क्या उत्तर प्रदेश में जनसुनवाई के दौरान रिश्वत की शिकायत पर ऊर्जा मंत्री ने कड़ी कार्रवाई की?
सारांश
Key Takeaways
- रिश्वत मांगने की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की गई।
- ऊर्जा मंत्री ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति की पुष्टि की।
- जनसुनवाई का महत्व और इसकी प्रभावशीलता को दर्शाया गया।
लखनऊ, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जनसुनवाई के दौरान रिश्वत मांगने की शिकायत सामने आते ही उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने विद्युत विभाग में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए।
मंत्री के कड़े कदमों का नतीजा यह रहा कि एक लाइनमैन की सेवा समाप्त कर दी गई, वहीं एक कनिष्ठ अभियंता (जेई) को निलंबित कर दिया गया। साथ ही, दो वरिष्ठ अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। यह मामला अमरोहा जनपद के नौगावां सादात क्षेत्र का है, जहां निवासी मोहम्मद यूसा, पुत्र कासिम ने जनसुनवाई में विद्युत संयोजन देने के नाम पर रिश्वत की मांग की शिकायत की।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए ऊर्जा मंत्री ने तुरंत संज्ञान लिया। मंत्री ए. के. शर्मा ने मामले को गंभीर मानते हुए पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता से फोन पर बात कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। मंत्री के निर्देश के बाद विभाग ने तुरंत कार्रवाई की और दोषियों पर गाज गिराई गई।
ऊर्जा मंत्री के निर्देशों के तहत कनिष्ठ अभियंता राजीव सिंह को निलंबित किया गया, जबकि लाइनमैन अब्बास की सेवा समाप्त कर दी गई। इसके अतिरिक्त, एसडीओ रितेश प्रसाद और अधिशासी अभियंता राहुल निगम को नियम-10 के अंतर्गत स्पष्टीकरण जारी किया गया है। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने स्पष्ट कहा, “ऊर्जा विभाग जनता की सेवा के लिए है, न कि जनता को परेशान करने या अवैध वसूली के लिए। घूसखोरी, लापरवाही और भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की है और जनसुनवाई के माध्यम से प्राप्त प्रत्येक शिकायत पर त्वरित और निर्णायक कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी कि जो भी अपने पद का दुरुपयोग करेगा, उसके खिलाफ बिना किसी दबाव या भेदभाव के कठोर कार्रवाई की जाएगी। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि जनता को परेशान करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी, ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।