धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद घर पहुंचे अमित शाह, पीयूष गोयल समेत कई बड़े नेता
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दे दिया और यह त्यागपत्र सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा। इस्तीफे की पृष्ठभूमि में जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन चल रहा था। प्रधान ने कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
नेताओं का तांता
इस्तीफे की खबर फैलते ही नई दिल्ली स्थित प्रधान के आवास पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के वरिष्ठ नेताओं का आना शुरू हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और पूर्व सांसद रमेश बिधूड़ी उनसे मुलाकात करने पहुंचे।
पीयूष गोयल की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने प्रधान की विदाई पर कहा, 'जब धर्मेंद्र प्रधान भारत के शिक्षा मंत्री पद से विदा हो रहे हैं, तो यह उनकी दशकों के समर्पित लोक सेवा और राष्ट्र निर्माण में उनके उल्लेखनीय योगदान को स्वीकार करने और सराहना करने का अवसर है।' गोयल ने आगे कहा कि छात्र आंदोलनों से उनके प्रारंभिक जुड़ाव से लेकर सार्वजनिक जीवन में उनकी विशिष्ट भूमिकाओं तक, उन्होंने निरंतर प्रतिबद्धता और भारत के युवाओं की आकांक्षाओं के साथ गहरा जुड़ाव प्रदर्शित किया है।
गोयल ने यह भी कहा कि शिक्षा सुधार कभी अल्पकालिक प्रक्रिया नहीं होती — इसके लिए दृढ़ता, परामर्श और परिवर्तनकारी सोच की ज़रूरत होती है, और प्रधान ने ये सभी गुण अपने कार्यकाल में प्रदर्शित किए। उन्होंने कहा, 'केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनके साथ काम करना मेरे लिए सौभाग्य की बात रही है। मैं राष्ट्र के प्रति उनकी बहुमूल्य सेवा के लिए उन्हें धन्यवाद देता हूं।'
धर्मेंद्र प्रधान का संदेश
इस्तीफे से पहले धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक पोस्ट में लिखा, 'मेरे युवा साथियों, मैं पिछले 4 दशकों से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहा हूं। मेरा सदैव यह विश्वास रहा है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होती है।' उन्होंने देश के युवाओं की आकांक्षाओं और न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करने की बात भी कही।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन जारी है और शिक्षा मंत्रालय के नेतृत्व पर सवाल उठ रहे थे। गौरतलब है कि प्रधान लंबे समय से शिक्षा सुधारों, विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के क्रियान्वयन से जुड़े रहे हैं। अब देखना यह होगा कि मंत्रालय की कमान किसे सौंपी जाती है और नई नियुक्ति शिक्षा सुधारों की दिशा को कैसे प्रभावित करती है।