मायावती ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बताया उचित, जंतर-मंतर लाठीचार्ज पर पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को 'उचित कदम' करार दिया और कहा कि यह निर्णय पहले ही ले लिया जाना चाहिए था। देशभर में नीट-यूजी कथित पेपर लीक को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मायावती ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर कथित लाठीचार्ज की निष्पक्ष जाँच और दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की माँग की।
मायावती की मुख्य माँगें
बसपा प्रमुख ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिन पुलिसकर्मियों ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे निहत्थे छात्र-छात्राओं पर बर्बरतापूर्वक लाठी-डंडे बरसाए, जिससे वे बड़ी संख्या में गंभीर रूप से घायल हुए, उन पर अनुशासनिक एवं आपराधिक मामले दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
मायावती ने विशेष रूप से उन पुरुष पुलिसकर्मियों का उल्लेख किया जिन्होंने कथित तौर पर छात्राओं के साथ 'बेहूदा व शर्मनाक बदसलूकी' की। उन्होंने माँग की कि ऐसे पुलिसकर्मियों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध आपराधिक मुकदमे चलाए जाएँ ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
एफआईआर वापसी और राजनीतिकरण पर चेतावनी
बसपा मुखिया ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि आंदोलनकारी छात्रों व युवाओं के विरुद्ध दर्ज सभी एफआईआर और शिकायतें वापस ली जाएँ। उन्होंने तर्क दिया कि इन मुकदमों के चलते छात्रों को थानों और अदालतों के चक्कर काटने पड़ेंगे, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होगा और देश का सौहार्दपूर्ण वातावरण बिगड़ेगा।
मायावती ने आंदोलनकारियों को भी सीधे संबोधित करते हुए कहा कि वे किसी भी राजनीतिक दल को इस संघर्ष का राजनीतिकरण न करने दें और अपने भविष्य को दाँव पर न लगाएँ।
नीट-यूजी विवाद और इस्तीफे की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी के कथित पेपर लीक मामले को लेकर पिछले कई सप्ताह से देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी थे। विभिन्न छात्र संगठनों तथा 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने और उनके इस्तीफे की माँग की थी।
इसी दबाव के बीच शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा सौंप दिया। यह इस्तीफा सरकार और सीजेपी के बीच प्रस्तावित तीसरे दौर की वार्ता से ठीक पहले आया, जिसे परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आगे की राह
छात्र आंदोलन के नेताओं और सरकार के बीच बातचीत का अगला दौर निर्णायक माना जा रहा है। मायावती की माँगें — लाठीचार्ज की जाँच, एफआईआर वापसी और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई — अब इस वार्ता के एजेंडे में शामिल होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम आने वाले समय में परीक्षा सुधार और पुलिस जवाबदेही के मुद्दों पर व्यापक बहस को और तेज़ कर सकता है।