यूपी: रिश्वत लेते वरिष्ठ सहायक का वीडियो वायरल, तुरंत निलंबन की कार्रवाई
सारांश
Key Takeaways
- रिश्वतखोरी की घटना ने स्वास्थ्य विभाग को संज्ञान लेने पर मजबूर किया।
- सोशल मीडिया की भूमिका ने इस मामले को उजागर किया।
- तत्काल निलंबन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाने का संकेत दिया।
- जांच के परिणामों के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- बस्ती जिले में यह घटना समाज में जागरूकता बढ़ा रही है।
लखनऊ, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के basti जिले के विक्रमजोत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत वरिष्ठ सहायक प्रदीप श्रीवास्तव को रिश्वत लेते हुए एक वीडियो के वायरल होने के बाद तुरंत निलंबित कर दिया गया है। उन पर रिटायर एएनएम से एरियर भुगतान के लिए 45 हजार रुपए की घूस मांगने का आरोप है, जिसके चलते स्वास्थ्य विभाग ने यह कार्रवाई की।
सोशल मीडिया पर वीडियो फैलने के बाद प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने मामले का संज्ञान लिया और अधिकारियों को तुरंत जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की निदेशक प्रशासन अलका वर्मा ने आरोपी वरिष्ठ सहायक के निलंबन का आदेश दिया।
विभागीय आदेश के अनुसार, निलंबन की अवधि के दौरान प्रदीप श्रीवास्तव को अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चित्रकूट धाम मंडल बांदा के कार्यालय से संबद्ध किया गया है। साथ ही उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी आरंभ कर दी गई है। जानकारी के अनुसार, विक्रमजोत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत कार्यरत एएनएम सुनीता हाल ही में सेवानिवृत्त हुई हैं, और उनके देयकों तथा एरियर भुगतान की प्रक्रिया चल रही थी।
आरोप है कि इसी दौरान वरिष्ठ सहायक प्रदीप श्रीवास्तव ने एरियर भुगतान के बदले 45 हजार रुपए की मांग की। पीड़ित एएनएम ने अपने भाई की मदद से आरोपी को रिश्वत देते वक्त का वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे मामला तेजी से चर्चित हो गया।
वीडियो के सामने आने के बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके परिणामस्वरूप विभाग ने आरोपी कर्मचारी को निलंबित कर दिया और पूरे मामले की विभागीय जांच आरंभ की गई है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकरण की जांच चित्रकूट धाम मंडल बांदा के अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को सौंप दी गई है। जांच में यदि दोष सिद्ध होता है, तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।