पश्चिम बंगाल: रिश्वतखोरी में दो एमवीआई निलंबित, सीएम ने एक्स पर दी सख्त चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 25 जुलाई 2026 को पश्चिम बर्धमान जिले के रामपुर चेक पोस्ट पर तैनात दो मोटर वाहन निरीक्षकों (एमवीआई) को निलंबित कर दिया। आरोप है कि इन अधिकारियों ने सभी ज़रूरी दस्तावेज़ मौजूद होने के बावजूद एक ट्रक चालक को अवैध रूप से रोका और ₹22,000 की रिश्वत मांगी। मुख्यमंत्री ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को दोहराया।
मुख्य घटनाक्रम
ट्रक संख्या JH09BA3535 (मालिक: दीपक सिंह, चालक: शिवा यादव) सर्विसिंग के बाद गैराज लौट रहा था। रामपुर चेक पोस्ट पर दोनों एमवीआई ने वाहन को रोककर कथित तौर पर रिश्वत देने का दबाव बनाया। इनकार करने पर वाहन जब्त कर लिया गया और एक ऐसे कर के नाम पर ₹22,000 की अवैध माँग की गई, जिसे राज्य सरकार पहले ही समाप्त कर चुकी है।
निलंबित किए गए दोनों अधिकारियों की पहचान नजीमुल हक और अनुपम बनर्जी के रूप में की गई है। राज्य की भ्रष्टाचार रोधी शाखा (एसीबी) ने दोनों के खिलाफ आपराधिक जाँच शुरू कर दी है।
सीएम का सख्त संदेश
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, 'कानून से ऊपर कोई नहीं है। पश्चिम बंगाल सरकार प्रशासन, विभागों और सरकार के हर स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है। किसी भी स्थिति में जबरन वसूली और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।'
उन्होंने आगे कहा, 'यह प्रशासन के सभी स्तरों के लिए एक सख्त चेतावनी है। भ्रष्टाचार, उत्पीड़न या अवैध तरीके से लाभ लेने में शामिल पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।'
सरकार की कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि गलत तरीके से जब्त किए गए वाहनों को तत्काल छोड़ा जाए। मामले को पूर्ण आपराधिक जाँच के लिए एसीबी को सौंपा गया है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कदम उठाने के आदेश जारी किए गए हैं। गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब ट्रांसपोर्टर समुदाय लंबे समय से चेक पोस्टों पर उत्पीड़न की शिकायतें करता रहा है।
आम जनता और ट्रांसपोर्टरों पर असर
यह मामला उस व्यापक समस्या की ओर ध्यान दिलाता है जिसमें ट्रक चालकों को राज्यभर के चेक पोस्टों पर कथित तौर पर अनौपचारिक वसूली का सामना करना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की त्वरित अनुशासनात्मक कार्रवाई भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में तभी प्रभावी होगी जब एसीबी की जाँच पारदर्शी तरीके से पूरी हो और दोषियों को सज़ा मिले।
क्या होगा आगे
एसीबी की जाँच के नतीजों के आधार पर दोनों निलंबित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय और आपराधिक कार्यवाही की जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन सुनिश्चित करना उनकी सरकार की प्राथमिकता है।