मलिक ने केंद्रीय गृह मंत्री की जवाबदेही तय करने और छात्रों पर दर्ज मामले वापस लेने की माँग की।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर आरोप लगाया कि उन्होंने जान गँवाने वाले छात्रों के प्रति पर्याप्त संवेदना नहीं जताई।
शिक्षा व्यवस्था में 'वैचारिक हस्तक्षेप' का आरोप लगाते हुए जंतर-मंतर आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया।

तहरीक मुस्लिम शब्बान के अध्यक्ष मौलाना मुश्ताक मलिक ने 25 जुलाई को हैदराबाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे 'देश के छात्रों और संविधान की जीत' बताया। उन्होंने साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों के समक्ष सार्वजनिक माफी की मांग की और केंद्रीय गृह मंत्री की जवाबदेही तय करने का आह्वान किया।

मुख्य बयान: 'यह किसी व्यक्ति की हार नहीं'

मौलाना मलिक ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा किसी एक व्यक्ति की हार नहीं, बल्कि देशभर के छात्रों के सतत संघर्ष का परिणाम है। उनके अनुसार, छात्रों के आंदोलन और संयुक्त विपक्ष के दबाव ने मिलकर यह परिणाम संभव किया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में न्याय के लिए लड़ने की सामूहिक इच्छाशक्ति कमज़ोर पड़ गई थी, लेकिन इस आंदोलन ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज़ की ताकत को एक बार फिर स्थापित किया।

छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और जवाबदेही की माँग

मौलाना मलिक ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के दौरान छात्रों के साथ कथित तौर पर 'बर्बर व्यवहार' किया गया। उनके अनुसार, कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए, अनेक अस्पतालों में भर्ती हैं, कुछ के पैरों में प्लास्टर है और एक छात्रा कथित तौर पर वेंटिलेटर पर है। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं की जवाबदेही सीधे केंद्रीय गृह मंत्री पर बनती है और उन्हें देश के सामने जवाब देना चाहिए।

मौलाना मलिक ने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर का धरना केवल इस्तीफे से समाप्त नहीं होना चाहिए। उन्होंने माँग की कि छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों पर आधिकारिक आदेश जारी किए जाएँ, कथित कार्रवाई की निष्पक्ष जाँच हो और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर सवाल

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए मौलाना मलिक ने कहा कि भागवत ने छात्र आंदोलन पर अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिक्रिया दी, लेकिन जिन छात्रों की जान गई या जिन्होंने आत्महत्या की, उनके प्रति पर्याप्त संवेदना व्यक्त नहीं की। उनके अनुसार, केवल 'समझाने' की बात करना पर्याप्त नहीं — उन परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए जिनके कारण छात्र मानसिक दबाव में आए।

शिक्षा व्यवस्था में 'वैचारिक हस्तक्षेप' का आरोप

मौलाना मलिक ने यह भी आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था में वैचारिक हस्तक्षेप बढ़ा है और इतिहास तथा पाठ्यक्रम में बदलावों के ज़रिए सामाजिक भाईचारे के माहौल को प्रभावित किया गया है। उनका कहना था कि जंतर-मंतर के आंदोलन ने आरएसएस की विचारधारा के विस्तार के सामने एक बड़ी चुनौती पेश की है। उन्होंने मोहन भागवत और आरएसएस नेतृत्व से आग्रह किया कि वे देश के युवाओं की भावनाओं को समझते हुए आत्ममंथन करें।

आगे की राह: निष्पक्ष जाँच और न्याय की माँग

मौलाना मलिक ने अंत में कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही और न्याय सर्वोपरि हैं। छात्रों के साथ हुई कथित घटनाओं की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और दोषियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उनके अनुसार, यदि ऐसा नहीं हुआ तो भविष्य में युवाओं के साथ अन्याय जारी रह सकता है। यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन अभी भी जारी बताया जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना मुश्ताक मलिक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को 'जीत' क्यों कहा?
मौलाना मलिक के अनुसार यह इस्तीफा किसी एक मंत्री की व्यक्तिगत हार नहीं, बल्कि छात्रों के आंदोलन और संयुक्त विपक्ष के दबाव का परिणाम है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज़ की ताकत का प्रमाण बताया।
मौलाना मलिक ने PM मोदी से क्या माँग की?
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों के समक्ष सार्वजनिक माफी माँगने की माँग की। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री की जवाबदेही तय करने और छात्रों पर दर्ज मामले वापस लेने का भी आह्वान किया।
जंतर-मंतर आंदोलन में छात्रों की स्थिति क्या है?
मौलाना मलिक के आरोपों के अनुसार, कई छात्र कथित पुलिस कार्रवाई में गंभीर रूप से घायल हुए, अनेक अस्पताल में भर्ती हैं और एक छात्रा कथित तौर पर वेंटिलेटर पर है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
मोहन भागवत की टिप्पणी पर मौलाना मलिक ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने छात्र आंदोलन पर अप्रत्यक्ष प्रतिक्रिया दी, लेकिन जान गँवाने वाले या आत्महत्या करने वाले छात्रों के प्रति पर्याप्त संवेदना नहीं जताई। उन्होंने भागवत से आत्ममंथन का आग्रह किया।
क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर का धरना समाप्त होगा?
मौलाना मलिक के अनुसार नहीं — धरना तब तक जारी रहना चाहिए जब तक छात्रों पर दर्ज मामले वापस नहीं लिए जाते, कथित पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जाँच नहीं होती और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय नहीं की जाती।
राष्ट्र प्रेस
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